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बेगूसराय के आईटीआई गोविंद कुमार ने नौकरी नहीं मिलने पर मुर्गा पालन की शुरुआत की . इन्होंने बताया 3 से 5 हज़ार के एक लोट को 5 महीने तक में तैयार करने के बाद 4 लाख तक का मुर्गा तैयार कर बेच लेते हैं.

बिहार में काफी दिनों तक एमबीए चायवाला की चर्चा होती रही. इस नाम से कई जिलों में चाय के स्टाल भी खोले जाते रहे. लेकिन अब ट्रेडिंग में थोड़ा सा बदलाव दिख रहा है. आईटीआई करने के बाद युवा मुर्गा पालन की ओर कदम रख रहे हैं.

बिहार के बेगूसराय जिले के गढ़हारा रेल यार्ड इलाके के रहने वाले गोविंद कुमार बेगूसराय के एक निजी आईटीआई कॉलेज से आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश में सिल्लीगुड़ी जाते हैं. लेकिन जब यहां रोजगार नहीं मिलता तो गांव जाकर मुर्गा पालन की शुरुआत छोटे स्तर से कर देते हैं. इससे वह सालाना लाखों की कमाई कर रहे हैं. आप भी मिलिए आईटीआई मुर्गा वाला से…

बेगूसराय के आईटीआई मुर्गा वाला के नाम से मशहूर गोविंद कुमार ने लोकल 18 से बताया में पहले क्रिकेट प्रेमी था और इसके लिए तैयारी करने कोलकाता भी गया था. यहां रहकर तैयारी की फिर जिला स्तर तक क्रिकेट खेलने के बाद खेल की दुनिया से नाता तोड़ दिया. इसके बाद आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए बेगूसराय जिले के ही एक निजी आईटीआई कॉलेज से आईटीआई की पढ़ाई पुरी की . फिर नौकरी की तलाश में सिलीगुड़ी गया .
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यहां पर नौकरी नहीं मिली, लेकिन मुर्गा पालन का आईडिया जरूर मिल गया. इसके बाद गांव आकर 20 कड़कनाथ और 20 सोनाली मुर्गा की प्रजाति 2 हजार रुपए में लाकर साल 2020 में ही अपने घरों के छत पर से शुरूआत की. गोविंद कुमार ने बताया वर्तमान समय में दिन भर अपने मुर्गा फार्म में अपनी मां के साथ समय देते हैं.

इस दौरान मकई के मुर्गा दाना और हरा चारा का विशेष प्रयोग करते हैं. इनके मुताबिक हरा चारा देने से मुर्गा की इम्युनिटी मजबूत होती है . जिससे कीमत भी ज्यादा मिलती है. इन्होंने आगे बताया 5 महीने का एक लोट होता है. इस लोट में 3 हजार से 5 हजार सोनाली और कड़कनाथ मुर्गा का पालन कर बाजार के लिए तैयार करते हैं. इस दौरान लागत खर्च डेढ़ लाख तक आती है. लेकिन बाजार मूल्य 4 लाख तक मिल जाता है. ऐसे में जब कभी सहायता राशि की जरूरत पड़ती है तो मां जीविका से लेकर बेटे की समय समय पर मदद भी करते हैं.