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Liver Damage Sign: लिवर में प्रॉब्लम का संकेत आंखों में भी नजर आ सकते हैं. इसलिए शरीर में दिखने वाले ऐसे बदलावों को हल्के में नहीं लेना चाहिए. अगर बीमारी का पता शुरुआत में चल जाए, तो इलाज आसान हो जाता है और गंभीर परेशानी से बचा जा सकता है.
आजकल की खराब जीवनशैली, गलत खानपान और बढ़ते तनाव की वजह से लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. पहले यह समस्या अधिकतर बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं. लिवर हमारे शरीर का बहुत महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने और भोजन को पचाने में मदद करता है. इसलिए इसका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है.
लिवर की बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती समय में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. यही कारण है कि डॉक्टर समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराने और लिवर फंक्शन टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं. अगर बीमारी का पता शुरुआत में चल जाए, तो इलाज आसान हो जाता है और गंभीर परेशानी से बचा जा सकता है.
लिवर डैमेज के शुरुआती संकेत
हमारा शरीर लिवर खराब होने के संकेत पहले से देने लगता है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण संकेत आंखों से जुड़ा होता है. अगर आंखों का सफेद हिस्सा पीला दिखाई देने लगे, तो इसे सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ बढ़ने का संकेत हो सकता है.
बिलीरुबिन तब बनता है जब शरीर में पुरानी लाल रक्त कोशिकाएं टूटती हैं. सामान्य स्थिति में लिवर इस पदार्थ को फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देता है. लेकिन जब लिवर सही तरीके से काम नहीं करता, तो बिलीरुबिन शरीर में जमा होने लगता है. इसका असर सबसे पहले आंखों में दिखाई देता है और आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ने लगता है.
डॉक्टरों के अनुसार, आंखों में पीलापन कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है. इनमें पीलिया, हेपेटाइटिस, फैटी लिवर और लिवर इंफेक्शन जैसी समस्याएं शामिल हैं. अगर आंखों के साथ त्वचा भी पीली पड़ने लगे, पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाए और लगातार कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सही खानपान और अच्छी जीवनशैली बेहद जरूरी है. रोजाना हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर भोजन खाने से लिवर मजबूत रहता है. वहीं, ज्यादा तला-भुना खाना, मीठी चीजें, पैकेट वाला प्रोसेस्ड फूड और शराब लिवर पर बुरा असर डालते हैं. इससे फैटी लिवर और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
शरीर का वजन नियंत्रित रखना भी जरूरी है. मोटापा नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का बड़ा कारण माना जाता है. इसलिए नियमित व्यायाम करना और एक्टिव रहना लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद होता है.
इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि इससे शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलने में मदद मिलती है. डॉक्टर हेपेटाइटिस ए और बी के टीके लगवाने की भी सलाह देते हैं, ताकि लिवर संक्रमण से बचाव हो सके.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
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