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New Hypertension Treatment: वैज्ञानिकों ने हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने की नई दवा बनाई है, जिसका नाम बैक्सड्रोस्टैट है. यह दवा उन मरीजों के लिए उम्मीद बनकर सामने आई है, जिनका ब्लड प्रेशर सामान्य दवाओं से कंट्रोल नहीं होता है. यह दवा एल्डोस्टेरोन हार्मोन को कंट्रोल करके ब्लड प्रेशर को कम करती है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा घट सकता है. क्लीनिकल ट्रायल में बैक्सड्रोस्टैट दवा ने काफी अच्छा रिजल्ट दिया है.

ब्लड प्रेशर की नई दवा बैक्सड्रोस्टैट है, जो ट्रायल्स में बेहद असरदार साबित हुई है.
Baxdrostat for Resistant Hypertension: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है. मेडिकल की भाषा में इसे हाइपरटेंशन कहा जाता है. हाई बीपी के भारत में भी करोड़ों मरीज हैं और उनमें से तमाम लोगों को इस बीमारी का पता ही नहीं है. अगर ब्लड प्रेशर लंबे समय तक ज्यादा रहे, तो इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी डिजीज और समय से पहले मौत का खतरा बढ़ जाता है. हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए लोगों को नियमित रूप से दवा लेनी पड़ती है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई मरीजों में दवा लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं हो पाता है. वैज्ञानिकों ने अब इस परेशानी को दूर करने के लिए नई दवा खोज ली है, जो अन्य दवाएं फेल होने के बाद भी काम करेगी और बीपी पर लगाम लगाएगी.
वैज्ञानिकों के अनुसार यह दवा उन मरीजों के लिए खासतौर पर उपयोगी हो सकती है, जिन्हें रेजिस्टेंट हाइपरटेंशन यानी ऐसा हाई ब्लड प्रेशर होता है, जो कई दवाओं के बावजूद कंट्रोल नहीं होता. यह खोज न सिर्फ इलाज के लिहाज से अहम है, बल्कि इससे यह भी समझने में मदद मिलती है कि एल्डोस्टेरोन का बढ़ा हुआ स्तर इस समस्या में बड़ी भूमिका निभाता है. यह दवा लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी भी पाई गई है. दुनिया भर में करीब 130 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या भारत और चीन में है. ऐसे में बैक्सड्रोस्टैट जैसी नई दवा भविष्य में करोड़ों लोगों के लिए राहत साबित हो सकती है. हालांकि अभी इस दवा का फेज 3 क्लीनिकल ट्रायल हुआ है. बाजार में आने से पहले इसे कई ट्रायल्स और मंजूरी की जरूरत होगी. अब तक के रिजल्ट यह संकेत देते हैं कि यह दवा हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में एक बड़ा बदलाव ला सकती है.
हाल ही में किए गए एक इंटरनेशनल फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल में इस दवा की प्रभावशीलता को परखा गया. इस अध्ययन में दुनिया भर के 214 क्लीनिकों से लगभग 800 मरीजों को शामिल किया गया. ये सभी ऐसे मरीज थे, जिनका ब्लड प्रेशर पहले से चल रहे इलाज के बावजूद बहुत ज्यादा था. इस रिसर्च का नेतृत्व यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के प्रोफेसर ब्रायन विलियम्स ने किया और इसके नतीजे यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ESC) कांग्रेस 2025 में प्रस्तुत किए गए. इस अध्ययन के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे. जिन मरीजों को बैक्सड्रोस्टैट दी गई, उनका सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर औसतन 9 से 10 mmHg तक कम हो गया, जो कि एक महत्वपूर्ण गिरावट मानी जाती है. इस स्तर की कमी से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी हद तक घट सकता है. खास बात यह रही कि लगभग 40% मरीजों का ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर तक पहुंच गया, जबकि प्लेसीबो लेने वालों में यह आंकड़ा 20% से भी कम था.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें