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एक्टर ने अपने करियर की शुरुआत में एक कॉल सेंटर में काम करते थे. वे अब एक ग्लोबल स्टार है, जिनके शोज पसंद करने वाले दुनियाभर में हैं. दिल्ली की मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखने वाले एक्टर ने 7 साल तक कॉर्पोरेट नौकरी की, जिसे उन्होंने दोस्तों के कहने पर एक्टिंग के लिए छोड़ दिया. साल 2011 में ‘इस प्यार को क्या नाम दूं?’ में आइकोनिक किरदार ने उन्हें रातों-रात पहचान दिलाई. उन्होंने टीवी के बाद ‘असुर’ जैसी वेब सीरीज से अपना टैलेंट दिखाया. वेब सीरीज ‘कोहरा’ भी उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई.
नई दिल्ली: टीवी की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो पहली ही नजर में जादू कर देते हैं. 21 अगस्त 1984 को दिल्ली के एक पंजाबी परिवार में जन्मे एक्टर की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. एक मिडिल क्लास लड़के की तरह उनका बचपन भी स्कूल, खेल-कूद और सादे सपनों के बीच बीता. तब किसी ने नहीं सोचा था कि दिल्ली की गलियों में घूमने वाला एक मामूली लड़का एक दिन करोड़ों दिलों की धड़कन बन जाएगा.
एक्टर के करियर की शुरुआत चकाचौंध के बीच नहीं, बल्कि एक कॉल सेंटर के हेडसेट के साथ हुई थी. परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने महज 17 साल की उम्र में दिल्ली के ‘जिंदल टेलीकॉम’ में नौकरी शुरू कर दी. उन्होंने वहां पूरे 7 साल काम किया और कड़ी मेहनत के दम पर ऑपरेशंस मैनेजर के पद तक पहुंचे. हालांकि, बरुण की कॉर्पोरेट लाइफ एकदम सेट थी, लेकिन उनके अंदर का कलाकार इस 9 से 5 की रूटीन लाइफ से कुछ अलग चाह रहा था.
जब ऑफिस की फाइलों और कॉल्स के बीच बरुण का मन ऊबने लगा, तब उनके करीबी दोस्तों ने उन्हें कुछ नया करने की सलाह दी. एक्टर करण वाही जैसे दोस्तों ने उन्हें मॉडलिंग और एक्टिंग में हाथ आजमाने के लिए प्रेरित किया. बरुण ने एक बहुत बड़ा रिस्क लिया और अपनी जमी-जमाई पक्की नौकरी छोड़कर एक सपने के पीछे भागने का फैसला किया. यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
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एक्टिंग की दुनिया में कदम रखते ही बरुण ने सबसे पहले कुछ मॉडलिंग प्रोजेक्ट्स किए. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद साल 2009 में उन्हें स्टार प्लस के शो ‘श्रद्धा’ में ‘स्वयं खुराना’ का रोल मिला. यह टीवी पर उनका पहला डेब्यू था. हालांकि यह शो बहुत बड़ा हिट नहीं रहा, लेकिन इसने बरुण के लिए ग्लैमर इंडस्ट्री के दरवाजे खोल दिए और उन्हें कैमरे के सामने अपनी जगह बनाने का मौका दिया.
बरुण को शुरुआती स्ट्रगल के बाद मशहूर शो ‘दिल मिल गए’ में एक कैमियो और ‘बात हमारी पक्की है’ में लीड रोल मिला. ‘श्रवण जायसवाल’ के किरदार में दर्शकों ने उन्हें खूब पसंद किया. शोज ने बरुण को एक्टिंग की बारीकियां सीखने और इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाने में बहुत मदद की. अब वह इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा बन चुके थे और बड़े मौके का इंतजार कर रहे थे.
बरुण की साल 2011 में किस्मत ने ऐसी करवट ली कि सब बदल गया. उन्हें स्टार प्लस के शो ‘इस प्यार को क्या नाम दूं?’ में बिजनेस टाइकून ‘अर्णव सिंह रायजादा’ (ASR) का रोल मिला. एक्टर के अपोजिट सनाया ईरानी थीं. अर्णव का वो गुस्सा, उसका एटीट्यूड और उसकी गहरी आंखों वाला अंदाज दर्शकों को इतना भाया कि बरुण रातों-रात सुपरस्टार बन गए. यह शो न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी जबरदस्त हिट रहा.
अर्णव और खुशी (सनाया ईरानी) की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने टीवी पर जैसे आग लगा दी थी. फैंस उन्हें प्यार से ‘अरशी’ कहने लगे और उनकी लव स्टोरी भारतीय टेलीविजन की सबसे यादगार कहानियों में से एक बन गई. बरुण के डायलॉग बोलने के अंदाज और उनकी इंटेंस पर्सनैलिटी ने उन्हें हर घर का चहेता ‘रोमांटिक हीरो’ बना दिया. एएसआर का वो ‘व्हाट द…’ वाला अंदाज आज भी फैंस के जेहन में ताजा है.
टीवी पर राज करने के बाद बरुण सोबती ने अपनी वर्सटाइल एक्टिंग का लोहा ओटीटी (OTT) पर भी मनवाया. ‘असुर’ और ‘कोहरा’ जैसी वेब सीरीज में उनकी सीरियस एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई. अपनी निजी जिंदगी में बरुण बेहद सादगी पसंद हैं और उन्होंने 2010 में अपनी हाई-स्कूल की दोस्त पशमीन से शादी की. एक कॉल सेंटर एम्पलॉय से स्टार बनने तक का याद दिलाता है कि जो सपनों को पूरा करने की हिम्मत रखता है, वो आगे सफल रहता है.

