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‘मुगल-ए-आजम’ के सेट पर नहीं था 1 भी टॉयलेट, पानी पीना छोड़ देते थे कलाकार, वहीदा रहमान-महमूद ने शुरू की अनोखी पहल

‘मुगल-ए-आजम’ के सेट पर नहीं था 1 भी टॉयलेट, पानी पीना छोड़ देते थे कलाकार, वहीदा रहमान-महमूद ने शुरू की अनोखी पहल


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‘मुगल-ए-आजम’ वो सिनेमाई इतिहास है, जिसे दोहराना मुश्किल है. महान फिल्म से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं. एक किस्सा अब दिग्गज एक्ट्रेस वहीदा रहमान ने ‘द कपिल शर्मा शो’ में सुनाया. उन्होंने बताया कि मोहन स्टूडियो में शौचालय न होने के कारण उन्हें और महमूद को अपनी जेब से पैसे देकर इंतजाम कराना पड़ा था, लेकिन 10 दिन बाद स्टूडियो ने सुविधा के नाम पर जो किया, उसने दोनों सितारों को हैरान कर दिया था. वहीदा रहमान ने खुलासा किया कि उन दिनों वॉशरूम न होने के डर से कलाकार दिन भर पानी पीना तक छोड़ देते थे.

नई दिल्ली: ‘मुगल-ए-आजम’ को पूरा होने में पूरे 16 साल का लंबा समय लगा. इसे बेहद भव्य तरीके से बनाया गया था और गाने की शूटिंग के लिए असली शीश महल तैयार किया गया था. हर सीन में बारीकियों का इतना ध्यान रखा गया कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी और यादगार फिल्म बन गई. इस महान फिल्म से जुड़ी कई यादें हैं, जिससे जुड़ा एक किस्सा वहीदा रहमान ने सुनाया. (फोटो साभार: IMDb)

दिग्गज एक्ट्रेस वहीदा रहमान ने बताया कि उस जमाने में इतनी बड़ी फिल्म की शूटिंग के दौरान भी सुविधाओं की कितनी कमी हुआ करती थी. उन्होंने ‘द कपिल शर्मा शो’ में बताया कि उस स्टूडियो में काम करने वालों के लिए एक भी शौचालय नहीं था. इतनी बड़ी स्टार कास्ट और क्रू होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं था. इस वजह से सेट पर मौजूद महिलाओं और कलाकारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. (फोटो साभार: IMDb)

परेशानी इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि वहीदा रहमान और मशहूर अभिनेता महमूद ने खुद पहल करने की सोची. उन्होंने तय किया कि वे अपनी जेब से पैसे देकर स्टूडियो में बाथरूम बनवाएंगे. दोनों ने मिलकर स्टूडियो के मालिकों से बात की और उन्हें इस काम के लिए कुछ पैसे भी दे दिए. दोनों सितारे बातचीत करने के बाद वहां से चले गए और करीब 10 दिनों तक वहां नहीं आए. जब वे अगले शूटिंग शेड्यूल के लिए वापस लौटे, तो सबसे पहले उन्होंने मैनेजर से बाथरूम के बारे में पूछा. मैनेजर ने बड़े गर्व से जवाब दिया कि उन्होंने सारा सिस्टम कर दिया है और बाथरूम तैयार है. (फोटो साभार: IMDb)

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जब वहीदा-महमूद बाथरूम देखने पहुंचे, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं. स्टूडियोवालों ने कोई पक्का बाथरूम नहीं बनवाया था. इसके बजाय, उन्होंने गलियारे के बीचों-बीच एक ‘थंडर बॉक्स’ रख दिया था जो पुराने जमाने का लकड़ी का संदूक जैसा शौचालय होता है. यह देखकर वहीदा और महमूद दंग रह गए. वहीदा रहमान ने बताया कि उस दौर में शूटिंग करना आज की तुलना में बहुत मुश्किल काम था. सेट पर वॉशरूम न होने की वजह से कलाकार बहुत परेशान रहते थे. हालत यहां तक पहुंच जाती थी कि वे दिन भर पानी पीना तक छोड़ देते थे, ताकि उन्हें बाथरूम जाने की जरूरत ही न पड़े.(फोटो साभार: IMDb)

फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं. यह फिल्म शहजादे सलीम और अनारकली की अधूरी प्रेम कहानी पर आधारित थी. आज इसे सिनेमा के इतिहास की सबसे महान फिल्म माना जाता है, जिसके पीछे कई दिलचस्प कहानियां छुपी हैं. (फोटो साभार: IMDb)

फिल्म का मशहूर गाना ‘प्यार किया तो डरना क्या’ अपने आप में एक इतिहास है. उस दौर में जहां फिल्में लाखों में बनती थीं, अकेले इस गाने पर 1 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. गीतकार शकील बदायूंनी ने इसके बोल 105 बार लिखे, तब जाकर संगीतकार नौशाद ने इसे पास किया. गाने में गूंज पैदा करने के लिए लता मंगेशकर ने इसे स्टूडियो के बाथरूम में खड़े होकर गाया था. (फोटो साभार: IMDb)

फिल्म के युद्ध सीन्स को असली दिखाने के लिए भारी तामझाम का इस्तेमाल हुआ. इसमें 2000 ऊंट, 4000 घोड़े और 8000 सैनिकों ने हिस्सा लिया था. खास बात यह है कि ये सैनिक भारतीय सेना की जयपुर रेजिमेंट से थे, जिन्हें रक्षा मंत्रालय की विशेष अनुमति लेकर बुलाया गया था. आज के दौर में ऐसी असल भव्यता और सेना की मदद मिलना नामुमकिन सा लगता है. (फोटो साभार: IMDb)

वहीदा रहमान की बात करें, तो उन्होंने खुद अपने करियर में ‘प्यासा’ और ‘चौदहवीं का चांद’ जैसी कई यादगार फिल्में दी हैं. उनकी सादगी और अभिनय का हर कोई कायल है. उनके सुनाए इस किस्से से पता चलता है कि आज के सितारों को मिलने वाली सुख-सुविधाएं पहले के दौर में एक सपना हुआ करती थीं. (फोटो साभार: IMDb)

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