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रैम्प वॉक में अब उम्रदराज महिलाओं का जलवा:50 साल से ज्यादा की मॉडलों की पूछ बढ़ी, सीनियर मॉडलों को इतनी तवज्जो पहले नहीं मिली

रैम्प वॉक में अब उम्रदराज महिलाओं का जलवा:50 साल से ज्यादा की मॉडलों की पूछ बढ़ी, सीनियर मॉडलों को इतनी तवज्जो पहले नहीं मिली




इस महीने, ग्लोबल फैशन मैगजीन वोग ने कुछ ऐसा किया जो उसने पहले कभी नहीं किया था। उसने अपने कवर पर दो 76 वर्षीय महिलाओं को जगह दी। फैशन मैगजीन के कवर पर उम्र की बाधा को तोड़कर वोग ने खुद को पुराना नहीं बल्कि समकालीन साबित कर दिया। या कम से कम फैशन जगत में तो ऐसा ही लगने लगा है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक फैशन जगत में सीनियर मॉडलों को इतनी तवज्जो पहले कभी नहीं मिली। फैशन की दुनिया की भाषा में, सीनियर होने का अर्थ 30 वर्ष से ज्यादा की उम्र से लगाया जाता है। फैशन सर्च इंजन टैगवॉक के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के टॉप 20 ब्रांडों ने रनवे शो में प्लस-साइज़ मॉडल के अलावा अधिक उम्र की मॉडलों को शामिल किया। पिछले महीने हुए एक फैशन शो की शुरुआत 50 वर्षीय स्टेफनी कैवली ने की, जो रैंप पर 40 से अधिक उम्र की 15 मॉडलों में से एक थीं। बोटेगा वेनेटा में नौ सीनियर मॉडल थीं। टॉम फोर्ड में नौ (महिला और पुरुष), गिवेंची में आठ, बालेन्सियागा में पांच और लुई वितां में चार सीनियर मॉडल शामिल हुईं। फैशन की दुनिया से परे भी नया ट्रेंड, अब उम्र छिपाने के बजाय दिखाने का चलन फैशन की दुनिया से परे भी, एक नया चलन पनप रहा है। इसमें फैशन जगत या उससे जुड़े लोग अपनी उम्र छिपाने के बजाय उसे उजागर करना पसंद करते हैं। पूर्व सुपरमॉडल और वर्तमान में एस्टी लॉडर की एंबेसडर, 61 वर्षीय पॉलिना पोरिजकोवा, इंस्टाग्राम पर इसका नेतृत्व कर रही हैं। वह अपने 14 लाख फॉलोअर्स के साथ बिना मेकअप वाली तस्वीरों के माध्यम से अपनी झुर्रियों और बढ़े वजन को दिखाती हैं। यह उस इंडस्ट्री में एक चौंकाने वाला बदलाव है जो लंबे समय से यौवन को महिमामंडित करने के लिए प्रसिद्ध रही है। बढ़ती सिल्वर इकोनॉमी का फायदा उठाने की कोशिश फैशन इंडस्ट्री का ये बदलाव अमीर बुजुर्गों (जिसे सिल्वर इकोनॉमी कहते हैं) को लुभाने की कोशिश है। अमेरिका की कुल संपत्ति का 70% 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के पास है। मैकिन्से कंसल्टिंग फर्म में फैशन रिटेल प्रैक्टिस की ग्लोबल को-लीडर जेम्मा डी’ऑरिया कहती हैं, ‘जब लग्जरी उत्पादों की वृद्धि धीमी हो गई है, एक प्रमुख उपभोक्ता समूह को नजरअंदाज करना बिल्कुल भी अच्छी रणनीति नहीं है।’



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