नई दिल्ली36 मिनट पहले
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एअर इंडिया ने घरेलू उड़ानों के लिए फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है। इससे हवाई सफर महंगा हो जाएगा। ग्लोबल मार्केट में विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में आई तेजी के बाद एयरलाइन ने यह फैसला लिया है। नई दरें कल यानी 8 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी।
एयरलाइन के मुताबिक, जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी होने से लागत बढ़ गई है। विमान ईंधन की औसत कीमत 195.19 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो फरवरी के अंत में 99.40 डॉलर थी। इससे पहले इंडिगो ने भी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया था।
एयरलाइंस का फ्यूल सरचार्ज टिकट पर लगने वाली वह एक्स्ट्रा फीस है, जो तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण वसूली जाती है। यह चार्ज एयरलाइंस को ईंधन के बढ़ते खर्चों से निपटने में मदद करता है। इसे कंपनियां टिकट के साथ जोड़ देती हैं।
घरेलू रूट्स पर दूरी के हिसाब से लगेगा सरचार्ज
एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों के लिए एक फ्लैट सरचार्ज व्यवस्था को खत्म कर दिया है। अब यात्रियों को दूरी के आधार पर पैसे देने होंगे।
सरचार्ज 299 रुपए से शुरू होकर 899 रुपए तक जाएगा। यह नियम एयर इंडिया के साथ-साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस पर भी लागू होगा।
इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर 280 डॉलर तक बढ़ोतरी
विदेशी रूट्स पर भी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया गया है। सार्क देशों के लिए यह चार्ज 24 डॉलर से शुरू होगा। वहीं, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के रूट्स के लिए यात्रियों को 280 डॉलर यानी करीब ₹23,000 ज्यादा चुकाने होंगे।
दूसरे देशों के लिए सरचार्ज की स्थिति
- सिंगापुर: 60 डॉलर
- पश्चिम एशिया: 50 डॉलर
- साउथ ईस्ट एशिया: 100 डॉलर
- अफ्रीका: 130 डॉलर
- यूरोप और यूके: 205 डॉलर
एयरलाइन बोली- हम पूरा बोझ यात्रियों पर नहीं डाल रहे
कंपनी का कहना है कि विमान ईंधन की लागत सिर्फ कच्चे तेल की वजह से नहीं, बल्कि रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने के कारण भी बढ़ी है। एयरलाइन ने कहा कि कंपनी अभी भी इस बोझ का एक हिस्सा खुद वहन कर रही है। पूरा बोझ यात्रियों पर नहीं डाल रहे हैं। एयरलाइन बाजार की स्थितियों के आधार पर समय-समय पर इन दरों की समीक्षा करेगी।
एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च है जेट फ्यूल
जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के चलते दुनियाभर की एयरलाइंस ने न सिर्फ टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों यानी फाइनेंशियल आउटलुक को भी वापस लिया है। एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है।