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नई दिल्ली36 मिनट पहले
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एअर इंडिया ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर कटौती का फैसला लिया है। एयरलाइन ने बुधवार को बताया कि जून से अगस्त तक 6 इंटरनेशनल रूट्स की रद्द कर दी है।
इसमें दिल्ली-शिकागो और मुंबई-न्यूयॉर्क जैसे व्यस्त रूट भी शामिल हैं। इसके अलावा 23 इंटरनेशनल रूट्स पर फ्लाइट्स की संख्या घटाई है।
टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी ने बताया कि कुछ देशों के ऊपर से उड़ानों पर लगी पाबंदी और जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों से इन रूटों पर विमान उड़ाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
इन 6 रूटों पर बंद रहेंगी सेवाएं
- दिल्ली-शिकागो (अमेरिका)
- मुंबई-न्यूयॉर्क (अमेरिका)
- दिल्ली-शंघाई (चीन)
- चेन्नई-सिंगापुर
- मुंबई-ढाका (बांग्लादेश)
- दिल्ली-माले (मालदीव)
अमेरिका-ईरान युद्ध और महंगे तेल ने बिगाड़ा गणित
ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण कई देशों ने अपना एयरस्पेस प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे फ्लाइट्स को लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत बढ़ गई है। वहीं, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से विमान ईंधन (ATF) के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। घाटे में चल रही एअर इंडिया के लिए इन महंगे रूट को जारी रखना मुश्किल हो रहा था।
ढाई महीने में कच्चा तेल 45.5% महंगा हुआ
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 28 फरवरी से अब तक 45.5% बढ़ गई हैं। हालांकि, सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में बढ़ोतरी को 25% पर कैप कर दिया था। इसके चलते अप्रैल में तेल कंपनियों (OMCs) ने घरेलू ATF के दाम सिर्फ 9.2% ही बढ़ाए, लेकिन इंटरनेशनल ऑपरेशंस के लिए यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा रही।

एयरलाइंस का फ्यूल खर्च 40% से बढ़कर 60% हुआ
FIA के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सेक्टर में फ्यूल की कीमतों के भारी अंतर ने एयरलाइंस के नेटवर्क को वित्तीय रूप से अस्थिर बना दिया है। पहले एयरलाइंस के कुल ऑपरेशनल खर्च में फ्यूल का हिस्सा 40% होता था, जो बढ़कर 60% तक पहुंच गया है।
हर महीने 1,200 उड़ानें जारी रहेंगी
एअर इंडिया ने बताया कि भारी कटौती के बावजूद, वह हर महीने 1,200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेट करती रहेगी। इनमें ये रूट शामिल हैं:
- नॉर्थ अमेरिका: 33 उड़ानें प्रति सप्ताह।
- यूरोप और यूके: कुल 104 उड़ानें प्रति सप्ताह।
- साउथ ईस्ट एशिया व सार्क देश: 158 उड़ानें प्रति सप्ताह।
- ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका: क्रमशः 8 और 7 उड़ानें प्रति सप्ताह।
टाटा ग्रुप के लिए बड़ी चुनौती
बता दें कि एअर इंडिया ने 31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष में 220 अरब रुपए का रिकॉर्ड घाटा दर्ज किया है। CEO कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे के बाद कंपनी नए नेतृत्व की तलाश में है। यह कटौती उसी कॉस्ट-कटिंग (लागत कटौती) योजना का हिस्सा है, जिसके तहत हाल ही में बड़े अधिकारियों की सैलरी में कटौती और नॉन-टेक्निकल स्टाफ को छुट्टी पर भेजने की चर्चा हुई थी।

घाटा बढ़ने की 3 बड़ी वजहें
मिडिल ईस्ट वॉर: ईरान-इजराइल तनाव के कारण एयर इंडिया को अब पश्चिम के देशों (यूरोप/अमेरिका) के लिए लंबा रूट लेना पड़ता है। इससे उड़ान का समय 1.5 से 2 घंटे बढ़ गया है, जिससे करोड़ों का ईंधन ज्यादा जल रहा है।
इन्वेस्टमेंट: टाटा ग्रुप एयरलाइन को सुधारने के लिए नए विमानों का ऑर्डर दे रहा है और पुराने विमानों के केबिन को पूरी तरह बदल रहा है। इस बड़े निवेश का असर फिलहाल बैलेंस शीट पर घाटे के रूप में दिख रहा है।
ऑपरेशनल कॉस्ट: एयर इंडिया के पास कई पुराने बोइंग विमान हैं जिनके स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस पर काफी खर्च होता है। साथ ही, सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मर्जर की कानूनी प्रक्रियाओं में भी काफी फंड खर्च हो रहा है।
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टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया अपनी लागत घटाने के लिए कर्मचारियों की सैलरी में कटौती और उड़ानों की संख्या करीब 20% कम कर सकती है। वर्तमान में एयरलाइन हर दिन करीब 900 उड़ानों का संचालन करती है।
कंपनी मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण जेट फ्यूल महंगा होने से ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने की वजह से यह कदम उठाने की तैयारी कर रही है। बता दें कि एयरलाइन पहले से ही घाटे में है और अपने नए CEO की तलाश कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…
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डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो पर आया: 1 डॉलर की कीमत 95.74 रुपए हुई, इससे महंगाई बढ़ने का खतरा

रुपया आज 13 मई को डॉलर के मुकाबले 25 पैसे गिरकर 95.75 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 95.50 के ऑल टाइम लो पर पहुंचा था। पिछले कुछ दिनों से रुपए में लगातार गिरावट जारी है।
साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। पूरी खबर पढ़ें…
