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मोहम्मद रफी का वो ‘बेटा’, फिल्मों में गाए सुपरहिट गाने, एक गलती से बर्बाद हुआ करियर

मोहम्मद रफी का वो ‘बेटा’, फिल्मों में गाए सुपरहिट गाने, एक गलती से बर्बाद हुआ करियर


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singer Anwar Hussain Songs : बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी का 1980 में हार्ट अटैक से निधन हो गया था. किशोर कुमार को 80 के दशक में वही टक्कर दे रहे थे. उनके निधन से पहले ही इंडस्ट्री में एक सिंगर ऐसे भी आया जिनकी आवाज बिल्कुल रफी साहब जैसी थी. स्टेज शो करने वाले एक सिंगर को रफी साहब का ‘बेटा’ कहा जाने लगा था. उसके गाने का स्टाइल बिल्कुल मोहम्मद रफी जैसा था. एक-दो मौके तो ऐसे भी आए जब रफी साहब इस सिंगर की आवाज सुनकर हैरान रह गए. रफी साहब के दुनिया से जाने के बाद इस बॉलीवुड सिंगर को अपनी फिल्म में साइन करने के लिए प्रोड्यूसर-डायरेक्टर घूमते थे. फिर एक गलती से इसका करियर तबाह हो गया. यह सिंगर कौन था, आइये जानते हैं.

साल था 1979. राजेश खन्ना की एक फिल्म ‘जनता हवलदार’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. इस फिल्म का एक गाना ‘हमसे का भूल हुई जो ये सजा हमका मिली’ बहुत पॉप्युलर हुआ. फिल्म तो उतनी नहीं चली लेकिन गाने ने धूम मचा दी. इस गाने को अनवर ने गाया था. गाना सुनकर कई लोगों ने म्यूजिक कंपनी को फोन किया और कहा कि शायद उनसे कोई गलती हुई है. इस गाने को मोहम्मद रफी ने गाया है. जल्द ही संगीत प्रेमियों को इस नए सिंगर अनवर के बारे में पता चला जिसकी आवाज रफी साहब से मेल खाती थी.

अनवर का जन्म मुंबई में फरवरी 1949 में हुआ था. पिता आशिक हुसैन सितार और हारमोनियम बजाया करते थे. वो संगीतकार गुलाम हैदर के असिस्टेंट थे. अनवर के पिता आशिक हुसैन ने दो शादियां कीं. पहली शादी रंजना से हुई. अनवर की बहन आशा सचदेव एक्ट्रेस रही हैं. अरशद वारसी उनके सौतेले भाई हैं. अनवर ने उस्ताद अब्दुल रहमान खान से क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग ली थी. उस्ताद अब्दुल रहमान ने ही महेंद्र कपूर जैसे दिग्गज सिंगर को संगीत सिखाया था. अनवर ने अपने करियर की शुरुआत स्टेज शोज से की. वो मोहम्मद रफी के गाने कंसर्ट में गाया करते थे. सबसे पहले म्यूजिक डायरेक्टर कमाल राजस्थानी ने उन्हें ‘मेरे गरीब नवाज’ में ब्रेक दिया. यह फिल्म 1973 में आई थी.

गाने के बोल थे : कसमें हम अपनी जान की खाए चले गए. इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान रफी साहब ने जब अनवर को अपनी जैसी आवाज में गाते देखा तो वो बहुत खुश हुए. उन्होंने कहा था कि यह सिंगर उनकी जगह ले सकता है. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई लेकिन गाने पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं गया. साल 1977 में कॉमेडियन महमूद ने राजेश खन्ना को लेकर एक फिल्म ‘जनता हवलदार’ बनाई. संगीतकार राजेश रोशन ने फिल्म का म्यूजिक कंपोज किया था. महमूद ने ‘हमसे का भूल हुई’ गाना अनवर से गवाया. गाना सुपरहिट रहा और अनवर भी रातोंरात स्टार बन गए.

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अनवर के करियर ने 1980 में रफी साहब के निधन के बाद तेजी से उड़ान भरी. अनवर ने लता मंगेशकर, आशा भोसले समेत कई सिंगर के साथ ड्यूएट गाए. खैय्याम से लेकर लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, कल्याण जी आनंद जी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया. मनमोहन देसाई का नाम 80 के दशक के बड़े डायरेक्टरों में शुमार रहा है. वो रफी साहब को बहुत मानते थे और अपनी फिल्मों में उनसे गाने गवाया करते थे. रफी साहब के निधन से पहले ही मनमोहन देसाई ने अनवर को मौका दिया.

सुहाग (1979) और नसीब (1981) फिल्म में अनवर ने एक-एक गाना गाया था. दोनों ही फिल्में मनमोहन देसाई की थीं. दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर खूब धमाल मचाया. सुहाग फिल्म में ‘एक डाल पे दो फूल खिले’ गाना अनवर ने गाया था. ‘नसीब’ फिल्म का एक फेमस गाना ‘जिंदगी इम्तिहान लेती है’ अनवर ने कमलेश अवस्थी और सुमन कल्याणपुर के साथ गाया था. इन दोनों गानों ने अनवर का स्टारडम पीक पर पहुंचा दिया.

मनमोहन देसाई जब अमिताभ बच्चन-अमृता सिंह के साथ ‘मर्द’ फिल्म बना रहे थे तो उन्होंने अनवर से संपर्क किया. अनवर ने इस दौरान इतनी ज्यादा फीस मांग ली कि देसाई हैरान रह गए. वो रातोंरात शब्बीर कुमार को लेकर आ गए. शब्बीर कुमार की आवाज भी मोहम्मद रफी जैसी थी. वो भी ‘एक शाम रफी के नाम’ शो करने के लिए गुजरात से मुंबई आया करते थे. उसी दौरान बॉलीवुड में एक और सिंगर मोहम्मद अजीज बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे. मर्द फिल्म में मनमोहन देसाई ने उन्हें भी मौका दिया.

‘मर्द’ फिल्म 8 नवंबर 1985 को रिलीज हुई थी. अमिताभ बच्चन-अमृता सिंह लीड रोल में थे. फिल्म का म्यूजिक अनु मलिक ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 6 गाने थे. फिल्म के पॉप्युलर गानों में ‘हम तो तंबू में बंबू लगाए बैठे’, ‘मर्द तांगेवाला’, ‘मां शेरावाली’ शामिल थे. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई. इसी तरह ‘प्रेम रोग’ के 5 गाने अनवर को गाने थे लेकिन उन्होंने बहुत ज्यादा फीस मांग ली थी. इससे राज कपूर नाराज हो गए. और फिर रही सही कसर 1988-89 में उदित नारायण और कुमार सानू जैसे सिंगर ने पूरी कर दी. इन दोनों सिंगर का दौर भी शुरू हो गया, ऐसे में अनवर का करियर बर्बाद हो गया.

अनवर ने अपने करियर में कई सुपरहिट गाने गाए. इन गानों में ‘सोहनी मेरी सोहनी, और नहीं कोई होनी सोनी’, ‘ये प्यार था या कुछ और था, ना तुझे पता, ना मुझे पता’, ‘मोहब्बत अब तिजारत बन गई है’, ‘रब ने बनाया तुझे मेरे लिए’, ‘जिंदगी इम्तिहान लेती है’, और ‘कोई परदेसी आया परदेस में’ जैसे कई सदाबहार गाने गाए हैं. 2007 में अनवर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि कुमार सानू की वजह से उनका करियर बर्बाद हो गया. उन्होंने यह भी बताया था कि उनके सौतेले भाई अरशद वापसी से उनकी बातचीत नहीं होती है. बार-होटल में गाकर वो अपना गुजारा कर रहे हैं. इस इंटरव्यू के सामने आने के बाद अनवर की कई निर्माताओं ने मदद की. कई टीवी शोज के निर्माताओं ने उन्हें काम दिया.

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