Last Updated:
Sunny Deol Cult Hit Movies : कुछ फिल्में को देखने की ललक हमेशा बनी रहती हैं. ऐसी फिल्में दर्शकों के दिल में स्थायी रूप से घर बना लेती हैं. बार-बार देखने के बाद भी दिल नहीं भरता. 41 साल पहले की ऐसी ही एक फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. इस फिल्म की कहानी सिर्फ 5 घंटे में फाइनल हुई थी. इस सुपरहिट फिल्म ने 3 और सुपरहिट मूवी की नींव रखीं. इस तरह से 11 साल में एक ही हीरो की चार एक्शन फिल्में आईं. चारों सुपरहिट रहीं
एक्शन हीरो सनी देओल की 1985 में एक ऐसी फिल्म आई थी जिसमें उनका किरदार ‘एंग्री यंगमैन’ जैसा ही था. इस फिल्म का नाम ‘अर्जुन’ था जिसका डायरेक्शन राहुल रवैल ने किया था. सनी देओल ने 1983 की फिल्म ‘बेताब’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. इसका निर्देशन भी राहुल ने ही किया था. दोनों फिल्मों की कहानी जावेद अख्तर ने लिखी थी. सच कहा जाए तो सनी देओल को एक्शन हीरो की इमेज ‘अर्जुन’ फिल्म ने बनाई. अर्जुन फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले-डायलॉग-गाने सब कुछ जावेद अख्तर ने लिखे थे. जावेद अख्तर ने फिल्म की कहानी टॉयलेट पेपर पर लिखी थी. वो भी सिर्फ पांच घंटे में.
अर्जुन फिल्म के 41 साल पूरे हो गए हैं. यह मूवी 10 मई 1985 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म के बनने की कहानी और भी दिलचस्प है. दरअसल, बेताब फिल्म का जब आखिरी शूट हो रहा था, तब सनी देओल के बचपन के दोस्त करीम मोरानी और बंटी सूरमा ने एक फिल्म बनाने का फैसला किया. हीरो सनी देओल को लेना था. कहानी लिखने का जिम्मा जावेद अख्तर को मिला.
शुरुआत में इस फिल्म को दो हीरो के साथ बनाया जाना था लेकिन कुमार गौरव के इनकार के बाद आइडिया ड्रॉप कर दिया गया. फिल्म की कहानी कई महीने तक नहीं लिखी जा सकी. कई माह ऐसे ही बीत गए. राहुल रवैल और जावेद अख्तर की दोस्ती थी. एक दिन दोनों खंडाला के होटल में ठहरे हुए थे. संडे टाइम्स में डोंगरी गैंग और पठान गैंग की खबर देखकर दोनों का माथा ठनका. पूरे दिन जावेद अख्तर और राहुल रवैल बेरोजगारी समेत कई मुद्दों पर बात करते रहे. जावेद अख्तर आधी रात को राहुल रवैल के कमरे में पहुंचे और कहानी तैयार होने की बात कही. कहानी का सार यह था कैसे बेरोजगार युवकों का राजनेता इस्तेमाल करते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google
राहुल रवैल शोमैन राज कपूर को अपना गुरू मानते थे. राज कपूर की सलाह पर ही कहानी की पृष्ठभूमि मुंबई रखी ताकि स्टोरी ज्यादा से ज्यादा सच्ची लगे. हीरो का नाम रखा अर्जुन मारवंकर रखा. फिल्म में अनुपम खेर, परेश रावल, अन्नू कपूर को खास रोल दिए गए. फिल्म में सनी देओल के ज्यादा जोर देने पर डिंपल कपाड़िया को बतौर हीरोइन लिया गया. दोनों के बीच 1984 की फिल्म ‘मंजिल मंजिल’ मूवी की शूटिंग के दौरान नजदीकियां बढ़ी थीं.
अर्जुन फिल्म में छाते वाला सीन हिंदी सिनेमा कालजयी सीन माना जाता है. राहुल रवैल ने 6 कैमरों की मदद से इस सीन को फिल्माया था. सीन में दिखाया गया कि सनी देओल का दोस्त मोहन गुंडों से अपनी जान बचाने के लिए सड़क पर भाग रहा है. मोहन के पीछे तलवार लेकर कुछ गुंडे भाग रहे हैं और वो उसे जान से मारना चाहते हैं. मोहन का किरदार अभिनेता सत्यजीत ने निभाया था. सीन शूट करने के लिए एक हज़ार से ज्यादा लोगों को बुलाया गया था. सभी के हाथों में 2 छाते दिए गए थे. इस सीन को फिल्माने में 3 दिन लगे थे. सीन शूट करते समय छाते कई कलाकारों की आंखों में लग जाते थे. तलवार से छाते कट जाते थे. आज भी यह कालजयी सीन कई फिल्म मेकर्स की पहली पसंद है. सीन की लोकेशन रेलवे स्टेशन के आसपास जैसी रखी थी.
फिल्म रिलीज करने से पहले इसका प्रिंट राहुल रवैल ने अपने गुरु राज कपूर को दिखाया था. राहुल रवैल ने बताया था कि यह आइकॉनिक उन्होंने 7 कैमरों की मदद से फिल्माया है. राज कपूर ने टोकते हुए कहा था कि सिर्फ 6 एंगल नजर आ रहे हैं, ऐसे में सातवां कैमरा कहां है? इस पर राहुल रवैल ने जवाब देते हुए कहा कि सातवां कैमरा गाड़ी में लगा रखा था लेकिन एक भी शॉट अच्छे से कैप्चर नहीं हो पाया. राज कपूर साहब की पारखी नजर के राहुल रवैल कायल हो गए. फिल्म के क्लाइमैक्स में पता चलता है कि अनुपम खेर ही मेन विलेन हैं. वो सनी देओल का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे थे. क्लाइमैक्स देखकर राज साहब खड़े हो गए और बोले – राहुल, क्या फिल्म बनाई है.
राज साहब की बात सच निकली. फिल्म ने रिलीज होते ही तहलका मचा दिया. ‘अर्जुन’ फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल चार गाने थे. इन चारों गानों में ‘मामाइया केरो मामा’ सबसे ज़्यादा पॉप्युलर हुआ. दिलचस्प बात यह है कि यह गाना फिल्म की स्क्रिप्ट फाइन होने से पहले ही रिकॉर्ड हो गया था. आशा भोंसले ने एक गाना ‘मुन्नी पप्पू और चुनमुन’ गाया था जो खासा मकबूल हुआ. इस गाने की धुन 1973 में आई फिल्म ‘नफरत’ के गाने ‘राह में कलियां खिला के यार’ से मिलती है. उस फिल्म का म्यूजिक भी आरडी बर्मन ने ही तैयार किया था.
‘अर्जुन’ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी. इस फिल्म ने सनी देओल को बतौर एक्शन हीरो बॉलीवुड में स्थापित कर दिया. यह भी दिलचस्प है कि इस फिल्म से तीन ऐसी एक्शन फिल्में हिंदी सिनेमा को मिलीं, जिनके डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर रटे हुए हैं. ये फिल्में हैं : घायल, दामिनी और घातक. दरअसल, जब ‘अर्जुन’ फिल्म की शूटिंग हो रही थी तो राज कुमार संतोषी इत्तेफाक से उसी स्टूडियो में मौजूद थे जहां अर्जुन फिल्म की शूटिंग चल रही थी. संतोषी ने देखा कि सनी देओल एक इमोशनल सीन बड़ी ही खूबसूरती के साथ शूट कर रहे हैं. राज कुमार संतोषी को सनी देओल की एक्टिंग बहुत पसंद आई. उन्होंने फिर सनी देओल के साथ ‘घायल’, ‘दामिनी’ और ‘घातक’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनाईं. तीनों फिल्मों के डायलॉग अमर हो गए.

