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चिकित्सा विज्ञान अब केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि ये शरीर की जैविक उम्र को थामने की दिशा में बढ़ चुका है। हम ऐसी तकनीकों के युग में हैं, जहां कोशिकाओं का कायाकल्प और जेनेटिक रिपेयर वैज्ञानिक हकीकत बनने जा रही है। 1-रेड लाइट थेरेपी-सेल्स जल्दी रिपेयर होती हैं, अधिक ऊर्जा बनाती हैं इस थेरेपी में शरीर पर कम वेवलेंथ वाली लाल रोशनी डालते हैं। रोशनी त्वचा की गहराई में कोशिकाओं के पावरहाउस यानी माइटोकॉन्ड्रिया को सक्रिय करती है। इस थेरेपी से कोशिकाएं अधिक ऊर्जा बनाती हैं और तेजी से रिपेयर होती हैं। खर्च और उपयोग – थेरेपी का पैनल करीब 15,000 रु. में आता है। इससे झुर्रियां व त्वचा के दाग घटते हैं। 2-क्रायोथेरेपी -110° डिग्री में दो मिनट, युवा रहने का जतन क्रायो-चेंबर में व्यक्ति को रखा जाता है, जहां तरल नाइट्रोजन से तापमान -110°C से -160°C तक ले जाते हैं। 2-4 मिनट में शरीर ‘सर्वाइवल मोड’ में आ जाता है, ब्लड सर्कुलेशन तेज हो जाता है। अंगों में अधिक ऑक्सीजन वाला खून दौड़ने लगता है। खर्च और उपयोग – मेट्रो शहरों में ₹5,000 से ₹12,000 तक सेशन मिल जाता है। वजन घटाने में मददगार। 3-इंट्रावेनस ग्लुटाथियोन ड्रिप – एजिंग के लिए जिम्मेदार ‘फ्री रेडिकल्स’ घटते हैं इसमें ग्लुटाथियोन, विटामिन्स और मिनरल्स का कॉकटेल सीधे आईवी ड्रिप से खून में पहुंचाया जाता है। यह पाचन तंत्र से नहीं गुजरता, इसलिए पोषक तत्व 100% शरीर को मिलते हैं। यह ‘फ्री रेडिकल्स’ को खत्म करता है जो एजिंग के मुख्य कारण हैं। खर्च और उपयोग – प्रति ड्रिप का खर्च ₹10,000 से ₹25,000 तक आता है। यह थेरेपी लिवर को डिटॉक्स करती है। 4-ओजोन थेरेपी – शरीर में दर्द व थकान दूर कर युवा रखती है शरीर में ‘मेडिकल ग्रेड ओजोन’ गैस डाली जाती है। सबसे कॉमन तरीका ‘ऑटो-हीमोथेरेपी’ है। मरीज का थोड़ा खून निकालकर उसमें ओजोन मिक्स की जाती है और फिर उसे वापस शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाता है। यह इम्यून सिस्टम रिबूट करता है। खर्च और उपयोग – सेशन ₹7,000 से ₹15,000 के बीच है। थेरेपी दर्द व थकान को दूर कर शरीर को युवा बनाती है।
रिवर्स एजिंग’ का सफल टेस्ट- ऑक्सीजन थेरेपी से फिर होंगे जवान तेल अवीव यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी के जरिए बुढ़ापे को जैविक रूप से पलटने की कोशिश की है। ऑक्सीजन के दबाव वाले चैंबर में इलाज के बाद बुजुर्गों के टीलोमियर्स की लंबाई 25 साल पहले जैसी हो गई और खराब कोशिकाएं 37% तक कम हो गईं। टीलोमियर्स डीएनए के सिरों पर मौजूद वह सुरक्षात्मक कैप्सूल होते हैं जो क्रोमोसोम को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इनकी लंबाई कम होती जाती है। – 800 लाख करोड़ रु. की हो गई लॉन्जिविटी इकोनॉमी
– 210 करोड़ रुपए लगाए हैं जोमैटो फाउंडर दीपेंदर गोयल ने लॉन्जिविटी से जुड़ी रिसर्च में
– 768 करोड़ रुपए स्वयं को जवान रखने के लिए खर्च कर रहे हैं अमेरिकी उद्योगपति ब्रायन जॉनसन लंबी उम्र का विज्ञान – इलाज के लिए शरीर में जाएंगे नैनो रोबोट नैनो-रोबोटिक्स – शरीर की मरम्मत करेंगे रोबोट्स, बीमारी और वायरस नष्ट करेंगे इसमें छोटे-छोटे रोबोट्स को हमारे खून व नसों में भेजा जाएगा। अगर किसी कोशिका के डीएनए में कोई खराबी आती है, तो ये नैनोबोट उसे तुरंत ठीक कर देंगे। वे धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल को साफ करेंगे। जेनेटिक इंजीनियरिंग – बीमारियों के लिए जिम्मेदार डीएनए के हिस्से को काट देंगे यह डीएनए में बदलाव पर केंद्रित है। वैज्ञानिक इसकी मदद से डीएनए के उस हिस्से को काट सकते हैं, जो उम्र बढ़ाने या बीमारियों के लिए जिम्मेदार है और उसकी जगह एक स्वस्थ जीन लगा सकते हैं। सेल्यूलर रिप्रोग्रामिंग- बूढ़ी कोशिकाओं को फिर युवा अवस्था में लाने की तकनीक इसमें वैज्ञानिक जीन कोशिका के एपिजेनेटिक क्लॉक को रीसेट कर देते हैं। जैसे कंप्यूटर को फॉर्मेट करके नया जैसा बनाया जाता है, वैसे ही बूढ़ी कोशिका को वापस उसकी भ्रूण जैसी युवा अवस्था में ले आती है।
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लंबा और स्वस्थ जीवन जीने के कितने करीब हैं हम:मिशन ‘अमरता’; लंबे समय तक युवा रहने, बुढ़ापा थामने की नई तकनीकें