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Govt Denies Petrol-Diesel Price Hike; Kotak Report Claims Post-Poll Rise


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नई दिल्ली9 घंटे पहले

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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹25-28 प्रति लीटर बढ़ोतरी की खबरों को सरकार ने गलत बताया है। आज यानी 23 अप्रैल को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने कहा कि दाम बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ये खबरें भ्रामक हैं और डर फैलाने के लिए फैलाई जा रही हैं।

एक दिन पहले कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। यह अनुमान क्रूड ऑयल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर आधारित था।

तेल कंपनियों को हर महीने ₹27,000 करोड़ का घाटा

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपए का नुकसान झेल रही हैं। कच्चे तेल की खरीद और पेट्रोल-डीजल की बिक्री के बीच बढ़ते अंतर के कारण कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों को बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

भारत में पिछले 4 साल से नहीं बढ़े दाम

सरकारी बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा बड़ा देश है, जहां पिछले 4 साल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में घरेलू कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

अगर बढ़ोतरी होती तो क्या होता?

पेट्रोल

शहर अभी पेट्रोल (₹) ₹25 बढ़ने पर ₹28 बढ़ने पर
नई दिल्ली 94.77 119.77 122.77
मुंबई 103.50 128.50 131.50
चेन्नई 100.80 125.80 128.80
कोलकाता 105.41 130.41 133.41
बेंगलुरु 102.92 127.92 130.92
हैदराबाद 107.46 132.46 135.46

डीजल

शहर अभी डीजल (₹) ₹25 बढ़ने पर ₹28 बढ़ने पर
नई दिल्ली 87.67 112.67 115.67
मुंबई 90.03 115.03 118.03
चेन्नई 92.39 117.39 120.39
कोलकाता 92.02 117.02 120.02
बेंगलुरु 90.99 115.99 118.99
हैदराबाद 95.70 120.70 123.70

आम जनता की जेब पर सीधा असर

ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता। अगर दाम बढ़ेंगे तो माल ढुलाई महंगी होगी। इससे फल, सब्जी और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ जाएंगे। ऑटो सेक्टर और ग्रामीण बाजारों में डिमांड पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव से बढ़ा क्रूड ऑयल

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव है। तनाव की वजह से ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे प्रमुख तेल रूट को बंद कर दिया है। इससे सप्लाई कम हो गई है। मार्च और अप्रैल में भारत का कच्चे तेल का आयात 13-15% गिरा है, फिर भी आयात बिल में रोजाना करीब 1800 से 2000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

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