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सुभाष घई ने कहा कि किसी भी फिल्म की असली ताकत डायरेक्टर की सोच, कल्पना और विजन में होती है, क्योंकि वही एक साधारण कहानी को बड़े पर्दे पर यादगार बनाता है. घई के मुताबिक, सिर्फ बड़े बजट और सुपरस्टार्स के भरोसे अच्छी फिल्में नहीं बनाई जा सकतीं, बल्कि मजबूत कहानी और उसे समझने वाला निर्देशक ही फिल्म को सफल बनाता है.
सुभाष घई ने बॉलीवुड को लेकर अपने मन की बात सोशल मीडिया पर रखी है.
नई दिल्ली. सुभाष घई ने ‘ताल’, ‘परदेस’, ‘हीरो’ और ‘खलनायक’ जैसी फिल्मों से हिंदी सिनेमा को नया अंदाज दिया। उनकी फिल्मों में सिर्फ बड़े सितारे नहीं, बल्कि दमदार कहानी, शानदार संगीत और एक अलग सिनेमाई विजन देखने को मिलता था. अब निर्देशक ने सोशल मीडिया पर बॉलीवुड के मौजूदा दौर को लेकर चिंता जाहिर की है. सुभाष घई का मानना है कि आज इंडस्ट्री फिल्म बनाने की असली कला को भूलती जा रही है और सिर्फ स्टार पावर और पैसों के पीछे भाग रही है. सुभाष घई ने हिंदी सिनेमा में एक-से-बढ़कर फिल्में देकर अपना नाम बेहतरीन निर्देशकों में स्थापित किया. मंगलवार को निर्देशक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इंडस्ट्री के बदलते माहौल पर विचार व्यक्त किए.
इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर कर निर्देशक ने लिखा, ‘बड़े पर्दे पर दिखने वाले सिनेमा की असली ताकत सिर्फ और सिर्फ डायरेक्टर की सोच, उसकी कल्पना और उसके विजन में होती है. यह फिल्म इंडस्ट्री का पुराना और वास्तविक सत्य है, जिसे शायद बदला नहीं जा सकता.’
आज के दौर की फिल्मों पर व्यक्त की चिंता
सुभाष घई ने आज के दौर की फिल्मों पर चिंता व्यक्त करते हुए लिखा, ‘आजकल हम फिल्म बनाने की कला को बहुत जल्दी भूलते जा रहे हैं. हम सिर्फ पैसे और स्टार पावर के पीछे भाग रहे हैं. यही कारण है कि आज फिल्मों को इसके बुरे नतीजे भी भुगतने पड़ रहे हैं.’ निर्देशक ने समझाते हुए कहा कि केवल भारी बजट या बड़े सितारों के दम पर अच्छी फिल्में नहीं बनाई जा सकतीं. किसी फिल्म की सफलता के लिए अच्छी कहानी और उसे पर्दे पर उतारने वाले कुशल निर्देशक की सबसे ज्यादा जरूरत होती है.

