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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय चेयरमेन देश भर के पेरेंट्स से अपनी बेटियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाने की अपील की है. डॉ. दिलीप कुमार आचार्य ने कहा कि वे अपनी 14-15 वर्ष की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए टीका जरूर लगवाएं.
देशभर में 14 से 15 साल की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर की एचपीवी वैक्सीन लगाई जा रही है.
Cervical Cancer HPV Vaccine news: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन में कैंसर रोकथाम एवं तंबाकू नियंत्रण समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. दिलीप कुमार आचार्य ने स्वास्थ्य मंत्रालय के फैसले को बेहतरीन बताते हुए देश भर के अभिभावकों से भावुक अपील की है. उन्होंने सभी पेरेंट्स से कहा कि बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए चलाई जा रही इस वैक्सीनेशन ड्राइव का फायदा उठाएं और अपनी बेटियों को आसपस के उन सेंटरों पर जरूर ले जाएं जहां एचपीवी वैक्सीन लग रही है.
स्वास्थ्य मंत्रालय देशभर में 14 वर्ष की आयु से लेकर 15 वर्ष की आयु तक की सभी लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण लगवा रहा है. इस पहल में करीब 1.15 करोड़ पात्र लड़कियों को निःशुल्क सर्वाइकल कैंसर का टीका लगाया जा रहा है. डॉ. आचार्य ने कहा कि दूरदर्शी कदम, महिला स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर है.आईएमए राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे नायक और महासचिव डॉ. सरबरी दत्ता ने भी इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर धन्यवाद दिया है.
- 87 हजार महिलाओं की ले लेता है जान
डॉ. आचार्य ने पेरेंट्स से अपील करते हुए कहा कि सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिससे हर साल लगभग 87,000 लोगों की मृत्यु होती है और लगभग 1.39 लाख महिलाएं प्रभावित होती हैं. एचपीवी वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करके, भारत इस रोकथाम योग्य बीमारी को खत्म करने के वैश्विक मिशन में 160 से अधिक देशों के साथ जुड़ गया है. - 90 फीसदी हो जाएगी सुरक्षा
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है और इसके खिलाफ वैक्सीनेशन भविष्य में सर्वाइकल कैंसर होने से लगभग 80-90% तक बचा सकता है. जिन देशों में सर्वाइकल कैंसर का टीका लगाया जा रहा है, वहां इस कैंसर के मामलों में कमी आई है. - 14 साल में ही क्यों लग रहा टीका
डॉ. आचार्य ने आगे कहा कि एचपीवी वैक्सीन, एचपीवी के उन प्रकारों को रोकने में अत्यधिक प्रभावी है जो सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार हैं. 14 वर्ष की उम्र में वायरस के संभावित संपर्क में आने से पहले लड़कियों का टीकाकरण करने से सबसे मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया सुनिश्चित होती है. इस टीके का सुरक्षा रिकॉर्ड सिद्ध हो चुका है और इसे 2006 से विश्व स्तर पर दिया जा रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिशों के अनुरूप, भारत की एकल-खुराक वाली टीकाकरण प्रणाली परिवारों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाती है और साथ ही मजबूत सुरक्षा भी प्रदान करती है.
उन्होंने कहा कि सभी पात्र 14 वर्ष की या निर्धारित 90 दिनों के भीतर 15 वर्ष की होने वाली लड़कियों के सभी अभिभावकों और संरक्षकों से विनम्र निवेदन करते हैं कि वे अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर अपनी बेटियों को टीका लगवाएं. यह पहल हमारी बेटियों के लिए एक सुरक्षा कवच है, जो भारतीय महिलाओं की आने वाली पीढ़ी के लिए सर्वाइकल कैंसर मुक्त भविष्य सुनिश्चित करती है.
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प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीनियर हेल्थ रिपोर्टर काम कर रही हैं. इन्हें पिछले 14 साल से फील्ड में रिर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्त है. इससे पहले ये हिंदुस्तान दिल्ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें

