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सिंगर बनने का सपना लेकर निकले रघु राम को जब रिजेक्शन मिला, तो उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी राह बदल ली. एमटीवी रोडीज से उन्होंने ऐसा मुकाम हासिल किया कि आज वह टीवी की दुनिया का बड़ा नाम बन चुके हैं.
संघर्ष की धूप में तपकर बनाई पहचान
नई दिल्ली. हर इंसान की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जो उसे नई दिशा देता है. कोई उस मोड़ पर हार मान लेता है, तो कोई वहीं से अपनी नई पहचान बना लेता है. रघु राम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आज लोग उन्हें उनके सख्त अंदाज और रियलिटी शोज के लिए जानते हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि कभी उनका सपना सिंगर बनने का था.
रघु राम का जन्म 15 अप्रैल 1973 को दिल्ली में हुआ था. उनका बचपन एक साधारण परिवार में बीता. उनके साथ उनके जुड़वा भाई राजीव लक्ष्मण भी बड़े हुए. दोनों भाइयों के बीच गहरी बॉन्डिंग थी, जो आगे चलकर उनके करियर में भी नजर आई. पढ़ाई पूरी करने के बाद रघु ने मीडिया और एंटरटेनमेंट की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया.
छोटे-छोटे रोल निभाकर नहीं मिली कोई पहचान
अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने कई छोटे-बड़े काम किए, लेकिन पहचान नहीं मिल पा रही थी. असली मोड़ तब आया जब वह रियलिटी शो एमटीवी रोडीज से जुड़े. इस शो में उनका सख्त, गुस्सैल और बेबाक अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया. उन्होंने शो को एक अलग पहचान दी और युवाओं के बीच यह काफी पॉपुलर हो गया.
सिंगिग में बनाना चाहते थे करियर
लेकिन इस सफलता के पीछे एक बड़ी असफलता छिपी थी. रघु राम कभी सिंगर बनना चाहते थे. उन्होंने इंडियन आइडल के पहले सीजन में ऑडिशन भी दिया था, लेकिन जजों को उनका गाना पसंद नहीं आया और उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया. बाद में रघु ने खुद माना कि उस समय उनका अंदाज थोड़ा मजाकिया था, जिसे जजों ने सीरियस नहीं लिया. यह उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.
बता दें कि इस रिजेक्शन के बाद रघु ने अपनी दिशा बदली और टीवी प्रोडक्शन में पूरी मेहनत से जुट गए. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पहचान बनाई और रोडीज जैसे शो से बड़ी सफलता हासिल की. इसके अलावा उन्होंने एमटीवी स्प्लिट्सविला जैसे शोज में भी काम किया.टीवी के अलावा रघु राम फिल्मों में भी नजर आए. वह तीस मार खान और झूठा ही सही जैसी फिल्मों का हिस्सा रहे. हालांकि फिल्मों में उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हर मौके को आजमाया और खुद को साबित करने की कोशिश जारी रखी.रघु राम का सफर यही बताता है कि हर असफलता के पीछे एक नया मौका छिपा होता है. अगर हिम्मत न हारी जाए, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं.
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न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें

