What is cervical spondylitis: आज के डिजिटल दौर में लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप पर झुककर काम करना आम बात हो गई है. इसका सबसे ज्यादा असर हमारी गर्दन पर पड़ता है, जिससे दर्द और अकड़न की शिकायत बढ़ने लगती है. कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हर बार यह साधारण दर्द नहीं होता, कई मामलों में यह सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का संकेत भी हो सकता है.
क्या है सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस?
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से यानी सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी होती है. यही हिस्सा सिर को सहारा देता है और उसे घुमाने में मदद करता है. उम्र बढ़ने के साथ इस हिस्से की हड्डियां और डिस्क कमजोर होने लगती हैं, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या पैदा होती है.
किन कारणों से बढ़ती है यह समस्या?
लंबे समय तक गलत पोस्चर में बैठना.
लगातार स्क्रीन पर काम करना.
गर्दन झुकाकर मोबाइल इस्तेमाल करना.
बढ़ती उम्र के कारण हड्डियों का कमजोर होना.
ये सभी कारण धीरे-धीरे गर्दन पर दबाव बढ़ाते हैं और समस्या को गंभीर बना सकते हैं.
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के आम लक्षण
गर्दन में लगातार दर्द और अकड़न
सिरदर्द की समस्या
कंधों और हाथों तक फैलने वाला दर्द
हाथों में झुनझुनी या सुन्नपन
नसों पर दबाव के कारण कमजोरी महसूस होना
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस से बचने का उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या से बचने का सबसे आसान तरीका है सही बैठने और काम करने का तरीका अपनाना.
स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें.
पीठ सीधी रखें.
गर्दन को लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रखें.
बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें.
एक्सरसाइज और एक्टिव रहना जरूरी है.
हल्की स्ट्रेचिंग और मसल्स को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज से दर्द और अकड़न में काफी राहत मिल सकती है. नियमित फिजिकल एक्टिविटी रीढ़ की सेहत को बेहतर बनाती है.
लाइफस्टाइल में करें ये जरूरी बदलाव
भारी वजन उठाने से बचें
सही तकिया और गद्दा चुनें
शरीर को एक्टिव रखें
वजन को कंट्रोल में रखें
गर्दन को झटके से घुमाने से बचें
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर दर्द लगातार बढ़ रहा हो, हाथों में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो या घरेलू उपायों से भी राहत न मिले, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है.
सर्वाइकल की समस्या को न करें इग्नोर
सर्वाइकल की समस्या को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. सही पोस्चर, नियमित एक्सरसाइज और स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. छोटे-छोटे बदलाव आपकी रीढ़ की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं.