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दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की करोड़ों की संपत्ति को लेकर छिड़ी पारिवारिक जंग अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है कि सुप्रीम कोर्ट तक हैरान नजर आया. मां, बहू, फैमिली ट्रस्ट और बोर्ड मीटिंग के बीच बढ़ते विवाद को देखकर अदालत ने ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया. सुनवाई के दौरान जज ने कहा,’ये केस अब ऐसे मोड़ पर है जहां महाभारत भी छोटी लगेगी. हम इसे देखेंगे.’ कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया है.
इस केस में अब 14 मई को अगली सुनवाई होनी है.
नई दिल्ली. करिश्मा कपूर के एक्स हस्बैंड और दिवंगत बिजनेमैन संजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति और आरके फैमिली ट्रस्ट को लेकर चल रहे परिवारिक विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. संजय कपूर की 80 साल की मां रानी कपूर ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर कर प्रिया सचदेव कपूर और अन्य लोगों को ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ के कामकाज में दखल देने से रोकने की मांग की है. साथ ही 18 मई को होने वाली बोर्ड मीटिंग पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है.
इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की एक टिप्पणी ने पूरे विवाद को सुर्खियों में ला दिया. दरअसल, जस्टिस जेबी परदीवाला की बेंच ने याचिका पर संज्ञान लिया और मामले की सुनवाई 14 मई को तय की. सुनवाई के दौरान बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘ये केस अब ऐसे मोड़ पर है जहां महाभारत भी छोटी लगेगी. हम इसे देखेंगे.’
नई याचिका में क्या रानी कपूर ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में दायर रानी कपूर की नई याचिका में कहा गया है कि रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 8 मई को जारी नोटिस और एजेंडा के तहत 18 मई को बोर्ड मीटिंग बुलाई गई है, जिसमें अतिरिक्त डायरेक्टर्स की नियुक्ति की कोशिश की जा रहा है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह मीटिंग चल रहे विवाद के बीच ट्रस्ट और परिवार की संपत्ति को प्रभावित कर सकती है.
मई 7 को दिया था मध्यस्थता का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई 2026 को इस पूरे उत्तराधिकार विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया था. पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया गया है. कोर्ट ने तब कहा था, ‘यह परिवारिक विवाद है, इसे परिवार तक ही सीमित रखा जाए. इसे मनोरंजन का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए.’ कोर्ट ने सभी पक्षों से जल्द से जल्द विवाद सुलझाने की अपील भी की थी.
रानी कपूर ने 2017 में ब्रेन स्ट्रोक के बाद संजय कपूर और उनकी पत्नी प्रिया सचदेव पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनकी मेडिकल स्थिति का फायदा उठाकर फैमिली ट्रस्ट के दस्तावेजों में हेरफेर किया. उन्होंने ट्रस्ट को ‘नल एंड वॉयड’ (कोई चीज कानूनी रूप से मान्य नहीं है या उसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है) घोषित करने की मांग की है.
14 मई को होगी अहम सुनवाई
14 मई को होने वाली सुनवाई में बोर्ड मीटिंग पर स्टे और ट्रस्ट में दखलंदाजी को लेकर अंतिम फैसला हो सकता है. इस मामले की पूरे देश में चर्चा है क्योंकि इसमें सोना ग्रुप जैसी बड़ी ऑटो कंपोनेंट कंपनी की संपत्ति शामिल है.
क्या है मामला
संजय कपूर के निधन के बाद उनकी मां रानी कपूर और पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच संपत्ति और ट्रस्ट नियंत्रण को लेकर तनाव बढ़ गया. प्रिया सचदेव पहले ही रानी कपूर को ट्रस्ट से हटाने का नोटिस जारी कर चुकी हैं. यह विवाद दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. कोर्ट ने परिवार से अपील की है कि 80 साल की उम्र में रानी कपूर को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाया जाए और मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए.
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शिखा पाण्डेय पिछले 15 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में एक्टिव हैं. शिखा दिसंबर 2019 से न्यूज 18 हिंदी के साथ हैं और बतौर चीफ सब एडिटर के पद काम कर रही हैं. पिछले 6 सालों से वह एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही …और पढ़ें

