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हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी आज भी लोगों को हैरान कर देती है, जब एक छोटी-सी गलती पर पड़े थप्पड़ ने एक कलाकार की किस्मत ही बदल दी. मशहूर डायरेक्टर केदार शर्मा और दिग्गज अभिनेता राज कपूर का ये किस्सा बताता है कि कैसे एक क्लैपर बॉय देखते ही देखते फिल्म का हीरो बन गया.

राज कपूर के लिए बना मसीहा
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में कुछ किस्से ऐसे हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं. ऐसा ही एक किस्सा जुड़ा है मशहूर डायरेक्टर केदार शर्मा और दिग्गज एक्टर राज कपूर से, जहां एक थप्पड़ ने किसी की किस्मत ही बदल दी.
केदार शर्मा का नाम इंडस्ट्री में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. उन्होंने ‘चित्रलेखा’, ‘जोगन’, ‘सुहागरात’ और ‘विद्यापति’ जैसी कई शानदार फिल्में बनाई थीं. 12 अप्रैल को उनकी जयंती भी मनाई जाती है.
संघर्ष से शुरू हुआ सफर
पंजाब में जन्मे केदार शर्मा ने पढ़ाई पूरी करने के बाद काम की तलाश में मुंबई का रुख किया. शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. बाद में वो कोलकाता पहुंचे, जहां एक फिल्म देखकर उनके अंदर सिनेमा में काम करने का जुनून पैदा हुआ. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सिनेमैटोग्राफर के तौर पर की और धीरे-धीरे डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा. उनकी फिल्में उस दौर में काफी पसंद की जाती थीं.
राज कपूर बने क्लैपर बॉय
पृथ्वीराज कपूर के कहने पर केदार शर्मा ने उनके बेटे राज कपूर को अपने साथ काम सिखाने के लिए रख लिया. उस समय राज कपूर क्लैपर बॉय का काम करते थे.एक दिन शूटिंग के दौरान राज कपूर क्लैप देने की जगह अपने बाल संवारने में लगे थे. यह देखकर केदार शर्मा को गुस्सा आ गया और उन्होंने राज कपूर को जोरदार थप्पड़ मार दिया.
राज कपूर को किया फिल्म में कास्ट
अगले ही दिन बदल गई जिंदगी
लेकिन इस घटना के बाद केदार शर्मा को एहसास हुआ कि राज कपूर में कुछ खास बात है और वो कैमरे के सामने आना चाहते हैं. बस फिर क्या था, उन्होंने तुरंत फैसला लिया और अगले ही दिन अपनी फिल्म ‘नील कमल’ में राज कपूर को हीरो के तौर पर कास्ट कर लिया. इस फिल्म में उनके साथ मधुबाला नजर आई थीं. कहा जाता है कि यही फिल्म राज कपूर के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई.
बता दें कि ‘नील कमल’ के बाद राज कपूर ने केदार शर्मा के साथ ‘बावरे नैन’ में भी काम किया. आगे चलकर राज कपूर हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े स्टार्स में शामिल हो गए. केदार शर्मा ने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्में बनाई. उन्होंने सिर्फ बड़े कलाकारों के साथ ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए भी फिल्में बनाई. साथ ही वह एक अच्छे गीतकार भी थे और ‘हमारी याद आएगी’ जैसे गीत लिखे. 1999 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके बनाए किस्से और फिल्में आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं.
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न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें