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Adam Back Satoshi Nakamoto? NYT AI Identifies Writing Style


वॉशिंगटनकुछ ही क्षण पहले

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दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन को किसने बनाया, यह राज 15 साल बाद भी बरकरार है। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट ने दावा किया कि ब्रिटिश क्रिप्टोग्राफर एडम बैक ही ‘सतोशी नाकामोतो’ हैं। हालांकि, एडम बैक ने इन दावों को खारिज कर दिया है।

AI ने पकड़ी लिखने की स्टाइल

NYT के पत्रकार जॉन कैरीरू ने सतोशी की खोज के लिए AI का सहारा लिया। उन्होंने 1992 से 2008 के बीच क्रिप्टोग्राफी ग्रुप्स में भेजे गए हजारों ईमेल को AI टूल में डाला। AI ने पाया कि सतोशी के लिखने का अंदाज, शब्दों का चयन और व्याकरण की गलतियां एडम बैक से काफी मिलती-जुलती हैं।

उदाहरण के लिए, सतोशी अक्सर कंपाउंड वर्ड्स के बीच हाइफ़न (-) नहीं लगाते थे और कई बार “its” और “it’s” के इस्तेमाल में गलती करते थे। एडम बैक की लिखावट से ये चीजें मेल खाती हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स के जर्नलिस्ट ने कई पैमानों पर सतोशी नाकामोटो और एडम बैक की राइटिंग स्टाइल की जांच की है।

एडम बैक के सतोशी होने की 3 वजहें…

हैशकैश: एडम ने ‘हैशकैश’ बनाया था, जिसका इस्तेमाल सतोशी ने बिटकॉइन की माइनिंग में किया। हैशकैश एक ‘प्रूफ-ऑफ-वर्क’ सिस्टम है, जिसे ईमेल स्पैम रोकने के लिए बनाया गया था। बाद में इस तकनीक का इस्तेमाल क्रिप्टोकरेंसी में हुआ।

ब्लॉकस्ट्रीम: एडम ब्लॉकस्ट्रीम के CEO हैं, जो ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करती है। ब्लॉकचेन ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसमें दर्ज जानकारी कोई अकेला व्यक्ति बदल या मिटा नहीं सकता। यह एक सर्वर के बजाय नेटवर्क के सभी कंप्यूटर्स पर रहती है।

एडम भी मानते हैं कि वह शक के दायरे में सबसे ऊपर हैं। उन्होंने अमेरिकी पत्रकार से बातचीत में कहा कि सतोशी भी उनकी तरह 50 साल के आसपास का ब्रिटिश ‘साइफरपंक’ हो सकता है।

ब्रिटिश क्रिप्टोग्राफर बैक पिछले साल मई में लास वेगास में आयोजित ‘बिटकॉइन 2025’ कॉन्फ्रेंस में पहुंचे थे।

एडम बैक बोले- ‘यह सिर्फ इत्तेफाक है’

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट सामने आने के बाद एडम बैक ने कहा कि AI ने जिन समानताओं को पकड़ा है, वे केवल एक इत्तेफाक हैं। उनके मुताबिक, एक ही फील्ड और रुचि के लोगों की भाषा और शब्द अक्सर एक जैसे हो सकते हैं। उन्होंने बिटकॉइन के निर्माता होने से इनकार किया।

34 हजार लोगों से शुरू हुई जांच, अंत में बचा सिर्फ एक नाम

जॉन कैरीरू ने सतोशी के लिखने के तरीके का विश्लेषण करने के लिए AI टीम के पत्रकार डायलन फ्रीडमैन की मदद ली। कैरीरू का मानना था कि सतोशी उस क्रिप्टोग्राफी कम्युनिटी के सदस्य थे, जो ‘साइफरपंक’, ‘क्रिप्टोग्राफी’ और ‘हैशकैश’ की मेलिंग लिस्ट से जुड़ी थी।

उन्होंने इन तीनों लिस्ट के आर्काइव जुटाने और उन्हें एक बड़े डेटाबेस में मिलाने का फैसला किया ताकि उनमें कुछ भी सर्च किया जा सके। 1992 से 30 अक्टूबर 2008 (सतोशी के सामने आने के एक दिन पहले) के बीच 34,000 से ज्यादा यूजर्स ने इन तीन लिस्ट पर पोस्ट किया था।

स्पैमरर्स को हटाने पर संख्या घटकर 1,615 रह गई

34 हजार में कई स्पैमर्स थे या ऐसे लोग जिन्होंने सिर्फ कुछ ही बार पोस्ट किया था, इसलिए 10 से कम पोस्ट करने वालों को बाहर कर दिया। इससे संभावित नामों की संख्या घटकर 1,615 रह गई।

डिजिटल मनी पर चर्चा नहीं करने वालों को हटाने से 620 लोग बचे

उन लोगों को भी हटा दिया जिन्होंने कभी डिजिटल मनी पर चर्चा नहीं की थी। इसके बाद 620 उम्मीदवारों का एक छोटा ग्रुप बचा। इन 620 लोगों ने मिलकर कुल 134,308 पोस्ट लिखे थे।

पर्यायवाची सब्दों की जांच में एडम बैक सबसे ऊपर आए

अब सतोशी के लिखे हुए टेक्स्ट में उन शब्दों की पहचान की गई जिनका कोई पर्यायवाची नहीं है। यह मापा गया कि 620 संदिग्धों में से किसने उन शब्दों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया है।

इसमें एडम बैक सबसे ऊपर आए, जिनके 521 ‘बिना पर्यायवाची’ वाले शब्द सतोशी से मेल खाते थे। कुछ अन्य लोग भी थे, लेकिन उन सभी ने बैक की तुलना में बहुत ज्यादा पोस्ट लिखे थे।

पुख्ता सबूतों की तलाश में दो और तरीके अपनाए गए…

1. हाइफन के इस्तेमाल की जांच में भी बैक टॉप पर रहे

सबसे पहले सतोशी की ग्रामर, खासकर हाइफन (-) के गलत इस्तेमाल की बारीकी से जांच की गई। इसमें सतोशी द्वारा हाइफन के इस्तेमाल में की गई 325 अलग-अलग गलतियों की पहचान हुई।

इन गलतियों की तुलना संदिग्धों के लेखन से की तो बैक की 67 हाइफन की गलतियां सतोशी की गलतियों से हूबहू मेल खाती थीं। दूसरे नंबर पर आने वाले व्यक्ति की 38 गलतियां ही मेल खाईं।

2. लिखने के अंदाज की जांच में भी बैक टॉप पर रहे

620 संदिग्धों पर वापस लौटते हुए जांच की गई कि कितनों के लिखने का अंदाज सतोशी जैसा है। सतोशी की तरह वाक्यों के बीच दो स्पेस देने की जांच के बाद 562 संदिग्ध बचे।

  • ब्रिटिश स्पेलिंग इस्तेमाल करने वालों को छांटा तो लिस्ट घटकर 434 रह गई।
  • “it’s” और “its” के बीच भ्रमित होने वाले लोगों को फिल्टर करने से 114 लोग बचे।
  • वाक्यों को “also” के साथ खत्म करने वालों को छोंटने से संख्या घटकर 56 रह गई।
  • “bug fix”, “halfway” और “downside” जैसे शब्दों की जांच के बाद 20 लोग बचे।
  • noun-based, file-sharing, double spending जैसे शब्दों की जांच के बाद 8 लोग बचे।

आखिरी जांच में सिर्फ एक नाम बचा एडम बैक

सतोशी की खास आदत थी- वे कभी “email” लिखते थे तो कभी “e-mail”, कभी ब्रिटिश स्पेलिंग “cheque” तो कभी अमेरिकी “check”। इस फिल्टर के बाद अंत में सिर्फ एक नाम बचा एडम बैक।

2008 से ही सतोशी नाकामोतो की खोज की जा रही

बिटकॉइन के जनक ने 2008 में ‘सतोशी नाकामोतो’ नाम से बिटकॉइन का व्हाइटपेपर जारी किया था। उन्होंने दुनिया को पहली क्रिप्टोकरेंसी दी, लेकिन खुद कभी सामने नहीं आए।

अगर न्यूयॉर्क टाइम्स की थ्योरी सही है, तो एक ब्रिटिश नागरिक का जापानी नाम इस्तेमाल करना अब भी एक सवाल बना हुआ है। कैरीरू की जांच भले ही किसी ठोस सबूत के साथ खत्म न हुई हो, लेकिन AI के जरिए सतोशी को खोजने के उनके तरीके कि टेक जगत में चर्चा हो रही है।

हंगरी में बुडापेस्ट के ग्राफिसॉफ्ट पार्क में सतोशी नाकामोतो की एक मूर्ति लगी है। ये मूर्ति उस अनजान शख्स को सम्मान देने के लिए है, जिसने बिटकॉइन और इसके पीछे की ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी बनाई।

नॉलेज पार्ट: क्या है साइफरपंक और सतोशी नाकामोतो?

  • सतोशी नाकामोतो: यह एक छद्म नाम है जिसका इस्तेमाल बिटकॉइन के निर्माता ने किया था। आज तक दुनिया को नहीं पता कि यह एक व्यक्ति है या ग्रुप।
  • साइफरपंक: यह उन लोगों का समूह है जो प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफी (कोडिंग) का इस्तेमाल करते हैं। बिटकॉइन इसी विचारधारा की उपज है।
  • बिटकॉइन: बिटकॉइन एक डिजिटल कोड है जो डिजिटल वॉलेट में रहता है। बिटकॉइन को इंटरनेट के जरिए दुनिया में कहीं भी भेज सकते हैं। इसकी कुल संख्या 21 मिलियन है।
  • बिटकॉइन माइनिंग: यह वह प्रक्रिया है जिससे नए बिटकॉइन बनाए जाते हैं और लेन-देन को वैरिफाई किया जाता है। इसमें भारी कंप्यूटिंग पावर का उपयोग होता है।
  • एक्सपर्ट कमेंट: बिटकॉइन की सफलता ही इस बात में छिपी है कि उसका निर्माता अज्ञात है। अगर सतोशी की पहचान उजागर होती है, तो इसका असर मार्केट की स्थिरता पर पड़ सकता है।

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