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एक्ट्रेस रुपाली गांगुली ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने को एक ऐतिहासिक कदम बताया है. उन्होंने इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इससे राजनीति और नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी. रुपाली के अनुसार, महिलाएं शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों को एक मां और बेटी के नजरिए से बेहतर ढंग से समझ सकती हैं, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा. उन्होंने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाओं और उत्तर प्रदेश में बेहतर हुई महिला सुरक्षा का भी जिक्र किया. एक्ट्रेस के अनुसार, यह निर्णय जमीनी स्तर पर महिलाओं को मजबूत बनाएगा.
रुपाली गांगुली टीवी इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस हैं.
नई दिल्ली: मशहूर एक्ट्रेस एक्ट्रेस रुपाली गांगुली ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने पर अपनी खुशी जाहिर की है और इसे देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है. उन्होंने बड़े ही सरल शब्दों में कहा कि इस बिल को हकीकत बनने में लगभग 27-28 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन अब जाकर यह सपना पूरा हो रहा है. रुपाली का मानना है कि 2023 में पास हुए इस बिल के लागू होने से अगले चुनावों के बाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ेगी, जिससे महिलाओं को अब यह अहसास होगा कि उनके पीछे उनकी सरकार मजबूती से खड़ी है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की तारीफ करते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ और ‘सुकन्या समृद्धि’ जैसी योजनाओं ने समाज की मानसिकता को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है, जिससे अब बेटियों को बोझ नहीं बल्कि गौरव माना जाने लगा है.
रुपाली ने बातचीत के दौरान शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के महत्व पर जोर देते हुए सावित्रीबाई फुले की उस बात को दोहराया कि अगर एक महिला पढ़ती है, तो पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है. उन्होंने अपने मशहूर शो ‘अनुपमा’ का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे टीवी और फिल्में समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं. उनके अनुसार, पहले कई घरों में लड़कियों के साथ भेदभाव होता था, लेकिन अब धीरे-धीरे लोगों की सोच बदल रही है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी सराहना की और कहा कि आज महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं और रात में भी बाहर निकल सकती हैं. रुपाली का कहना है कि जब महिलाएं ग्रासरूट लेवल से लेकर संसद तक अपनी आवाज उठाएंगी, तो इसका असर पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों पर बहुत गहरा और सकारात्मक पड़ेगा.
जमीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण
जब रुपाली से यह पूछा गया कि इस आरक्षण का नीतियों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने बड़े ही तार्किक ढंग से समझाया कि महिलाएं स्वभाव से बहुत संवेदनशील होती हैं और चीजों को एक मां, बेटी या बहन के नजरिए से देखती हैं. जब 33 प्रतिशत महिलाएं पॉलिसी मेकिंग का हिस्सा बनेंगी, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर ज्यादा प्रभावी और भावनात्मक दृष्टिकोण वाली नीतियां बनेंगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पुरुषों की भावनाओं को कम नहीं आंक रहीं, लेकिन महिलाओं की भागीदारी से नीति-निर्माण में एक नया संतुलन आएगा. रुपाली ने अंत में बड़े गर्व से कहा कि उनके सेट पर काम करने वाली साधारण महिलाएं भी इस फैसले से बेहद उत्साहित हैं, जो यह साबित करता है कि सशक्तिकरण अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर उतर चुका है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

