तेहरान में बंधक थे छह अमेरिकी, रेस्क्यू के लिए CIA ने पूरी पिक्चर ही बना डाली! 46 साल पुरानी वो सच्ची कहानी

तेहरान में बंधक थे छह अमेरिकी, रेस्क्यू के लिए CIA ने पूरी पिक्चर ही बना डाली! 46 साल पुरानी वो सच्ची कहानी


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तेहरान में बंधक थे छह अमेरिकी, रेस्क्यू के लिए CIA ने पूरी पिक्चर ही बना डाली!

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साल 1979 को अमेरिका कैसे भूल सकता है, ईरान की क्रांति के दौरान तेहरान उसके 6 डिप्लोमैट बंधक बना लिए गए थे. फिर उनको वहां निकालने के लिए सीआईए ने नकली मूवी की प्लॉट रच डाली. जब तक ईरानियों को कुछ समझ में आता उनको पिछले दरवाजे से निकाल लिया गया. इस रेस्क्यू मिशन के मास्टरमाइंड सीआईए के टोनी मेंडेज थे. इस नकली फिल्म का नाम आर्गो (Argo) था, जिसपर बाद में सच में मूवी बनाई गई.

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नकली फिल्म के प्लॉट के जरिए बचाए गए अमेरिकी 6 डिप्लोमैट. (एआई)

हाल ही अमेरिका ने फाइटर जेट मैकडोनल डगलस F-15A ईगल के पायलट को ईरान से रेस्क्यू किया है. इस पायलट को ईरानी सैनिक भी खोज रहे थे, ताकि अमेरिका को घुटनों पर लाया जा सके. मगर, अमेरिका अपने पायलट को सफलता पूर्वक खोजकर ईरान से रेस्क्यू किया. लेकिन, क्या आपको पता है कि यही अमेरिका इसी ईरान में 46 साल पहले ग्रेट रेस्क्यू मिशन चलाया था. जिसने अपने 6 डिप्लोमैट को बचाने के लिए सीआईए ने नकली फिल्म की प्लॉट रच डाली और तेहरान की गुस्साई भीड़ के जबड़े से अपने नागरिकों को बचा ले गया. चलिए जानते हैं क्या है वो कहानी?

4 नवंबर, 1979 को ईरान में अमेरिका विरोधी लहर अपने चरम पर थी. गुस्साई भीड़ ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर धावा बोल दिया. कुल 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया गया. ईरानी प्रदर्शनकारी अमेरिका द्वारा उनके पूर्व शाह मोहम्मद राजा पहलवी को शरण देने से नाराज थे. इसी अफरा-तफरी और कोहराम के बीच ईरान की गुस्साई भीड़ के बीच 6 अमेरिकी राजनयिक दूत फंस गए थे. जिन्होंने अपने दूतावास से भागकर कनाडाई राजदूत केन टेलर के घर में शरण ली. वहां से उनकी रेस्क्यू की गई.

कौन थे 6 अमेरिकी

  1. रॉबर्ट एंडर्स
  2. मार्क लिजेक
  3. कोरा लिजेक
  4. जोसेफ स्टैफोर्ड
  5. कैथलीन स्टैफोर्ड
  6. ली शैट्ज़

टोनी मेंडेज़ और ‘आर्गो’ का आइडिया

जब इन 6 लोगों को बाहर निकालने के सारे रास्ते बंद दिखे, तब सीआईए के ‘एक्सफिल्ट्रेशन’ एक्सपर्ट टोनी मेंडेज़ की एंट्री हुई. उन्होंने एक ऐसी योजना बनाई जो जितनी पागलपन भरी थी, उतनी ही सटीक. उन्होंने तय किया कि वे इन राजनयिकों को कनाडाई फिल्म क्रू का रूप देंगे, जो ईरान में एक साइंस-फिक्शन फिल्म की शूटिंग के लिए लोकेशन देखने आए हैं. इस नकली फिल्म को नाम दिया गया- ‘आर्गो’.

हॉलीवुड को बनाया हिस्सा

इस योजना को सच दिखाने के लिए टोनी ने हॉलीवुड के मशहूर मेकअप आर्टिस्ट जॉन चेम्बर्स की मदद ली. उन्होंने बाकायदा एक प्रोडक्शन ऑफिस खोला, फिल्म के विज्ञापन छपवाए और इन 6 राजनयिकों के लिए नकली पासपोर्ट और पहचान पत्र तैयार किए. उन्हें ट्रेनिंग दी गई कि अगर एयरपोर्ट पर पूछताछ हो, तो वे खुद को फिल्म का कैमरामैन, निर्देशक या लेखक कैसे बताएं.

मौत के साये में वो आखिरी पल

27 जनवरी, 1980 को वह दिन आया जब इन्हें तेहरान एयरपोर्ट से निकलना था. हर पल डर था कि कहीं कोई पहचान न ले. उस समय ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स हर संदिग्ध पर नज़र रख रहे थे. आखिरी समय में अमेरिकी सरकार ने मिशन रद्द करने का विचार भी किया था, लेकिन टोनी मेंडेज़ ने जोखिम लिया. विमान के उड़ने तक सबकी सांसें अटकी थीं. जैसे ही विमान ईरानी हवाई क्षेत्र से बाहर निकला, विमान में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी. ये 6 लोग मौत के मुंह से बाहर आ चुके थे.

हॉलीवुड एक्टर और डायरेक्टर Ben Affleck ने 2012 में इसी ऑपरेशन पर Argo ही नाम से फिल्म बनाई.

रील और रियल लाइफ का मेल

इस मिशन की गोपनीयता बनाए रखने के लिए सालों तक इसे छिपाया गया. 2012 में जब हॉलीवुड सुपरस्टार बेन एफ्लेक ने इस पर ‘Argo’ नाम की फिल्म बनाई, तब दुनिया को इस बहादुरी का असली पता चला. फिल्म में बेन एफ्लेक ने टोनी मेंडेज़ की भूमिका निभाई थी, जबकि एलन आर्किन और जॉन गुडमैन जैसे दिग्गजों ने उनकी टीम का किरदार निभाया.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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