कफ सिरप और ब्रोंकोडाइलेटर में क्या अंतर है? किसका उपयोग करना ज्यादा बेहतर, एक्सपर्ट से समझिए

कफ सिरप और ब्रोंकोडाइलेटर में क्या अंतर है? किसका उपयोग करना ज्यादा बेहतर, एक्सपर्ट से समझिए


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Cough Syrup vs Bronchodilator: कफ सिरप खांसी को दबाने का काम करता है और सामान्य खांसी में राहत देता है. जबकि ब्रोंकोडाइलेटर फेफड़ों की सिकुड़ी हुई नलियों को खोलता है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है. डॉक्टर भगवान मंत्री की मानें तो लोगों को कफ सिरप अवॉइड करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह पर ब्रोंकोडाइलेटर का इस्तेमाल करना चाहिए.

कफ सिरप और ब्रोंकोडाइलेटर में क्या अंतर है? किसका उपयोग करना ज्यादा बेहतरZoom

कफ सिरप खांसी से राहत दिलाता है, जबकि ब्रोंकोडाइलेटर सांस लेने की तकलीफ से राहत दिलाता है.

Cough Syrup and Bronchodilator Uses: खांसी की समस्या बहुत कॉमन है और राहत पाने के लिए अक्सर लोग मेडिकल स्टोर पर जाकर कफ सिरप खरीद लेते हैं. कफ सिरप पीने के बाद कई बार खांसी से राहत मिल जाती है. अधिकतर लोग कफ सिरप और ब्रोंकोडाइलेटर को लेकर कंफ्यूज रहते हैं. कई लोगों को लगता है कि ब्रोंकोडाइलेटर भी खांसी की दवा है, लेकिन ऐसा नहीं है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो कफ सिरप (Cough Syrup) और ब्रोंकोडाइलेटर (Bronchodilator) दो पूरी तरह से अलग दवाएं हैं. कफ सिरप फेफड़ों में जमा बलगम या सूखी खांसी के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए उपयोग किया जाता है. वहीं, ब्रोंकोडाइलेटर श्वसन मार्ग की मसल्स को आराम देकर उन्हें चौड़ा करने का काम करते हैं, ताकि सांस लेने में आसानी हो सके. इन दोनों के बीच के अंतर को समझना बेहद जरूरी है, ताकि गलत दवा लेने से बचा जा सके.

नई दिल्ली के जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. भगवान मंत्री ने News18 को बताया कि कफ सिरप मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं. इनका काम बलगम को पतला करना और ब्रेन में जाकर खांसी को कम करना होता है. कफ सिरप केवल खांसी से राहत दिलाते हैं, लेकिन ये खांसी पैदा करने वाली समस्या का समाधान नहीं करते हैं. यही वजह है कि लोगों को आमतौर पर कफ सिरप अवॉइड करना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति को कुछ सप्ताह तक लगातार खांसी रहे, तो कफ सिरप लेने के बजाय डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच करानी चाहिए. अपनी मर्जी से लोगों को कफ सिरप बिल्कुल नहीं लेने चाहिए.

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डॉक्टर मंत्री ने बताया कि ब्रोंकोडाइलेटर दवा मुख्य रूप से उन मरीजों को दी जाती है, जिन्हें अस्थमा या सीओपीडी जैसी सांस से जुड़ी समस्याएं होती हैं. जब फेफड़ों की नलियां सिकुड़ जाती हैं, तो सांस लेने में घरघराहट और तकलीफ होती है. ब्रोंकोडाइलेटर इन नलियों को तुरंत ढीला कर देते हैं, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ जाता है. ये अक्सर इनहेलर या नेबुलाइजर के जरिए लिए जाते हैं. हालांकि कुछ मामलों में ये टैबलेट या सिरप के रूप में भी उपलब्ध होते हैं. इनका उपयोग खांसी रोकने के लिए नहीं, बल्कि वायुमार्ग की रुकावट को दूर करने के लिए किया जाता है. ब्रोंकोडाइलेटर का इस्तेमाल भी डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए, ताकि आपको राहत मिल सके.

एक्सपर्ट की मानें तो अगर आपको केवल खांसी है, तो डॉक्टर की सलाह पर कफ सिरप ले सकते हैं. हालांकि आपकी खांसी के साथ सांस फूल रही है, सीने में जकड़न है या रात में खांसी के कारण सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो ब्रोंकोडाइलेटर की जरूरत हो सकती है. बिना डॉक्टर की सलाह के ब्रोंकोडाइलेटर का उपयोग करना भी ठीक नहीं होता है, क्योंकि यह हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है. वहीं गंभीर अस्थमा में केवल कफ सिरप पीना समय की बर्बादी हो सकती है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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