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बॉलीवुड में किसी सुपरहिट फिल्म का सीक्वल बनाना सफलता की गारंटी माना जाता है और साजिद नाडियाडवाला ने ‘बागी’ फ्रेंचाइजी के साथ इस फॉर्मूले को सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया. 2016 में शुरू हुआ यह सफर ‘बागी 2’ और ‘बागी 3’ के साथ बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाता रहा. टाइगर श्रॉफ बॉलीवुड के अल्टीमेट एक्शन हीरो के रूप में उभरे. लेकिन, जैसा कि कहते हैं किसी भी चीज की अति बुरी होती है. जब मेकर्स ने इसी नाम से चौथी फिल्म ‘बागी 4’ की घोषणा की, तो चीजें वैसी नहीं हुईं जैसी प्लान की गई थीं. कहानी की कमी और घिसे-पिटे एक्शन ने एक अच्छी फ्रेंचाइजी की साख को खतरे में डाल दिया.
नई दिल्ली. जब 2016 में ‘बागी’ पहली बार रिलीज हुई थी तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह इतनी लंबे समय तक चलने वाली फ्रेंचाइजी बन जाएगी. सब्बीर खान के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म ने टाइगर श्रॉफ को एक मार्शल आर्टिस्ट के रूप में स्थापित किया. श्रद्धा कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री और फिल्म के गानों ने युवाओं को लुभाया. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई की और तभी मेकर्स को एहसास हुआ कि ऑडियंस को देसी एक्शन पसंद आ रहा है.
फ्रैंचाइजी की दूसरी किस्त ‘बागी 2’ (2018) ने भी सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. अहमद खान के डायरेक्शन में बनी टाइगर के नए लुक और दिशा पटानी के साथ उनकी जोड़ी ने स्टेज पर आग लगा दी. फिल्म ने अकेले इंडिया में 165 करोड़ से ज्यादा की कमाई की. फिल्म की सफलता ने ‘बागी’ को बॉलीवुड का सबसे भरोसेमंद एक्शन ब्रांड बना दिया. लोग ‘बागी’ नाम सुनते ही थिएटर्स में खिंचे चले आते थे.
2020 में रिलीज हुई ‘बागी 3’, पिछली दो किस्तों के मुकाबले बहुत बड़े लेवल पर थी. इस बार, टाइगर एक देश के खिलाफ लड़ रहे थे. हालांकि क्रिटिक्स ने फिल्म के लॉजिक पर सवाल उठाए, लेकिन ऑडियंस ने इसे बहुत पसंद किया. अगर COVID-19 महामारी और लॉकडाउन नहीं होता, तो फिल्म आसानी से 200 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाती. इस प्वाइंट तक सब ठीक था… मेकर्स के पास पैसा था और टाइगर के पास स्टारडम था.
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दिक्कतें तब शुरू हुईं जब मेकर्स ने ‘बागी 4’ अनाउंस की. ऑडियंस कुछ नया, कुछ इंटरनेशनल लेवल का होने की उम्मीद कर रही थी. लेकिन, जैसे ही फिल्म के शुरुआती विजुअल्स और खबरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर एक नेगेटिव ट्रेंड शुरू हो गया. ऑडियंस को लगा कि कहानी को फिर से, उसी पुरानी, घिसी-पिटी ‘वन-मैन आर्मी’ स्क्रिप्ट से दोहराया जा रहा है. 2025 में रिलीज होने के बाद, यह डर सच हो गया और फिल्म को थिएटर्स में ऑडियंस की कमी खलने लगी.
फ्रेंचाइजी की चौथी फिल्म तक, मेकर्स ने कहानी से ज्यादा स्टंट पर फोकस करना शुरू कर दिया. ‘बागी 4’ देखने के बाद, ऑडियंस की सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि उन्होंने कोई फिल्म नहीं, बल्कि टाइगर श्रॉफ का ढाई घंटे का जिम वर्कआउट देखा था. इमोशनलेस और बिना मकसद वाला एक्शन ऑडियंस का दिल नहीं छू पाया. ‘बागी 4’ में वही उड़ते हुए विलेन और वही चीखते हुए टाइगर थे. आज के जमाने में जब साउथ इंडियन सिनेमा (केजीएफ, पुष्पा और सालार) ने एक्शन का लेवल बढ़ा दिया है, ‘बागी’ का पुराना फॉर्मूला बोरिंग और बचकाना लगने लगा था.
टाइगर एक ही तरह के कैरेक्टर में सिमट कर रह गए हैं. ‘बागी 4’ तक, ऑडियंस में पहली फिल्म के दौरान जो एक्साइटमेंट थी, वह पूरी तरह से गायब हो गई थी. ऑडियंस अब टाइगर से परफॉर्म करने की उम्मीद कर रही थी, लेकिन उन्हें सिर्फ शर्टलेस बॉडी लैंग्वेज और जंपिंग शॉट्स ही मिले. फिल्म के डायलॉग और फिजिक्स को मात देने वाले एक्शन सीक्वेंस पर इतने मीम्स बने कि फिल्म की सीरियसनेस खत्म हो गई.
साजिद नाडियाडवाला बॉलीवुड के सबसे अनुभवी प्रोड्यूसर्स में से एक हैं, लेकिन ‘बागी 4’ के साथ उन्होंने अपनी ही फ्रेंचाइजी की ब्रांड वैल्यू को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया. चौथी फिल्म ने पहली तीन फिल्मों की क्रेडिबिलिटी और कमाई को खत्म कर दिया था.

