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क्या इस बार मार्च के महीने में आपका पीरियड्स इर्रेगुलर या काफी लेट आया है? हर बार मार्च के महीने में ही मासिक धर्म में देरी होती है? इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. किसी खास महीने से पीरियड्स के लेट आने का क्या लेना-देना है, अगर मार्च में ही पीरियड्स लेट आते हैं तो इसके पीछे क्या कोई वैज्ञानिक कारण, मौसमी परिवर्तन आदि जिम्मेदार है? यहां जानिए एक्सपर्ट की राय…

महिलाओं को हर महीने पीरियड्स आते हैं. कुछ को मासिक धर्म आने में थोड़ा लेट हो जाता है, तो कुछ के पीरियड्स कई बार मिस भी हो जाते हैं. इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे प्रेग्नेंसी, हॉर्मोनल असंतुलन, स्ट्रेस, थायरॉइड, अचानक वजन बढ़ना या कम होना, बेतरतीब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खानपान, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन आदि लेट पीरियड्स या इर्रेगुलर पीरियड्स के कारण होते हैं.

पीरियड्स लेट होने को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर भी एक पोस्ट ट्रेंड कर रही है. इस पोस्ट में बताया गया है कि मार्च का महीना अच्छा नहीं होता है, खासकर पीरियड्स को लेकर. इस पोस्ट को काफी लोगों ने पढ़ा और हैरान भी हुए कि आखिर मार्च में क्यों पीरियड्स आने में लेट होगा? हालांकि, बाद में यह चर्चा मीम्स में बदल गई. क्या वाकई मार्च के महीने में इस बार मासिक धर्म में देरी हुई. इस पोस्ट को लेकर डॉक्टर कहते हैं कि इन बदलावों के पीछे स्पष्ट वैज्ञानिक कारण हैं.

मार्च का महीना स्ट्रेस फुल होता है, क्योंकि इस महीने में कई एग्जाम होते हैं. 10 और 12 क्लास के बोर्ड एग्जाम का लड़कियों पर प्रेशर होता है. इससे परीक्षा की तैयारी करने में छात्राओं पर प्रेशर बढ़ता है. लड़कों की तुलना में लड़कियां वैसे भी एग्जाम में अपना सौ प्रतिशत लगा देती हैं. साथ ही कामकाजी लोगों के लिए वित्तीय वर्ष के अंत का तनाव लेकर आता है. अत्यधिक तनाव हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे पीरियड्स में देरी या अनियमितता हो सकती है.
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नींद के पैटर्न और डेली रूटीन भी पीरियड्स को प्रभावित कर सकते हैं. काम के दबाव, यात्रा या जीवनशैली में बदलाव के कारण अनियमित नींद शरीर की आंतरिक घड़ी को बाधित कर सकती है, जिससे मासिक चक्र की नियमितता प्रभावित हो सकती है.

जर्नल ऑफ वूमेन्स हेल्थ में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, जब कोई महिला बहुत अधिक तनाव ग्रस्त होती है, तो भी पीरियड्स देर से आती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अध्ययनों की मानें तो हार्मोनल चक्र कैलेंडर तिथियों की तुलना में शरीर की सर्कैडियन रिदम से अधिक प्रभावित होते हैं, इसलिए मामूली बदलाव सामान्य हैं.

कई बार इसके पीछे मौसमी बदलाव भी कारण हो सकते हैं. फरवरी के बाद मार्च महीने में सीजन में भारी बदलाव आता है. सर्दी खत्म होने के बाद मार्च में गर्मी शुरू होती है. इससे धूप काफी तेज होता है. इस कारण से मेलाटोनिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन के लेवल पर काफी असर पड़ सकता है. ये बदलाव ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे मासिक चक्र के समय में मामूली परिवर्तन हो सकते हैं.

बेहतर है कि आप किसी भी महीने को इसके लिए दोष न दें. पीरियड्स कई बार शरीर में होने वाले हॉर्मोनल बदलावों, स्ट्रेस, खानपान खराब होना आदि के कारण भी लेट आती है. बेहतर है कि अपनी लाइफस्टाइल, खानपान को बेहतर करें. स्ट्रेस को दूर करें. पर्याप्त नींद लें. बैलेंस डाइट लें. स्वस्थ दिनचर्या का पालन करें. यदि इन सभी चीजों को फॉलो करने के बाद भी आपका पीरियड्स 10 दिनों से अधिक लेट हो गया है तो डॉक्टर से तुरंत मिलें.