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मन्ना डे-आशा भोसले की कालजयी कव्वाली, ‘धुरंधर’ में हुआ रीक्रिएट, 76 साल बाद मचा रहा धूम

मन्ना डे-आशा भोसले की कालजयी कव्वाली, ‘धुरंधर’ में हुआ रीक्रिएट, 76 साल बाद मचा रहा धूम


 

नई दिल्ली: फिल्म ‘धुरंधर 2’ में जिस कालजयी गाने के रीमिक्स ने धूम मचाई है, वह इंडियन सिनेमा की सबसे मशहूर कव्वालियों में से एक है. यह गाना पहली बार 1960 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बरसात की रात’ में सुना गया था. गाने के बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे और संगीत दिया था दिग्गज संगीतकार रोशन ने. इस कव्वाली की सबसे बड़ी खूबी इसके गायक हैं. इसे मोहम्मद रफी, मन्ना डे, आशा भोसले और सुधा मल्होत्रा जैसे दिग्गजों ने अपनी आवाज दी थी. यह गाना करीब 12 मिनट लंबा है और इसे भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास की सबसे बेहतरीन कव्वालियों में गिना जाता है. गाने के बोल है- ना तो कारवां की तलाश है, ना तो हमसफर की तलाश है. मेरे शौक-ए-नजारा को बस एक बेखबर की तलाश है.’ ‘धुरंधर 2’ में इस गाने के हुक लाइन को मॉडर्न बीट के साथ सस्पेंस भरे बैकग्राउंड स्कोर के साथ रीमिक्स किया गया है जो रूमानी और रूहानी अहसास देने के साथ लोगों में जोश भरता है.

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