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‘फ्लॉप’ के टैग ने छीन ली थी सुपरस्टार बनने की उम्मीद! तब हाथ लगी 1 ऐसी फिल्म, रातोंरात बदली थी अजय देवगन की तकदीर

‘फ्लॉप’ के टैग ने छीन ली थी सुपरस्टार बनने की उम्मीद! तब हाथ लगी 1 ऐसी फिल्म, रातोंरात बदली थी अजय देवगन की तकदीर


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अजय देवगन का बॉलीवुड में डेब्यू ‘फूल और कांटे’ से हुआ था. अपनी पहली फिल्म की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद, एक ऐसा दौर आया जब अजय की फिल्में लगातार फ्लॉप और डिजास्टर साबित हुईं. कहा जाता है कि उन दिनों लोगों ने मान लिया था कि इंटेंस लुक्स वाले इस एक्टर का करियर उतनी ही तेजी से खत्म हो जाएगा जितनी तेजी से शुरू हुआ था, लेकिन 1994 में रिलीज हुई ‘दिलवाले’ ने अजय देवगन का पासा पलट दिया. इसकी सिल्वर जुबली सफलता ने न सिर्फ उनके करियर को फिर से जिंदा कर दिया, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री में एक लंबी दूरी के रनर के तौर पर भी स्थापित कर दिया, एक ऐसा आदमी जिसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

नई दिल्ली. 1991 में जब एक सांवले, गहरी आंखों वाले लड़के ने अपनी पहली फिल्म ‘फूल और कांटे’ के लिए फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू अवॉर्ड जीता, तो ऐसा लगा कि बॉलीवुड को अपना अगला मेगास्टार मिल गया है. लेकिन, फिल्म इंडस्ट्री एक्टर्स को उतनी ही तेजी से ऊपर उठा सकती है जितनी तेजी से उन्हें बेरहमी से नीचे गिरा सकती है. अजय देवगन के साथ भी ठीक यही हुआ. डेब्यू में जबरदस्त सफलता के बाद, 1992 और 1993 के बीच अजय का चार्ट इतनी तेजी से गिरा कि उन्हें ‘वन-फिल्म वंडर’ कहा जाने लगा था, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था.

‘फूल और कांटे’ के बाद अजय देवगन से बहुत उम्मीदें थीं. लेकिन, ‘दिव्या शक्ति’, ‘प्लेटफॉर्म’, ‘शक्तिमान’ और ‘एक ही रास्ता’ जैसी बाद की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाईं, सिवाय ‘जिगर’ के. इस दौरान अजय के लुक्स और उनके शांत व्यवहार का मजाक उड़ाया गया. कहा जाता है कि उन दिनों अजय देवगन सिर्फ स्टंट पर निर्भर थे और उनमें उस समय के खान स्टार्स (शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान) जैसा करिश्मा नहीं था.

उस दौर में बॉलीवुड के गलियारों में यह बात फैलने लगी कि एक्टर अपने डेब्यू का फायदा उठाने में फेल हो गए हैं. डिस्ट्रीब्यूटर उनके नाम पर इन्वेस्ट करने से हिचकिचा रहे थे. तभी डायरेक्टर हैरी बावेजा ने ‘दिलवाले’ के बारे में सोचा, जिसमें अजय देवगन और उस समय के उभरते हुए एक्शन स्टार सुनील शेट्टी थे. अजय के लिए यह फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं थी, बल्कि अपने वजूद को बचाने की एक आखिरी कोशिश थी.

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जब 4 फरवरी 1994 को ‘दिलवाले’ थिएटर में रिलीज हुई तो इसने सब कुछ बदल दिया. इस फिल्म में अजय देवगन ने ‘अरुण’ का किरदार निभाया, जो प्यार में धोखा मिलने के बाद अपना मेंटल बैलेंस खो देता है.

फिल्म के पहले हाफ में अजय ने एक पागल प्रेमी के तौर पर जो बेबसी और जोश दिखाया, उसने क्रिटिक्स का मुंह बंद कर दिया. पहली बार लोगों ने पहचाना कि अजय देवगन सिर्फ एक मोटरसाइकिल स्टंट एक्टर नहीं, बल्कि एक पावरहाउस परफॉर्मर हैं. वहीं, सुनील शेट्टी के साथ उनकी केमिस्ट्री और फिल्म के इमोशनल एक्शन ने दर्शकों का मन मोह लिया. ‘दिलवाले’ उस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बनी और 25 हफ्तों तक थिएटर में चलते हुए अपनी सिल्वर जुबली मनाई.

‘दिलवाले’ के म्यूजिक ने अजय देवगन के करियर को फिर से खड़ा करने में बड़ा रोल निभाया. नदीम-श्रवण के कंपोज किए और कुमार सानू के गाए ‘जीता था जिसके लिए’ और ‘मौका मिलेगा तो हम’ जैसे गानों ने अजय को घर-घर में मशहूर कर दिया. अजय देवगन दिल टूटे प्रेमियों के लिए एक आइकॉन बन गए. गानों की पॉपुलैरिटी ने फिल्म की कमाई में और इजाफा किया.

‘दिलवाले’ की सफलता ने अजय देवगन को वह कॉन्फिडेंस और मार्केट वैल्यू दी जिसकी उन्हें सख्त जरूरत थी. इस फिल्म के बाद, उन्हें ‘विजयपथ’, ‘नाजायज’ और बाद में ‘जख्म’ जैसी फिल्में मिलीं, जिसने उन्हें एक सीरियस और वर्सेटाइल एक्टर के तौर पर स्थापित किया. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर 1994 में ‘दिलवाले’ नहीं आई होती तो शायद हम आज बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाले ‘सिंघम’ को पर्दे पर नहीं देख पाते.

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