ब्रेन ट्यूम शब्द बहुत डरावना होता है. खासतौर पर जब बच्चे को ये बीमारी निकल आए तो पेरेंट्स बेबस महसूस करने लगते हैं.जबकि सही जानकारी और इलाज से इस समस्या को ठीक किया जा सकता है. जिन माता-पिता के बच्चे को ब्रेन ट्यूमर का पता चला है, उनके लिए यह उनकी ज़िंदगी का सबसे मुश्किल और स्ट्रेस वाला समय होता है. डर, चिंता और गलत जानकारी की वजह से, माता-पिता इस बीमारी के बारे में ऐसी गलत बातें मान लेते हैं, जिनसे उनका मेन्टल तनाव और बढ़ जाता है और इलाज में भी देरी हो सकती है. इसलिए, ब्रेन ट्यूमर के बारे में सही जानकारी हासिल करना और समय पर डॉक्टरी सलाह लेना, ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित बच्चे के ठीक होने और सफल इलाज में बहुत मददगार साबित हो सकता है.
डॉ. कपिल जैन, एसोसिएट डायरेक्टर एवं न्यूरोसर्जरी यूनिट के प्रमुख, मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत बताते हैं कि ब्रेन ट्यूमर तब होता है, जब दिमाग के अंदर असामान्य सेल्स तेजी से बढ़ने लगती हैं. हालांकि, कई ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, लेकिन कुछ बहुत ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं. अच्छी बात यह है कि मेडिकल टेक्नोलॉजी में हुई तरक्की की वजह से, ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित कई बच्चों का अब इलाज संभव है और इलाज के बाद उनके पूरी तरह से ठीक होकर एक सामान्य और खुशहाल जिंदगी जीने की संभावना भी काफी बढ़ गई है. इसके अलावा, ब्रेन ट्यूमर के बारे में सच्चाई जानने से आपको गलतफहमियों और असलियत के बीच का फर्क समझने में भी मदद मिलेगी.
मिथक 1- सभी ब्रेन ट्यूमर कैंसर वाले होते हैं
फैक्ट – कई माता-पिता को यह चिंता रहती है कि सभी ब्रेन ट्यूमर कैंसर ही होते हैं, लेकिन यह बात बिल्कुल भी सही नहीं है. हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर वाला नहीं होता. कई मामलों में, बच्चों को बिना कैंसर वाले ब्रेन ट्यूमर होते हैं. बिना कैंसर वाले ट्यूमर का भी इलाज करवाना पड़ सकता है, क्योंकि दिमाग बहुत ही संवेदनशील अंग है और उसमें जगह भी बहुत कम होती है, जैसे-जैसे ट्यूमर का आकार बढ़ता है, वह दिमाग के आस-पास के हिस्सों पर दबाव डालने लगता है, जिससे कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं. अच्छी बात यह है कि जिन बच्चों की बीमारी का पता समय पर चल जाता है, जिनका इलाज सर्जरी की आधुनिक तकनीकों से किया जाता है और जिनकी सही देखभाल की जाती है, वे पूरी तरह से ठीक होकर एक स्वस्थ जिंदगी में वापस लौट आते हैं.
मिथ 2: मोबाइल फोन और वाई-फाई से निकलने वाली रेडिएशन की वजह से बच्चों को ब्रेन ट्यूमर होता है
फैक्ट – कई माता-पिता को लगता है कि उनके बच्चे को कैंसर इसलिए हुआ है, क्योंकि वह मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करता था, स्क्रीन पर बहुत ज्यादा समय बिताता था या वायरलेस नेटवर्क का बहुत ज्यादा उपयोग करता था. फिलहाल, इस बात का कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है कि मोबाइल फोन, वाई-फाई रेडिएशन और ब्रेन ट्यूमर के बीच कोई भी सीधा संबंध है. हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करना चाहिए; लेकिन माता-पिता के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि ब्रेन ट्यूमर आमतौर पर कई जटिल जैविक प्रक्रियाओं के मेल का नतीजा होता है, जिन पर अभी भी शोध चल रहा है. ज्यादातर मामलों में, बच्चों की बीमारी के लिए उनके माता-पिता किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होते हैं.
मिथ 3: ब्रेन ट्यूमर सिर्फ बड़ों को ही होता है
फैक्ट : यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि ब्रेन ट्यूमर सिर्फ बड़ों को ही हो सकता है, जबकि असल में यह बच्चों को भी हो सकता है, यहां तक कि नवजात शिशुओं और बहुत छोटे बच्चों को भी. बच्चों में पाए जाने वाले सॉलिड ट्यूमर के सबसे आम प्रकारों में से एक ब्रेन ट्यूमर ही है. क्योंकि कई माता-पिता कभी यह उम्मीद नहीं करते कि उनके बच्चे को ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है, इसलिए वे कभी-कभी शुरुआत में ही लक्षणों को नजरअंदाज कर देते है| ब्रेन ट्यूमर के कुछ शुरुआती लक्षण हो सकते हैं, बार-बार सिरदर्द होना, जी मिचलाना और उल्टी होना, चलने में लड़खड़ाहट, संतुलन बनाने में दिक्कत, आंखों की रोशनी में बदलाव और व्यवहार या व्यक्तित्व में असामान्य बदलाव. माता-पिता को इन संकेतों पर पूरा ध्यान देना चाहिए और जल्द से जल्द किसी डॉक्टर से अपने बच्चे की जांच करवानी चाहिए ताकि बीमारी का पता जल्दी चल सके, क्योंकि इससे इलाज ज्यादा आसान और असरदार हो सकता है.
मिथ 4: ब्रेन सर्जरी के बाद, बच्चा सामान्य जिंदगी नहीं जी सकता
फैक्ट – किसी बच्चे की ब्रेन सर्जरी करवाने का विचार कई परिवारों को डरा देता है. माता-पिता को डर रहता है कि सर्जरी के बाद शायद उनका बच्चा कभी सामान्य जिंदगी न जी पाए. अच्छी खबर यह है कि पिछले कुछ सालों में मेडिकल साइंस में हुई तरक्की की वजह से, अब कई न्यूरोसर्जन अच्छी ब्रेन सर्जरी कर पाते हैं. कई बच्चे जिनकी सर्जरी सफल हो जाती है, वे जिंदगी का मजा ले पाते हैं, स्कूल जा पाते हैं, खेलों में हिस्सा ले पाते हैं और अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में शामिल हो पाते हैं. हालांकि ठीक होने में समय लगेगा, और कुछ बच्चों को रिहैबिलिटेशन और थेरेपी या डॉक्टर के पास दोबारा जाने की जरूरत पड़ सकती है. फिर भी, सफल सर्जरी के बाद भी कई बच्चे बड़े होते रहेंगे, सीखते रहेंगे और सामान्य जिंदगी जीते रहेंगे.
मिथ 5: हर साधारण सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर नहीं होता
फैक्ट – असल में, बच्चों में ज्यादातर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर की वजह से नहीं होते. ये कई वजहों से हो सकते हैं, जैसे स्ट्रेस , नींद की कमी, पानी की कमी या आंखों पर जोर पड़ना वगैरह. कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए; अगर किसी बच्चे को सुबह के समय बार-बार सिरदर्द होता है, बार-बार उल्टी होती है, चलने में दिक्कत होती है, संतुलन बनाने में परेशानी होती है, आंखों से जुड़ी समस्याएं होती हैं, दौरे पड़ते हैं, व्यवहार में बदलाव आता है, या बच्चा यह बता नहीं पाता कि उसे कैसा महसूस हो रहा है, तो परिवारों को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. हो सकता है कि इस तरह के लक्षण यह न बताते हों कि बच्चे को ब्रेन ट्यूमर है, लेकिन फिर भी डॉक्टर से उनकी जांच करवाना जरूरी है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

