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1970 के दशक में जब अमिताभ बच्चन बॉलीवुड में पर राज कर रहे थे, तब एक और स्टार अपनी दमदार आवाज और दमदार डायलॉग डिलीवरी से उनके राज को चुनौती दे रहा था. लोग अक्सर विनोद खन्ना को अमिताभ का कॉम्पिटिटर मानते हैं, लेकिन असल में जिस एक्टर की पॉपुलैरिटी और मास अपील ने अमिताभ बच्चन को डरा दिया था, वह शत्रुघ्न सिन्हा थे. शत्रुघ्न की बढ़ती शोहरत और सेट पर उनके दबदबे ने अमिताभ को इतना अनकम्फर्टेबल कर दिया कि एक समय के बाद दोनों ने साथ काम करना बंद कर दिया.
नई दिल्ली. अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत में ‘बॉम्बे टू गोवा’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया था. उस समय अमिताभ स्ट्रगल कर रहे थे और शत्रुघ्न एक उभरते हुए विलेन थे, लेकिन 1970 के दशक के बीच तक पूरा इक्वेशन बदल गया था. अमिताभ ‘शहंशाह’ बन गए थे, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा लोगों के चहेते बन गए थे, जिन्हें ‘बिहारी बाबू’ के नाम से जाना जाता था. शत्रुघ्न की खासियत यह थी कि विलेन के रोल में भी वे हीरो से ज्यादा वाहवाही बटोर लेते थे. (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)
अक्सर कहा जाता है कि विनोद खन्ना का मुकाबला अमिताभ बच्चन से था, लेकिन विनोद स्वभाव से ज्यादा शांत थे. इसके उलट, शत्रुघ्न सिन्हा बेबाक और बेहद कॉन्फिडेंट थे. जब भी दोनों एक साथ स्क्रीन पर आते थे, शत्रुघ्न की डायलॉग डिलीवरी अमिताभ बच्चन की सीरियस एक्टिंग पर भारी पड़ती थी. यह इनसिक्योरिटी ‘काला पत्थर (1979)’ के दौरान चरम पर पहुंच गई थी. शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी बायोग्राफी ‘एनीथिंग बट खामोश’ में बताया कि अमिताभ बच्चन ‘काला पत्थर’ के सेट पर उनके बगल में बैठना भी पसंद नहीं करते थे.
अपनी बायोग्राफी शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया है कि अमिताभ बच्चन उनकी बढ़ती पॉपुलैरिटी के कारण अक्सर इनसिक्योर महसूस करते थे. शत्रुघ्न के अनुसार, कई बार तो मेन लीड (अमिताभ) का कद कम न हो इसलिए फिल्म से उनके सबसे अच्छे सीन हटा दिए जाते थे.
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यह दुश्मनी इस हद तक बढ़ गई कि अमिताभ बच्चन शत्रुघ्न सिन्हा वाली फिल्में करने से बचने लगे. इन दोनों को ध्यान में रखकर लिखी गई कई बड़ी मल्टी-स्टारर फिल्में या तो कभी स्क्रीन पर नहीं आईं या उनमें से किसी एक को हटना पड़ा. शत्रुघ्न ने तो यहां तक कहा, ‘सिर्फ इसलिए कि पब्लिक ने मेरे डायलॉग्स पर बहुत ज्यादा शोर मचाया, मुझे कई प्रोजेक्ट्स से बाहर कर दिया गया.’
फिल्म ‘दोस्ताना’ और ‘नसीब’ में उनकी जोड़ी को बहुत तारीफ मिली, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और थी. यहां तक कि ‘नसीब’ के सुपरहिट गाने ‘जॉन जॉनी जनार्दन’ की शूटिंग के दौरान भी दोनों के बीच बातचीत नहीं होती थी. शत्रुघ्न सिन्हा का मानना था कि अमिताभ को लगता था कि शत्रुघ्न उनकी स्टार पावर छीन रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बिग बी को शत्रुघ्न का देर से आना पसंद नहीं था. हालांकि, यह अनुशासन की लड़ाई नहीं थी, बल्कि नंबर 1 की पोजिशन बनाए रखने की लड़ाई थी. 1980 के दशक की शुरुआत के बाद, इन दोनों लेजेंड्स को एक साथ देखना बहुत कम हो गया.
अमिताभ बच्चन ने सोलो एक्शन फिल्मों पर फोकस करना शुरू कर दिया, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा ने अपना रास्ता अलग बनाया. शत्रुघ्न ने पॉलिटिक्स और फिल्मों में अपनी पहचान बनाई, लेकिन अमिताभ से उनकी दूरी बनी रही. हालांकि, सालों बाद दोनों के बीच रिश्ता कुछ हद तक सामान्य हो गया और पुरानी दोस्ती वापस आ गई.

