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एक्टर 90s की हिट फिल्मों से रातों-रात नेशनल क्रश बन गए थे. वे रजनीकांत के बड़े प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे थे. हालांकि, उन्होंने फिल्मों में लगातार असफलता के कारण साल 2000 में एक्टिंग छोड़ दी. उन्होंने अपनी फैमिली स्किल का इस्तेमाल करके ‘टैलेंट मैक्सिमस’ कंपनी खड़ी की, जिसकी वैल्यू आज करीब 3,300 करोड़ रुपये है. उन्होंने बिजनेस में बड़ी सफलता पाने के बाद ‘थानी ओरुवन’ जैसी फिल्मों से फिर से कमबैक किया. आज वे एक सफल बिजनेसमैन और मंझे हुए कलाकार हैं. असफलता को सफलता में कैसे बदला जाता है, यह एक्टर की जिंदगी से सीखा जा सकता है.
नई दिल्ली: तमिल सिनेमा के इतिहास में एक दौर ऐसा था जब सुपरस्टार रजनीकांत का हर तरफ बोलबाला था. उसी समय एक एक्टर ने अपनी एंट्री से सबको चौंका दिया, वो थे अरविंद स्वामी. दर्शक उन्हें ‘रोजा’ और ‘बॉम्बे’ जैसी फिल्मों के चलते याद करते हैं. वो अपनी चॉकलेटी लुक और जबरदस्त एक्टिंग के दम पर रजनीकांत के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे. लड़कियों के बीच उनका क्रेज ऐसा था कि उन्हें उस दौर का नेशनल क्रश कहा जा सकता था.
अरविंद स्वामी की शुरुआत किसी सपने से कम नहीं थी. उन्हें दिग्गज डायरेक्टर मणिरत्नम ने 1991 की फिल्म ‘थलापति’ में लॉन्च किया. मजे की बात यह है कि अपनी पहली ही फिल्म में उन्हें रजनीकांत और ममूटी जैसे दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला. इसके बाद, ‘रोजा’ और ‘बॉम्बे’ जैसी फिल्मों ने उन्हें रातों-रात पूरे भारत में एक बड़ा स्टार बना दिया.
90 के दशक के बीच तक अरविंद स्वामी हर बड़े मेकर की पहली पसंद बन चुके थे. उनकी फिल्में न सिर्फ चलती थीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड भी बनाती थीं. उस समय ऐसा लगने लगा था कि वो तमिल इंडस्ट्री के अगले सबसे बड़े सुपरस्टार होंगे. लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही स्क्रिप्ट लिख रखी थी.
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90 के दशक के आखिरी सालों में अरविंद का फिल्मी करियर डगमगाने लगा. अरविंद स्वामी ने अपनी कई फिल्मों के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन वे समय पर सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पाईंवे . वे लगातार देरी और कुछ फिल्मों के फ्लॉप होने से मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगे. उन्हें लगा कि शायद यह फील्ड अब उनके लिए नहीं रहा.
अरविंद ने साल 2000 के आते-आते एक बड़ा फैसला लिया और एक्टिंग की चकाचौंध को पूरी तरह अलविदा कह दिया. फिल्मों से दूरी बनाने के बाद उन्होंने अपने फैमिली बिजनेस पर ध्यान देना शुरू किया. अरविंद के अंदर बिजनेस की समझ पहले से थी और उन्होंने इसे ही अपना अगला गोल बना लिया.
अरविंद स्वामी ने अपनी मेहनत और विजन के दम पर ‘टैलेंट मैक्सिमस’ नाम की कंपनी शुरू की. उनकी देखते ही देखते यह कंपनी सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंच गई. रिपोर्ट्स की मानें, तो साल 2022 तक उनके इस बिजनेस एंपायर की वैल्यू करीब 3,300 करोड़ रुपये आंकी गई. एक फ्लॉप होते करियर से निकलकर इतनी बड़ी नेटवर्थ खड़ी करना वाकई मिसाल है.
अरविंद स्वामी ने बिजनेस में सफलता पाने के बाद फिल्मों में फिर से कमबैक किया. फिल्म ‘थानी ओरुवन’ में उनके विलेन वाले किरदार ने सबको हैरान कर दिया और साबित किया कि उनके अंदर का कलाकार आज भी जिंदा है. अब वे चुनिंदा और दमदार रोल ही करना पसंद करते हैं, जिससे उनका रुतबा इंडस्ट्री में और बढ़ गया है.
अरविंद स्वामी की कहानी हमें सिखाती है कि असफलता सिर्फ एक ठहराव है, अंत नहीं. उन्होंने दिखाया कि अगर आपके पास हुनर और जज्बा है, तो आप कैमरे के सामने हों या बिजनेस मीटिंग में, आप हर जगह विनर बन सकते हैं. आज वे एक सफल एक्टर होने के साथ-साथ एक दिग्गज बिजनेस टायकून भी हैं.

