painkiller side effects | kidney health risk from painkillers | पेनकिलर के नुकसान | दर्द का आयुर्वेदिक इलाज |

painkiller side effects | kidney health risk from painkillers | पेनकिलर के नुकसान | दर्द का आयुर्वेदिक इलाज |


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Painkiller Side Effects: क्या आप भी सिरदर्द या बदन दर्द होने पर तुरंत पेनकिलर खा लेते हैं? तो रूक जाइए, पीलीभीत के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टरी सलाह के ली जाने वाली ये दवाएं आपकी किडनी को हमेशा के लिए डैमेज कर सकती हैं. ‘शॉर्टकट’ राहत का ये चक्कर आपको डायलिसिस की दहलीज पर खड़े कर सजता है. जानिए कैसे आयुर्वेद के प्राचीन नुस्खे जैसे हल्दी, गिलोय और गुग्गुल, बिना किसी साइड इफेक्ट के आपके पुराने से पुराने दर्द को जड़ से खत्म कर सकते हैं और आपकी किडनी को सुरक्षित रख सकते हैं.

पीलीभीत: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मामूली दर्द होने पर भी लोग तुरंत राहत पाने के लिए पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं. खासकर युवाओं में यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है. लेकिन बिना डॉक्टरी परामर्श के बार-बार ली जाने वाली ये दवाएं आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, खास तौर पर किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. पीलीभीत के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे ने पेनकिलर्स के अत्यधिक उपयोग के बजाय आयुर्वेद वाले सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह दी है.

किडनी पर पड़ता है बुरा असर
डॉ. आदित्य पांडे के मुताबिक, पेनकिलर्स को तकनीकी भाषा में ‘NSAIDs’ कहा जाता है और इनका सबसे घातक प्रभाव किडनी पर पड़ता है. लंबे समय तक या आदत के तौर पर पेनकिलर्स लेने से किडनी के ग्लोमेरुलो नेफ्रॉन्स धीरे-धीरे डैमेज होने लगते हैं. इससे किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है और स्टोनिंग या ब्लैडर खाली होने में दिक्कत जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. गंभीर मामलों में पेशाब के साथ खून आने की समस्या भी आम हो जाती है. इसलिए, किसी भी दवा का सेवन केवल चिकित्सक की अनुमति से ही करना चाहिए.

आयुर्वेद में दर्द निवारण के सुरक्षित विकल्प
डॉ. पांडे बताते हैं कि आयुर्वेद एक प्राचीन विज्ञान है, जिसमें दर्द निवारण के कई प्रभावी तरीके मौजूद हैं. हालांकि आयुर्वेद से राहत मिलने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन यह शरीर के अन्य अंगों को सुरक्षित रखता है. अकरकरा का काढ़ा और गिलोय का सेवन दर्द और सूजन को कम करने में काफी मददगार होता है. इसके अलावा, हल्दी एक प्राकृतिक हीलर है. चोट लगने या आंतरिक दर्द की स्थिति में गर्म दूध में हल्दी डालकर पी सकते है, जो सूजन और दर्द को तेजी से कम करती है.

पुरानी सूजन और दर्द के लिए गुग्गुल का इस्तेमाल
आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के गुग्गुल जैसे कैशोर गुग्गुल और महायोगराज गुग्गुल का उल्लेख है, जो शरीर की पुरानी सूजन और दर्द को जड़ से खत्म करने में सक्षम हैं. वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे का मानना है कि दवाओं के चयन में सावधानी बरतना ही जीवन की सुरक्षा है. पेनकिलर्स की जगह जीवनशैली में सुधार और आयुर्वेद के प्राकृतिक नुस्खों को अपनाकर हम अपनी किडनी और अन्य अंगों को भविष्य के खतरों से बचा सकते हैं. थोड़ी सी राहत के लिए किया गया शॉर्टकट जीवन पर भारी पड़ सकता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



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