Health Tips: गर्मी में कुडजू स्टार्च का करें सेवन, पसीना, थकान और गर्मी से मिलेगी राहत, शरीर को मिलेगा जबरदस्त फायदा

Health Tips: गर्मी में कुडजू स्टार्च का करें सेवन, पसीना, थकान और गर्मी से मिलेगी राहत, शरीर को मिलेगा जबरदस्त फायदा


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Kudzu Starch Drink Benefits : कुडज़ू और कसावा स्टार्च पेय गर्मी में ठंडक और सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. पलामू के आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे ने कहा कि इससे पथरी की आशंका भी दूर हो जाती है. यह शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला पेय पदार्थ है.

कसावा या कुडज़ू स्टार्च पाउडर से बना पेय लंबे समय से गर्मियों में इस्तेमाल किया जाने वाला पारंपरिक और ताजगी देने वाला पेय माना जाता है. यह सस्ता होने के साथ-साथ शरीर को ठंडक देता है और कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. खासतौर पर गर्मी के मौसम में लोग इसे शरीर को ठंडा रखने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए पीते हैं. आयुर्वेद में जानकार शिव कुमार पांडे ने लोकल18 को बताया कि यह पेय रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और गुर्दे की समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए भी लाभकारी माना जाता है.

कसावा या कुडज़ू स्टार्च पाउडर से बना पेय लंबे समय से गर्मियों में इस्तेमाल किया जाने वाला पारंपरिक और ताजगी देने वाला पेय माना जाता है. यह सस्ता होने के साथ-साथ शरीर को ठंडक देता है और कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. खासतौर पर गर्मी के मौसम में लोग इसे शरीर को ठंडा रखने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए पीते हैं. आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे ने लोकल 18 को बताया कि यह पेय रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और गुर्दे की समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है.

उन्होंने कहा कि कई लोगों में यह धारणा है कि कसावा या कुडज़ू स्टार्च पाउडर के ज्यादा सेवन करने से गुर्दे की पथरी बन सकती है. हालांकि यह पूरी तरह गलतफहमी है. चिकित्सा साहित्य में अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि कुडज़ू पाउडर के सेवन से पथरी बनती है. इसमें ऐसे सक्रिय तत्व नहीं पाए जाते जो पथरी बनने का कारण बनें.

उन्होंने कहा कि कई लोगों में यह धारणा है कि कसावा या कुडज़ू स्टार्च पाउडर के ज्यादा सेवन करने से गुर्दे की पथरी बन सकती है. हालांकि यह पूरी तरह गलतफहमी है. चिकित्सा साहित्य में अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि कुडज़ू पाउडर के सेवन से पथरी बनती है. इसमें ऐसे सक्रिय तत्व नहीं पाए जाते हैं. जो पथरी बनने का कारण बनें.

आगे कहा कि पारंपरिक चिकित्सा के अनुसार कुडज़ू की जड़ का स्वाद मीठा और प्रकृति तटस्थ होती है. यह शरीर की गर्मी कम करने, प्यास बुझाने, बुखार, खसरा, फोड़े-फुंसी और सर्दी में राहत देने में उपयोगी मानी जाती है. इसके अलावा यह हैंगओवर से राहत दिलाने में भी प्रभावी बताई जाती है. गर्मी के दिनों में इसे ठंडक देने वाले प्राकृतिक पेय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

साथ ही कहा कि पारंपरिक चिकित्सा के अनुसार कुडज़ू की जड़ का स्वाद मीठा और प्रकृति तटस्थ होती है. यह शरीर की गर्मी कम करने, प्यास बुझाने, बुखार, खसरा, फोड़े-फुंसी और सर्दी में राहत देने में उपयोगी मानी जाती है. इसके अलावा यह हैंगओवर से राहत दिलाने में भी प्रभावी बताई जाती है. गर्मी के दिनों में इसे ठंडक देने वाले प्राकृतिक पेय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

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उन्होंने बताया कि कुडज़ू स्टार्च पाउडर रक्त संचार को बेहतर बनाने, रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और रक्तचाप कम करने में सहायक हो सकता है. इसके अलावा यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने, यकृत कोशिकाओं की रक्षा करने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में भी मदद करता है. यह श्वसन संक्रमण से बचाव और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है.

उन्होंने बताया कि कुडज़ू स्टार्च पाउडर रक्त संचार को बेहतर बनाने, रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और रक्तचाप कम करने में सहायक हो सकता है. इसके अलावा यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने, यकृत कोशिकाओं की रक्षा करने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में भी मदद करता है. यह श्वसन संक्रमण से बचाव और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है.

उन्होंने कहा कि यह लाभकारी है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. इसे रोजाना एक गिलास से अधिक सेवन न करने की सलाह देते हैं. इसे शहद के साथ मिलाकर नहीं पीना चाहिए, क्योंकि इससे प्रतिकूल प्रतिक्रिया हो सकती है. सुबह इसका सेवन बेहतर माना जाता है, जबकि शाम को पीने से बचने की सलाह दी जाती है.

साथ ही कहा कि यह लाभकारी है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. इसे रोजाना एक गिलास से अधिक सेवन न करने की सलाह देते हैं. इसे शहद के साथ मिलाकर नहीं पीना चाहिए. क्योंकि इससे प्रतिकूल प्रतिक्रिया हो सकती है. सुबह इसका सेवन बेहतर माना जाता है. जबकि शाम को पीने से बचने की सलाह दी जाती है.

आगे कहा कि कसावा स्टार्च का शीतल प्रभाव अधिक होता है, इसलिए छोटे बच्चों को कम मात्रा में ही देना चाहिए. कच्चा सेवन करने से पेट खराब या दस्त की समस्या हो सकती है, इसलिए इसे पकाकर देना बेहतर है. गर्भवती महिलाओं को शरीर में गर्मी महसूस होने पर इसका सेवन लाभकारी हो सकता है, लेकिन ठंड, थकान या लो ब्लड प्रेशर होने पर इसे नहीं पीना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कसावा स्टार्च का शीतल प्रभाव अधिक होता है, इसलिए छोटे बच्चों को कम मात्रा में ही देना चाहिए. कच्चा सेवन करने से पेट खराब या दस्त की समस्या हो सकती है. इसलिए इसे पकाकर देना बेहतर है. गर्भवती महिलाओं को शरीर में गर्मी महसूस होने पर इसका सेवन लाभकारी हो सकता है, लेकिन ठंड, थकान या लो ब्लड प्रेशर होने पर इसे नहीं पीना चाहिए.

आगे कहा कि कुडज़ू स्टार्च पेय बनाने के लिए 2–3 चम्मच स्टार्च में थोड़ा गर्म पानी मिलाकर घोल तैयार करें. इसमें ताजा दूध, गाढ़ा दूध, कुमक्वाट या नींबू और स्वादानुसार चीनी की चाशनी मिलाएं. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर ठंडा परोसें. यह पेय गर्मी में ताजगी देने के साथ शरीर को ऊर्जा भी देता है.

आगे कहा कि कुडज़ू स्टार्च पेय बनाने के लिए 2–3 चम्मच स्टार्च में थोड़ा गर्म पानी मिलाकर घोल तैयार करें. इसमें ताजा दूध, गाढ़ा दूध, कुमक्वाट या नींबू और स्वादानुसार चीनी की चाशनी मिलाएं. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर ठंडा परोसें. यह पेय गर्मी में ताजगी देने के साथ शरीर को ऊर्जा भी देता है.

उन्होंने आगे कहा कि शुद्ध कुडज़ू स्टार्च सफेद रंग के बड़े दानों के रूप में होता है, जिसमें प्राकृतिक सुगंध होती है. इसे चबाने पर यह कुरकुरा लगता है और जल्दी घुल जाता है. वहीं मिलावटी उत्पाद का रंग धुंधला होता है और उसमें तेज या कृत्रिम गंध हो सकती है. सही गुणवत्ता वाला पाउडर चुनना ही बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए जरूरी माना जाता है.

उन्होंने आगे कहा कि शुद्ध कुडज़ू स्टार्च सफेद रंग के बड़े दानों के रूप में होता है, जिसमें प्राकृतिक सुगंध होती है. इसे चबाने पर यह कुरकुरा लगता है और जल्दी घुल जाता है. वहीं मिलावटी उत्पाद का रंग धुंधला होता है और उसमें तेज या कृत्रिम गंध हो सकती है. सही गुणवत्ता वाला पाउडर चुनना ही बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए जरूरी माना जाता है.



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