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जुनैद खान और साई पल्लवी की फिल्म एक दिन बॉक्स ऑफिस पर बुरी फ्लॉप साबित हुई, जिससे आमिर खान का दिल टूट गया. एक बातचीत में मिस्टर परफेक्शनिस्ट ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि जब भी कोई फिल्म फ्लॉप होती है, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे उन्होंने अपना बच्चा खो दिया हो. आमिर ने खुलासा किया कि दर्शकों की निराशा उन्हें इतनी गहरी लगती है कि वह अगले दो-तीन महीनों के लिए डिप्रेशन में चले जाते हैं.
नई दिल्ली. आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी बेटे जुनैद खान की फिल्म एक दिन बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह डिजास्टर साबित हुई. यह मूवी 25 करोड़ की लागत में बनी थी, लेकिन दर्शकों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. इस बीच आमिर खान ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि जब भी उनकी कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होती है, तो उसका उन पर कितना गहरा असर पड़ता है. आमिर ने माना कि फिल्म के फेल होने के बाद वह कई महीनों तक बेहद डिप्रेशन में रहते हैं और गहरे दुख के दौर से गुजरते हैं.
जी म्यूजिक कंपनी के साथ बातचीत में आमिर ने कहा कि जब दर्शक उनकी किसी फिल्म को नकार देते हैं, तो उन्हें यह बात बहुत पर्सनल लगती है. ऐसा इसलिए क्योंकि वह अपनी हर फिल्म को अपने बच्चे की तरह पालते-पोषते हैं. उन्होंने साफ किया कि वह यह सब एक इमोशनल स्तर पर कह रहे हैं. आमिर ने आगे कहा कि जब दर्शकों की उम्मीदें टूटती हैं, तो उसके साथ उनका दिल भी पूरी तरह टूट जाता है.
फिल्मों के फ्लॉप होने पर पड़ने वाले असर को लेकर आमिर खान ने अपना दर्द बयां किया है. उन्होंने कहा, ‘जब मेरी कोई फिल्म पिटती है, तो मेरा दिल पूरी तरह टूट जाता है. आखिरकार, हम फिल्म अपने दर्शकों के लिए ही तो बनाते हैं. जब लोग टिकट खरीदकर थिएटर्स में इस उम्मीद से आते हैं कि उनका मनोरंजन होगा और उन्हें फिल्म पसंद नहीं आती, तो इसका सीधा मतलब है कि हमारे काम में ही कोई कमी रह गई थी. दर्शक कभी भी सोच-समझकर कोई खराब फिल्म देखने नहीं जाते. अगर वे निराश होकर लौट रहे हैं, तो गलती सिर्फ हमारी है.’
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उन्होंने आगे कहा, ‘जब कोई फिल्म नहीं चलती, तो मैं अगले 2-3 महीनों के लिए डिप्रेशन में चला जाता हूं. एक फिल्म आपके अपने बच्चे की तरह होती है, और जब वो बॉक्स ऑफिस पर नाकाम होती है या लोग उसे नकार देते हैं, तो वो दर्द बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल होता है.’
आमिर ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि अपनी नाकामियों या नुकसान पर दुख जताना बहुत जरूरी है. जब आपकी फिल्म नहीं चलती, तो वो एहसास किसी बच्चे को खोने जैसा ही होता है. इसलिए आपको उस पर रोना चाहिए, खुद को थोड़ा वक्त देना चाहिए, ताकि वो सारा दर्द आपके दिल-दिमाग से बाहर निकल सके और आप जिंदगी में आगे बढ़ सकें.’
आमिर खान ने आगे बताया कि वह दर्शकों की पसंद को परखने और उनके ईमानदार फीडबैक पर कितना भरोसा करते हैं. उन्होंने कहा, ‘फिल्ममेकिंग असल में कम्युनिकेशन का ही एक जरिया है; अगर दर्शक तक वो बात नहीं पहुंच रही जो मैं कहना चाहता हूँ, तो मुझे अपनी बात कहने का तरीका बदलना होगा.’
उन्होंने आगे कहा, ‘यह पूरी प्रक्रिया फिल्म के फर्स्ट कट के बाद ही शुरू हो जाती है. मैं फिल्म की टेस्टिंग पर बहुत भरोसा करता हूं, इसलिए हम आम दर्शकों को बुलाकर फिल्म दिखाते हैं और उनसे राय लेते हैं. उनके फीडबैक और रिएक्शन से ही हमें अंदाजा होता है कि फिल्म सही दिशा में जा रही है या नहीं. मेरे लिए असली कामयाबी यही है कि हम जैसी फिल्म बनाना चाहते थे, वैसी बना पाए.’
बताते चलें कि आमिर खान के बेटे जुनैद खान और साई पल्लवी की फिल्म एक दिन को क्रिटिक्स से तारीफें तो बहुत मिलीं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी. सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने पहले दिन महज 1 करोड़ की ओपनिंग ली थी. वहीं, 11 दिनों में यह घरेलू बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 4.25 करोड़ और वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर केवल 5.44 करोड़ का ही कलेक्शन कर पाई.

