Business Idea: समोसा बेचकर कमाते हैं लाखों, बता दिया बिजनेस का गांव वाला सीक्रेट – Chhattisgarh News

Business Idea: समोसा बेचकर कमाते हैं लाखों, बता दिया बिजनेस का गांव वाला सीक्रेट – Chhattisgarh News


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Village Samosa Business: सरायपाली के कुटेला चौक में रमेश बेहरा का ठेला आज समोसा किंग के नाम से मशहूर है. धीमी आंच में तले कुरकुरे समोसे और अपनापन भरा स्वाद ही उनकी सफलता का राज़ है. रोज़ 700 से अधिक समोसे बिकते हैं. कम लागत, मेहनत और गुणवत्ता से रमेश का ठेला अब एक स्थानीय ब्रांड बन चुका है.

रायपुर : समोसा बिजनेस छोटा जरूर है, लेकिन मुनाफे के मामले में किसी बड़े कारोबार से कम नहीं है.अगर स्वाद और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए तो ग्राहकों की कतार अपने आप लग जाती है. कम लागत, आसान प्रक्रिया और स्थानीय स्वाद की वजह से यह बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है. हुनर और लगन से सड़क किनारे का ठेला भी बड़ा बिजनेस बन सकता है. सफलता हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि सही तकनीक और निरंतर मेहनत से मिलती है.

ठेले से करीब 700 समोसे चट हो जाते
महासमुंद जिले के सरायपाली के कुटेला चौक पर एक छोटा-सा ठेला इस बात का सजीव उदाहरण है. यहां रमेश बेहरा पिछले 10 सालों से समोसा बेच रहे हैं, लेकिन उनकी पहचान आज ‘समोसा किंग’ के रूप में है. रोज़ाना उनके ठेले से करीब 700 समोसे चट हो जाते हैं वो भी कुछ ही घंटों में.रमेश बेहरा बताते हैं कि उनके बिजनेस की असली सफलता का राज़ ‘धीमी आंच’ में छिपा है. वे कहते हैं, समोसा बनाना आसान है, लेकिन उसे कुरकुरा और स्वादिष्ट बनाना कला है. अगर तेल बहुत गर्म हो, तो समोसा बाहर से जल जाता है और अंदर से कच्चा रह जाता है. इसलिए मैं हर समोसे को करीब 20 मिनट तक मीडियम आंच पर तलता हूं.

धीमी आंच पर पकाने की यही तकनीक रमेश के समोसे को बाकी ठेलों से अलग बनाती है. उनके समोसे बाहर से खस्ता और अंदर से मुलायम होते हैं. आलू में हल्का गरम मसाला, अमचूर और धनिया पाउडर का तड़का स्वाद को और बढ़ा देता है. यही गुणवत्ता और निरंतरता उनके बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत बन गई है.

मेहनत और अपनापन’ का तड़का
20 रुपए की प्लेट में रमेश तीन बड़े समोसे परोसते हैं, साथ में छोले, तीखी-मीठी चटनी और मिर्च-लहसुन की झटपट चटनी. ग्राहकों का कहना है कि इस स्वाद में सिर्फ मसाले नहीं, बल्कि मेहनत और अपनापन’ का तड़का भी है. रमेश ने यह हुनर अपने पिता से सीखा, जो कभी इसी ठेले पर समोसा बेचते थे. आज रमेश उस पारिवारिक परंपरा को आधुनिक व्यावसायिक सोच के साथ आगे बढ़ा रहे हैं. सुबह से शाम तक उनके ठेले पर भीड़ लगी रहती है. रमेश बेहरा का ठेला अब सिर्फ नाश्ते की जगह नहीं, बल्कि स्थानीय ब्रांड बन चुका है.

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Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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