कपड़ा व्यापारी से बना फिल्ममेकर, दाऊद इब्राहिम-छोटा शकील को लगाता था डांट, 1 विवाद के बाद चली गई जान

कपड़ा व्यापारी से बना फिल्ममेकर, दाऊद इब्राहिम-छोटा शकील को लगाता था डांट, 1 विवाद के बाद चली गई जान


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मुंबई के अपराधियों और फिल्मों का रिश्ता रातों-रात नहीं बना था. इसकी शुरुआत 1960 के दशक में हाजी मस्तान जैसे नामों से हुई थी. उस दौर में गैंगस्टर्स को ‘फाइनेंसर’ माना जाता था. 90 के दशक में यह रिश्ता अवैध फाइनेंसिंग, जबरन कास्टिंग और मनी लॉन्ड्रिंग तक फैल गया. गुलशन कुमार की हत्या हुई. राकेश रोशन की जान बाल-बाल बची. अबू सलेम जैसे गैंगस्टर्स शाहरुख खान जैसे बड़े सितारों को डराने-धमकाने लगे. इन सबके बीच, एक ऐसा भी फिल्ममेकर था जो दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील को डांट देता था. मगर प्रोपर्टी विवाद के चलते छोटा शकील ने उनके नाम सुपारी निकाल दी. कहते हैं कि दाऊद इब्राहिम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, मगर नहीं बचा पाए.

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नई दिल्ली: 1997 में गुलशन कुमार की हत्या से कुछ महीने पहले अंडरवर्ल्ड ने एक फिल्ममेकर को मरवा दिया था. डायरेक्टर राजीव राय को भी मारने की कोशिश हुई थी. राकेश रोशन ने प्रोटेक्शन मनी देने से इनकार कर दिया था, तो उन पर जानलेवा हमला हुआ. 90 के दशक में हुए हादसे याद दिलाते हैं कि अंडरवर्ल्ड की पकड़ बॉलीवुड पर कितनी मजबूत थी. हम जिस फिल्ममेकर की बात कर रहे हैं, वे दाऊद इब्राहिम और शकील को भी डांट देते थे. मगर एक विवाद ने उनकी जान चली गई. उनका नाम मुकेश दुग्गल था.

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मुकेश दुग्गल मूल रूप से पंजाब के अमृतसर से ताल्लुक रखते थे. इंडियन एक्सप्रेस ने वरिष्ठ पत्रकार बलजीत परमार के हवाले से बताया कि मुकेश दुग्गल ने शुरुआत में कपड़ों की तस्करी से पैसा कमाया था. उन्होंने उसी पैसे को बाद में फिल्मों में लगाना शुरू कर दिया. वे पहले एक फाइनेंसर बने और फिर धीरे-धीरे फिल्म प्रोड्यूसर के तौर पर अपनी पहचान बनाई. उनका सफर काफी फिल्मी और उतार-चढ़ाव भरा था. (फोटो साभार: Instagram@sahai_neeraj)

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मुकेश दुग्गल ने संजय दत्त और अजय देवगन जैसे बड़े सितारों के साथ फिल्में बनाईं. उनकी फिल्म ‘गोपी किशन’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई थी जिसे उन्होंने डायरेक्ट किया था. अजय देवगन की ‘प्लेटफॉर्म’, दिव्या भारती की ‘दिल का क्या कसूर’ उनके सहयोग से बनी थीं. उन्होंने 1990 के दशक में तक अपनी एक खास जगह बना ली थी, लेकिन अंडरवर्ल्ड के साथ बढ़ते रिश्तों और उनके हिंसक अंत ने बॉलीवुड के एक काले दौर की कहानी बयां कर दी.

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7 मार्च 1997 को मुकेश दुग्गल की उनके दफ्तर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि वे दाऊद-छोटा शकील के करीबी थे. इस घटना ने फिल्म जगत को डरा दिया था. यह साफ संकेत था कि गैंगस्टर्स की पकड़ इंडस्ट्री पर बहुत मजबूत हो चुकी है. अब कोई भी निर्माता खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था. राम गोपाल वर्मा ने कुछ वक्त पहले दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि शकील ने उन्हें प्रोपर्टी विवाद के चलते मार दिया था. कुछ रिपोर्ट्स यह भी दावा करती हैं कि मुकेश दुग्गल ने अपनी फिल्म में पैसा लगाने के लिए छोटा राजन से उधार लिया था, जिसकी वजह से अंडरवर्ल्ड के साथ उनके रिश्ते खराब हुए और शकील ने उन्हें मार दिया. कहते हैं कि मुकेश दुग्गल के ताल्लुकात दाऊद और शकील से इतने अच्छे थे कि वे उन्हें बातों-बातों में डांट दिया करते थे.

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राम गोपल वर्मा ने बताया था कि वे 1995 की फिल्म ‘रंगीला’ के को-प्रोड्यूसर झामु सुघंद के दफ्तर में मुकेश दुग्गल से टकराए थे. वे कहते हैं, ‘दुग्गल, दाऊद-छोटा शकील के करीब थे. वे उनके साथ ड्रिंक किया करते थे. ड्रिंग सही से न मिलाने पर वे शकील को डांट तक देते थे. उनके अलग होने के बाद मुकेश दुग्गल फिल्मों में आए और सिर्फ लीगल बिजनेस किया.’

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मुकेश दुग्गल जब प्रोपर्टी विवाद से घिरे, तो छोटा शकील ने उन्हें मारने का कॉन्ट्रैक्ट निकाल दिया. राम गोपाल वर्मा ने आगे कहा, ‘दुग्गल को किसी तरह अपने नाम निकले कॉन्ट्रैक्ट के बारे में पता चल गया. उन्होंने फिर दाऊद के गुर्गे को कॉल किया, जिसने शकील को कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने की डिमांड करते हुए कहा कि हम सब एक हैं. लेकिन फोन कॉल के तीन घंटे बाद मुकेश दुग्गल मरे हुए मिले. शकील ने कहा कि उसने शूटर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन समय पर ऐसा नहीं हो पाया.’

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1990 का दशक आते-आते सब कुछ बदल गया. गैंगस्टर अब सिर्फ मेहमान नहीं थे, बल्कि वे फिल्मों में सीधे पैसा लगाने लगे थे. वे तय करने लगे थे कि फिल्म में कौन काम करेगा. माना जाता है कि फिल्म इंडस्ट्री का इस्तेमाल काले धन को सफेद करने के लिए होने लगा था. इससे अंडरवर्ल्ड का दखल फिल्मों में बहुत ज्यादा बढ़ गया. गैंगस्टर्स अब एक्टर्स को दुबई की पार्टियों में बुलाने लगे थे. वहां परफॉर्म करने के लिए सितारों पर दबाव डाला जाता था. पूर्व पुलिस कमिश्नर डी. शिवानंदन के अनुसार, उस समय की कई फिल्में गैंगस्टर्स के पैसे से ही बनी थीं. ‘सत्या’ और ‘कंपनी’ जैसी फिल्में उनकी इमेज सुधारने के लिए बनाई गई थीं. यह दौर इंडस्ट्री के लिए बेहद मुश्किल था.

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सिर्फ प्रोड्यूसर ही नहीं, बड़े एक्टर्स भी डरे हुए थे. शाहरुख खान ने बताया कि उन्हें अबू सलेम से धमकी भरे फोन आते थे. उन्हें हर वक्त महसूस होता था कि कोई उन पर नजर रख रहा है. यह सब बहुत निराशाजनक और डरावना अनुभव था. उन्होंने कहा था, ‘अबु सलेम मुझसे कहता था कि वह मुझे देख सकता है. यह टेलिस्कोप की निगरानी में रहने जैसा था.’ इसी खौफनाक माहौल के बीच मुकेश दुग्गल ने बॉलीवुड में अपना रास्ता बनाया था.

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