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‘गदर’ के बाद आई थी ‘रिटर्न ऑफ गदर’, 2002 में रिलीज हुई थी ‘सनी देओल’ की फिल्म! आज तक इससे अनजान होंगे लोग

‘गदर’ के बाद आई थी ‘रिटर्न ऑफ गदर’, 2002 में रिलीज हुई थी ‘सनी देओल’ की फिल्म! आज तक इससे अनजान होंगे लोग


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2002 में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई थी, जिसने अपने टाइटल से दर्शकों को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन आखिर में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. ‘रिटर्न ऑफ गदर- एक देश प्रेमी’, जो 3 मई 2002 को थिएटर में आई थी, असल में सनी देओल की ब्लॉकबस्टर ‘गदर’ का ऑफिशियल सीक्वल नहीं थी. किशन शाह के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म टिकने के लिए एक कमजोर स्क्रिप्ट और डुप्लीकेट एक्टर पर निर्भर थी. फिल्म का एकमात्र मकसद ‘गदर’ नाम का फायदा उठाना था, लेकिन दर्शकों ने इस गुमराह करने वाली मार्केटिंग को नकार दिया, जिसका नतीजा बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी नाकामी थी.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में अक्सर देखा जाता है कि जब कोई बड़ी फिल्म इतिहास रचती है, तो कई छोटे बजट के प्रोड्यूसर उसके नाम की लहर पर सवार होने की कोशिश करते हैं. कुछ ऐसा ही 2002 में हुआ था, जब सनी देओल की ‘गदर: एक प्रेम कथा’ का खुमार पूरे देश में अभी उतरा नहीं था. इस पॉपुलैरिटी का फायदा उठाने के लिए, डायरेक्टर किशन शाह ने ‘रिटर्न ऑफ गदर- एक देश प्रेमी’ नाम की फिल्म बनाई. यह फिल्म 3 मई 2002 को रिलीज हुई थी, लेकिन इसका हश्र इतना बुरा हुआ कि आज इसे बॉलीवुड की सबसे बड़ी नाकामयाब और सबसे गुमराह करने वाली फिल्मों में से एक माना जाता है.

फिल्म की कहानी अपने टाइटल के हिसाब से देशभक्ति की भावना दिखाने में नाकाम रही. आनंद देहलवी का लिखा स्क्रीनप्ले एक घिसे-पिटे फॉर्मूले पर आधारित था. कहानी एक जालिम पिता के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी बेटी के लव अफेयर का विरोध करता है. अपने ईगो को संतुष्ट करने के लिए, पिता इतना नीचे गिर जाता है कि अपनी बेटी के लवर पर टेररिज्म का झूठा इल्जाम लगाकर उसे खत्म कर देता है. पूरी फिल्म हीरो की अपनी बेगुनाही साबित करने और अपने पिता की साजिशों से लड़ने की कोशिश पर फोकस करती है.

फिल्म की सबसे बड़ी अजीब बात इसकी स्टार कास्ट थी. किसी बड़े स्टार के बजाय, फिल्म की मेन कास्ट में ‘सनी देओल का डुप्लीकेट’ था. फिल्म में रमेश गोयल और अमित कपूर जैसे एक्टर भी थे. प्रोड्यूसर्स ने पोस्टर और टाइटल के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि यह फिल्म सनी देओल की ‘गदर’ से इंस्पायर्ड है या उसका सीक्वल है.

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3 मई 2002 को रिलीज होने पर फिल्म को ऑडियंस और क्रिटिक्स दोनों ने रिजेक्ट कर दिया. इसके फ्लॉप होने के कई खास कारण थे. ‘गदर’ जैसा बड़ा टाइटल इस्तेमाल करना फिल्म के लिए उल्टा पड़ गया. किशन शाह के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म टेक्निकली बहुत कमजोर थी. सिनेमैटोग्राफी से लेकर एक्शन सीक्वेंस तक, सब कुछ एक B-ग्रेड फिल्म जैसा था.

‘डुप्लीकेट’ एक्टर्स की मदद से पूरी फिल्म चलाना नामुमकिन था. ओरिजिनल स्टार्स में करिश्मा की कमी ने फिल्म को डल बना दिया. फिल्म का म्यूजिक और डायलॉग भी दर्शकों पर असर नहीं डाल पाए. आनंद देहलवी की राइटिंग मॉडर्न और गहरी नहीं थी.

‘रिटर्न ऑफ गदर- एक देश प्रेमी’ बॉक्स ऑफिस पर इतनी फ्लॉप रही कि पहले ही दिन इसके शो खाली रहे. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो डिस्ट्रीब्यूटर्स को भारी नुकसान हुआ और कई जगहों पर तो फिल्म एक हफ्ता भी नहीं चली.

यह फिल्म उन प्रोड्यूसर्स के लिए एक कड़ा सबक थी जो सोचते थे कि वे सिर्फ एक सफल फिल्म का नाम चुराकर सफल हो सकते हैं. 3 मई 2002 को रिलीज हुई यह फिल्म इतिहास में एक डिजास्टर फिल्म के तौर पर दर्ज हुई, जिसने अपनी पहचान बनाने के बजाय, दूसरों की पहचान चुराने की नाकाम कोशिश की.

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