खेलते-खेलते बच्ची ने निगली छोटी सी ‘चीज’, फट गई सांस नली, वेंटिलेटर पर रखना पड़ा, पेरेंट्स दें ध्यान

खेलते-खेलते बच्ची ने निगली छोटी सी ‘चीज’, फट गई सांस नली, वेंटिलेटर पर रखना पड़ा, पेरेंट्स दें ध्यान


छोटे बच्चे खेलते-खेलते अक्सर चीजें मुंह में डाल लेते हैं. यहां तक कि खाने पीने की चीजें ही उनके लिए कभी-कभी इतनी नुकसानदेह हो जाती हैं, जिसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते. ऐसा ही एक मामला दिल्ली में सामने आया है जब डेढ़ साल की बच्ची ने खेलते-खेलते मूंगफली का दाना निगल लिया और वह दाना उसकी सांस नली में इस कदर फंस गया कि बच्ची को वेंटिलेटर तक पर रखना पड़ा.

बच्ची के मूंगफली निगलने के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी तो पेरेंट्स उसको गंभीर हालत में आकाश हेल्थकेयर लेकर पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने जांच में पाया कि मूंगफली का दाना उसकी सांस नली में फंसा हुआ था और उसके सीने के अंदर हवा लीक होने लगी थी. फेफड़ों की हवा बाहर निकलकर आसपास के ऊतकों में फैलने लगी. मूंगफली का टुकड़ा पूरी तरह से सांस की नली को बंद कर चुका था, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की गंभीर कमी हो गई और फेफड़ों पर दबाव बढ़ गया.

आकाश हेल्थकेयर के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर विशेषज्ञ डॉ. समीर पुनिया ने बताया कि बच्ची को जब अस्पताल लाया गया था तो उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम था. जांच में पता चला कि फेफड़ों से हवा बाहर निकलकर आसपास के ऊतकों में जा रही थी, जो सांस की नली को गंभीर नुकसान का संकेत था. बच्ची को तुरंत पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती किया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया.

डेढ़ साल की बच्‍ची ने मूंगफली का दाना न‍िगल ल‍िया था, हालांक‍ि अब बच्‍ची ठीक है.

डॉ. समीर ने बताया कि यह सामान्य चोकिंग का मामला नहीं था, बल्कि फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर आपात स्थिति थी. मूंगफली का टुकड़ा पूरी तरह से सांस की नली को चोक कर चुका था, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिर रहा था और फेफड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा था.

रेस्पिरेटरी और स्लीप मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. अक्षय बुधराजा ने बताया कि बच्ची की स्थिति काफी क्रिटिकल थी क्योंकि मूंगफली के टुकड़े ने सांस की नली की अंदरूनी परत को फाड़ दिया था. फेफड़ों को पहले से हुए नुकसान को देखते हुए, मूंगफली को निकालने की प्रक्रिया बहुत सावधानी और सटीकता के साथ करनी थी, ऐसे में प्रक्रिया के बाद बच्ची को कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया. इलाज के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी है.

उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की कमी के मामलों में कई बार न्यूरोलॉजिकल समस्या भी पैदा हो जाती है हालांकि जांचों में पाया गया कि बच्ची को ऐसा कोई खतरा पैदा नहीं हुआ है.

माता-पिता के ल‍िए चेतावनी है ये केस
आकाश हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक डॉ. आशीष चौधरी ने कहा कि यह मामला माता-पिता के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है. बहुत छोटे बच्चों को मेवे और पॉपकॉर्न जैसी चीजें देना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ये सांस की नली में फंसकर फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं.

उन्होंने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञों, श्वसन विशेषज्ञों, ईएनटी सर्जनों, एनेस्थेटिस्ट और क्रिटिकल केयर टीम के बेहतरीन सहयोग से बच्ची की जान बचाई जा सकी, लेकिन छोटे बच्चों के मामलों में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा हो सकती है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *