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33 मिनट पहले
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दिवंगत एक्टर राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को शादी के रूप में मान्यता देने की मांग की थी।
जस्टिस शर्मिला देशमुख ने दिंडोशी कोर्ट के पुराने फैसले को बरकरार रखते हुए यह आदेश सुनाया। इस फैसले के साथ ही राजेश खन्ना के परिवार यानी डिंपल कपाड़िया, अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना को कानूनी राहत मिली है।
दरअसल अनीता आडवाणी ने सार्वजनिक तौर पर दावा किया था कि वह पिछले कई सालों तक एक्टर की साथी रहीं थी। उन्होंने संपत्ति में हिस्सेदारी और रहने के लिए घर की मांग की थी।
दिंडोशी कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती अनीता आडवाणी ने दिंडोशी की एक सिविल कोर्ट के 2017 के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। उस समय दिंडोशी कोर्ट ने तकनीकी आधार पर अनीता के सिविल सूट को खारिज कर दिया था।
बुधवार को हाई कोर्ट ने अनीता के वकील और डिंपल कपाड़िया व अक्षय कुमार के वकीलों की लंबी दलीलें सुनने के बाद कहा कि पहली अपील को खारिज किया जाता है।
2012 से चल रही है कानूनी लड़ाई राजेश खन्ना के निधन के बाद साल 2012 से ही अनीता आडवाणी और खन्ना परिवार के बीच कई अदालती मामले चल रहे हैं। अनीता ने दावा किया था कि वह सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ उनके बांद्रा स्थित बंगले ‘आशीर्वाद’ में लिव-इन रिलेशनशिप में थीं।
उन्होंने डिंपल कपाड़िया, अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस भी दर्ज कराया था। अनीता का आरोप था कि राजेश खन्ना की मौत के बाद उन्हें बंगले से जबरन बाहर निकाल दिया गया था।
कोर्ट ने कहा था- यह रिश्ता शादी जैसा नहीं इससे पहले साल 2015 में भी बॉम्बे हाई कोर्ट ने डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के खिलाफ चल रही घरेलू हिंसा की कार्यवाही को रद्द कर दिया था। तब कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि अनीता आडवाणी और राजेश खन्ना का रिश्ता घरेलू हिंसा कानून, 2005 के तहत ‘शादी की प्रकृति’ वाला नहीं था। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर अब उनकी शादी की मान्यता वाली अपील भी खारिज हो गई है।
बंगले ‘आशीर्वाद’ से शुरू हुआ विवाद राजेश खन्ना का निधन जुलाई 2012 में हुआ था। उनकी मौत के तुरंत बाद अनीता आडवाणी ने सार्वजनिक तौर पर दावा किया था कि वह पिछले कई सालों से एक्टर की साथी रही हैं। उन्होंने संपत्ति में हिस्सेदारी और रहने के लिए घर की मांग की थी।
हालांकि, खन्ना परिवार ने हमेशा इन दावों को नकारा। विवादों के केंद्र में रहा बंगला ‘आशीर्वाद’ बाद में बेच दिया गया था, लेकिन कानूनी लड़ाई पिछले 14 सालों से जारी थी।
