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सुपर स्टार राज कुमार की वो 5 फिल्में, पांचों में थे कालजयी गाने, गाती है पूरी दुनिया, हर मूवी रही मैसिव हिट

सुपर स्टार राज कुमार की वो 5 फिल्में, पांचों में थे कालजयी गाने, गाती है पूरी दुनिया, हर मूवी रही मैसिव हिट


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Raaj Kumar Best movies : बॉलीवुड के लीजेंड एक्टर राज कुमार अपनी दमदार आवाज, शानदार डायलॉग डिलीवरी और अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपने लगभग चार दशक लंबे फिल्मी करियर में 7 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. 63 फिल्मों में वो लीड हीरो रहे. राज कुमार के कई डायलॉग तो अमर ही हो गए. बहुत कम लोग जानते होंगे कि उन पर फिल्माए गए गाने भी खूब पॉप्युलर हुए. इन गानों की गिनती क्लासिक गानों में होती है. आज राज कुमार की उन 5 फिल्मों पर नजर डालते हैं, जिनके गाने मशहूर हुए. फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर हिट रहीं.

राज कुमार ने 1952 में फिल्म ‘रंगीली’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. बलूचिस्तान के लोरलाई में 8 अक्टूबर 1926 को जन्मे राज कुमार का असली नाम कुलभूषण पंडित था. डायरेक्टर बलदेव दुबे के कहने पर मुंबई में पुलिस सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ फिल्म लाइन में आए थे. राज कुमार अपनी एक्टिंग, स्टाइल और बेहतरीन डायलॉग डिलिवरी के लिए मशहूर रहे. अक्खड़ स्वभाव के राज कुमार की निजी लाइफ के किस्से भी मशहूर रहे. राज कुमार के डायलॉग की तरह उनकी कई फिल्में कल्ट क्लासिक मानी जाती हैं. इन फिल्मों के गानों भी कालजयी साबित हुए. राज कुमार की ऐसी ही 5 फिल्में हीर रांझा, नीलकमल, काजल, हमराज, पाकीजा और सौदागर हैं जिनके गाने आज भी खूब पसंद किए जाते हैं. आइये जानते हैं इन गानों के बारे में……….

सबसे पहले बात करते हैं 1965 की आइकॉनिक हिन्दी फिल्म ‘काजल’ की जिसका निर्देशन राम महेश्वरीने किया था. यह एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी जिसमें सामाजिक मूल्यों और रिश्तों की संवेदनशीलता को एकसाथ पिरोया गया था. फिल्म की कहानी गुलशन नंदा के उपन्यास ‘माधवी’ पर बेस्ड थी. स्क्रीनप्ले फणी मजूमदार ने लिखा था. किदार शर्मा ने डायलॉग लिखे थे. धर्मेंद्र-राज कुमार और मीना कुमारी लीड रोल में थे. मीना कुमारी गंभीर अभिनय के लिए जानी जाती रही हैं. उन्होंने शानदार अभिनय से फिल्म को यादगार बना दिया. कहा जाता है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र और राज कुमार के बीच झगड़ा भी हुआ था. धर्मेंद्र तब इंडस्ट्री में नए थे. राज कुमार साहब ने उन्हें देखकर डायरेक्टर से कहा था कि ये पहलवान कहां से पकड़ लाए हो.

‘काजल’ फिल्म की कहानी एक ऐसी युवती की लाइफ पर बेस्ड थी जो परिवार, प्रेम और समाज के बीच संघर्ष करती है. फिल्म की सबसे बड़ी खासियत उसका म्यूजिक था. संगीत रवि ने दिया था. फिल्म के तीन गाने ‘छू लेने दो नाज़ुक होठों को’ ‘तोरा मन दर्पण कहलाए’ और ‘ये ज़ुल्फ अगर खुलके बिखर जाए’ उस जमाने में बेहद पॉप्युलर हुए थे. ‘छू लेने दो नाज़ुक होठों को’ गाना राज कुमार पर फिल्माया गया था. गाना मोहम्मद रफी ने अमर कर दिया. मीना कुमारी को बेस्ट एक्ट्रेस का जबकि पद्मिनी को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही थी.

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इस लिस्ट में दूसरा नाम 1967 में रिलीज हुई ‘हमराज’ फिल्म का है जिसमें सुनील दत्त, राज कुमार, विमी और मुमताज नजर आई थी. विमी को यह फिल्म संगीतकार रवि ने दिलाई थी. रवि ने विमी की मुलाकात डायरेक्टर-प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा से करवाई थी. ‘हमराज’एक सस्पेंस और कोर्टरूम ड्रामा फिल्म थी. एक्ट्रेस विमि की यह पहली फिल्म थी. आर चोपड़ा के निर्देशन में बनी ‘हमराज’ की गिनती हिंदी सिनेमा की बेहतरीन मिस्ट्री फिल्मों में होती है. इसकी कहानी, डायलॉग और म्यूजिक ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. इस फिल्म में एक्ट्रेस सारिका बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट नजर आई थीं. बीआर चोपड़ा के निर्देशन में बनी यह पहली रंगीन फिल्म थी.

फिल्म की कहानी एक सिंगर और उसके पति के इर्द-गिर्द घूमती है. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, कई चौंकाने वाले मोड़ देखने को मिलते हैं. फिल्म का म्यूजिक संगीतकार रवि ने दिया था. गाने साहिर लुधियानवी की कलम से निकले थे. फिल्म के सुपरहिट गानों में ‘नीले गगन के तले’, ‘किसी पत्थर की मूरत से’ और ‘ना मुंह छुपा के जियो’ सॉन्ग शामिल थे. इन गीतों को महेंद्र कपूर की आवाज ने अमर बना दिया. फिल्म थ्रिल, संगीत और शानदार एक्टिंग के कारण आज भी क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है. ‘हमराज’ फिल्म के बाद सुनील दत्त ने बीआर चोपड़ा के लिए कभी काम नहीं किया जबकि राज कुमार साहब ने 1992 में ‘पुलिस और मुजरिम’ फिल्म में काम किया था.

राज कुमार की 1968 में फिल्म ‘नील कमल’ आई थी जिसमें मनोज कुमार-वहीदा रहमान अहम भूमिकाओं में थे. गुलशन नंदा की स्टोरी थी. स्क्रीनप्ले फणि मजूमदार जबकि डायलॉग किदार शर्मा-इला महेश्वरी ने लिखे थे. ‘काजल’ और ‘नील कमल’ फिल्म की टीम एक ही थी. सभी कलाकारों का काम शानदार था. वहीदा रहमान को ‘गाइड’ के बाद ‘नील कमल’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. ‘नीलकमल’ का म्यूजिक रवि ने कंपोज किया था. कालजयी गाने साहिर लुधियानवी ने लिखे थे.

फिल्म का एक गाना आज भी प्रेमियों के दिल में बसा हुआ है. गाने का एक-एक शब्द दिल को चीर देता है. यह कालजयी गाना ‘तुझको पुकारे मेरा प्यार’ था. प्यार की तड़प और विरह वेदना को बयां करता हुआ यह गाना टूटे आशिकों को आज भी पसंद है. ‘नील कमल’ का बजट 85 लाख के करीब था और मूवी ने 1.75 करोड़ की कमाई की थी. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी.

1970 में रिलीज हुई ‘हीर रांझा’ फिल्म एक रोमांटिक मूवी थी जिसमें राज कुमार साहब ने रांझा का जबकि प्रिया राजवंश ने हीर का किरदार निभाया था. निर्देशक चेतन आनंद थे. फिल्म पंजाब की अमर प्रेम कहानी ‘हीर-रांझा’ पर बेस्ड है. फिल्म के डायलॉग कविता और शायरी के रूप में लिखे गए थे. डायलोग कैफी आजमी ने लिखे थे. यही फिल्म की सबसे बड़ी खासियत थी. यह पहली फिल्म थी जब डायरेक्टर चेतन आनंद ने राज कुमार के साथ काम किया.

हीर और रांझा एकदूसरे से बेहद प्रेम करते हैं लेकिन परिवार और समाज उनकी मोहब्बत के खिलाफ है. प्रेम कहानी दुखद मोड़ लेती है. यही वजह है कि इस लव स्टोरी को भारतीय सिनेमा की सबसे दर्दभरी प्रेम कहानी माना जाता है. फिल्म में म्यूजिक मदन मोहन ने दिया था. फिल्म के दो गाने ‘ये दुनिया ये महफिल’ ‘मिलो ना तुम तो हम घबराएं’ काफी लोकप्रिय हुए थे. फिल्म का सबसे मशहूर गाना ‘ये दुनिया ये महफिल, मेरे काम की नहीं’ राज कुमार साहब पर फिल्माया गया था. उनका यह गाना मोहम्मद रफी की आवाज में अमर हो गया. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त हिट रही थी.

सबसे अंत में बात करते हैं 1972 में रिलीज हुई ‘पाकीजा’ फिल्म की जिसे भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है. इस फिल्म का निर्देशन कमाल अमरोही ने किया था. फिल्म अपनी इमोशनल स्टोरी, संगीत-शायरी के लिए आज भी याद की जाती है. फिल्म में मीना कुमारी और राज कुमार लीड रोल में थे. यह फिल्म मीना कुमारी की अंतिम और सबसे यादगार फिल्म है. फिल्म की कहानी एक तवायफ साहिबजान की लाइफ पर बेस्ड थी. प्यार-सम्मान और सामान्य जीवन की तलाश में रहती है. एक दिन ट्रेन में सफर करते समय एक अजनबी उसके पैरों को देखकर एक पर्ची छोड़ जाता है. पर्ची में लिखा था – ‘आपके पांव देखे, बहुत हसीन हैं. इन्हें जमीन पर मत उतारिए, मैले हो जाएंगे.’ यह डायलॉग अमर हो गया. साहिबजान उस अजनबी से प्रेम करने लगती है लेकिन जमाने को यह मंजूर नहीं होता.

पाकीजा फिल्म का म्यूजिक गुलाम अहमद ने कंपोज किया था. फिल्म के निर्माण के दौरान उनका निधन हो गया था. ऐसे में बैकग्राउंड म्यूजिक संगीतकार नौशाद ने पूरा किया था. फिल्म के कई गीत आज भी बेहद लोकप्रिय हैं. इनमें ‘चलते-चलते यूं ही कोई मिल गया था’, ‘इन ही लोगों ने ले लीन्हा दुपट्टा मेरा’, ‘मौसम है आशिकाना’ और ‘ठाड़े रहियो ओ बांके यार’. इन गीतों को लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज से अमर बना दिया. फिल्म का एक फेमस गाना ‘चलो दिलदार चलो, चांद के पार चलो’ राज कुमार पर फिल्माया गया. वैसे इस फिल्म बनने में 14 साल का समय लग. मीना कुमारी की तबीयत खराब होने की वजह से कई बार शूटिंग रोकनी पड़ी. पाकीजा भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत और कलात्मक फिल्मों में गिनी जाती है.

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