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Mohammed Rafi Devotional Songs : मोहम्मद रफी ने 70 के दशक की शुरुआत में ही हज से लौटने के बाद फिल्मों के लिए लगभग बंद कर दिया था. बड़े भाई के समझाने पर बड़ी मुश्किल से माने. दोबारा फिल्मों में गाने लगे. 46 साल पहले उन्होंने एक ऐसा कालजयी गाना गाया जिसका क्रेज आज तक बरकरार है. यह गाना आज भी मंदिरों में, पूजा-पंडाल में सुनाई देता है. माता वैष्णो देवी के जत्थे इस गाने को जरूर गाते हैं. अंबे माता के भक्त इस गाने को सुनते ही झूम उठते हैं. रफी साहब क यह एवरग्रीन गाना दो फिल्मों में सुनाई दिया. एक फिल्म सुपरहिट साबित हुई जबकि दूसरी डिजास्टर साबित हुई. वो गाना कौन सा था, और वो फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं…..
चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी का त्योहार पूरे देश में श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. राम नवमी पर देशभर में दुर्गा पूजा पंडाल में भंडारों का आयोजन भी किया गया. पूजा पंडालों में पूरे नौ दिन मोहम्मद रफी का एक कालजयी सॉन्ग भी सुनने को मिला. इस कालजयी गाने के बोल हैं : तूने मुझे बुलाया शेरावालिये. यह गाना सबसे पहले 1980 में रिलीज हुई जीतेंद्र रीना रॉय-रामेश्वरी स्टारर फिल्म ‘आशा’ में सुनाई दिया था. आगे चलकर यही गाना 1988 में एक और फिल्म में सुनाई दिया. वो फिल्म कौन सी थी, इस पर चर्चा हम आगे करेंगे.
21 मार्च 1980 को जे. ओम प्रकाश के निर्देशन में बनी एक फिल्म ‘आशा’ रिलीज हुई थी. जे. ओम प्रकाश बॉलीवुड सुपर स्टार ऋतिक रोशन के नाना थे. बहुत बड़े निर्माता-निर्देशक थे. आशा फिल्म की कहानी राम केलकर ने लिखी थी. डायलॉग रमेश पंत के थे. जीतेंद्र, रीना रॉय और रामेश्वरी लीड रोल में नजर आई थीं. गीतकार आनंद बख्शी थे. संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने दिया था. इस फिल्म में ऋतिक रोशन ने भी बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट डांस किया था.
लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी ने अपने करियर में 1950 से 1965 तक इकतरफा राज किया. 1965 के बाद देवानंद के लिए किशोर कुमार अपनी आवाज देने लगे थे. 1969 में आई आराधना फिल्म ने राजेश खन्ना के साथ-साथ किशोर दा की भी किस्मत बदली. राजेश खन्ना सुपर स्टार बने तो उन्होंने किशोर कुमार से ही अपने गाने गवाए. प्रोड्यूसर्स पर खूब दबाव डाला. ऐसे में रफी साहब पिछड़ने लगे. बॉलीवुड में इस बात की चर्चा हमेशा हुई.
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इस कहानी का एक और पक्ष भी है. मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी ने अपने एक इंटरव्यू में दावा किया कि 1970 से पहले उनके पिता हज पर गए थे. हज से लौटने के बाद ‘गायन’ को गुनाह मानने लगे. रफी साहब लंदन में जाकर रहने लगे ताकि प्रोड्यूसर्स उन तक पहुंच ही ना पाएं. बड़े भाई के समझाने पर फिर से गाना शुरू किया. फिर एक से बढ़कर एक गाने गाए. 1974 में नासिर हुसैन की फिल्म’हम किसी से कम नहीं’ में ‘क्या हुआ तेरा वादा’ जैसा सदाबहार गाना गाया और नेशनल अवॉर्ड भी जीता.
मोहम्मद रफी ने ही ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिये’ जैसा सदाबहार गाना ‘आशा’ फिल्म के लिए गाया. माता की भेंट को मोहम्मद रफी-नरेंद्र चंचल ने गाया था. यह गाना राग भैरवी पर आधारित है. आज भी नवरात्रि में हर पूजा-पंडाल में सुनने को मिलता है. आशा फिल्म के सभी गाने ब्लॉकबस्टर साबित हुए थे. इस फिल्म का एक और सुपरहिट गाना ‘शीशा हो या दिल हो, आखिर टूट जाता है’ था. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को बेस्ट डायरेक्टर फिल्म फेयर अवॉर्ड में नॉमिनेशन भी मिला था.
सबसे दिलचस्प बात यह कि आशा फिल्म का ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिये’ गाना 1988 में आई फिरोज खान-अमजद खान की फिल्म ‘दो वक्त की रोटी’ में सुनाई दिया था. अब आपके भी मन में सवाल उठ रहा होगा कि एक जैसा दो फिल्मों में कैसे आया? शायद ही कुछ लोगों को इस बात की जानकारी हो कि ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिये’ गाना सबसे पहले ‘दो वक्त की रोटी’ फिल्म के रिकॉर्ड किया गया था.
यह बात 1978 के आसपास की है, जब इस फिल्म का निर्माण शुरू हुआ था. ‘दो वक्त की रोटी’ में फिरोज खान, संजीव कुमार, रीना रॉय, अमजद खान और सुलक्षणा पंडित नजर आए थे. सतपाल ने फिल्म का डायरेक्शन किया था. एमपी अग्रवाल फिल्म के प्रोड्यूसर थे. वैसे इस फिल्म का निर्माण 1978 के आसपास संजीव कुमार के भाई नकुल ने शुरू किया था. फिल्म के निर्माण के दौरान नकुल का असामयिक निधन हो गया. इस वजह से फिल्म बंद हो गई.
फिल्म अटक गई तो यह गीत प्रोड्यूसर-डायरेक्टर जे. ओम प्रकाश ने खरीद लिया. वो उन दिनों ‘आशा’ फिल्म बना रहे थे. यह गाना कालजयी सॉन्ग साबित हुआ और फिल्म की पहचान बन गया. बाद में ‘दो वक्त की रोटी’ को प्रोड्यूसर एमपी अग्रवाल ने पूरा किया. 1988 में फिल्म को पूरा करके रिलीज किया गया. उन्होंने ‘दो वक्त की रोटी’ फिल्म में भी ‘तूने मुझे बुलाया’ गाने को रख लिया गया. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुई. दोनों ही फिल्मों में रीना रॉय नजर आई थीं. ‘आशा’ फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई. यह 1980 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी.

