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Tumba Health Benefits: रेगिस्तानी इलाकों में उगने वाला तुंबा दिखने में साधारण लेकिन औषधीय गुणों से भरपूर फल माना जाता है. इसे इंद्रायण या कड़वा कद्दू भी कहा जाता है. आयुर्वेद के अनुसार तुंबा में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं. इसके फल, बीज और जड़ का उपयोग पाचन तंत्र सुधारने, कब्ज दूर करने और त्वचा रोगों के उपचार में किया जाता है. इसके अलावा जोड़ों के दर्द, सूजन और श्वसन संबंधी समस्याओं में भी इसका उपयोग लाभकारी माना जाता है.
प्रकृति में ऐसे कई पेड़-पौधे पाए जाते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं. इन्हीं में से एक औषधीय गुणों से भरपूर फल है तुंबा, जिसे कई जगहों पर इंद्रायण या कड़वा कद्दू भी कहा जाता है. यह पौधा मुख्य रूप से राजस्थान के रेगिस्तानी और सूखे क्षेत्रों में पाया जाता है. यहां पौधा बेल की तरह फैलता है. इसका फल छोटा, गोल और बहुत कड़वा होता है, लेकिन इसके औषधीय गुण इतने प्रभावी हैं कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसका लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है.
तुंबा का पौधा अक्सर खेतों या खुले स्थानों में खरपतवार की तरह उग जाता है, लेकिन इसके गुण इसे बेहद खास बनाते हैं. आयुर्वेद में इसके फल, बीज और जड़ का उपयोग कई प्रकार की औषधियां बनाने में किया जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नरेंद्र कुमार के अनुसार, यह पौधा पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, बुखार कम करने और त्वचा रोगों के उपचार में सहायक माना जाता है. इसका स्वाद अत्यधिक कड़वा होने के कारण इसे सीधे खाने के बजाय औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है.
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि तुंबा में प्राकृतिक रेचक (लैक्सेटिव) गुण पाए जाते हैं, जो कब्ज की समस्या दूर करने में मदद करते हैं. इसके उपयोग से पेट साफ रहता है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. यह गैस, एसिडिटी और पेट में भारीपन जैसी समस्याओं में भी इसका उपयोग लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा तुंबा का प्रयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने में भी किया जाता है, जिससे पाचन संबंधी कई समस्याओं से राहत मिल सकती है.
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आयुर्वेद के अनुसार, तुंबा का रस और इसका पेस्ट त्वचा संबंधी कई समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. खुजली, एक्जिमा, फोड़े-फुंसी और त्वचा की जलन जैसी समस्याओं में इसका लेप लगाने से आराम मिल सकता है. इसके अलावा तुंबा के तेल या चूर्ण का लेप जोड़ों के दर्द, कमर दर्द और मांसपेशियों की ऐंठन में भी राहत देने में सहायक माना जाता है. आयुर्वेद में इसके बीज और फल के चूर्ण का उपयोग कई त्वचा रोगों के उपचार में किया जाता है.
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि तुंबा में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते है. इसका उपयोग बुखार कम करने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए भी किया जाता है. इसके सेवन से रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है. इसके अलावा इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक माने जाते हैं.
तुंबा के सूखे फल का उपयोग कुछ जगहों पर दमा या श्वसन संबंधी समस्याओं में भी किया जाता है. इसकी जड़ की दातून दांतों के दर्द और मसूड़ों से खून आने की समस्या में लाभकारी मानी जाती है. हालांकि इसका स्वाद अत्यधिक कड़वा होता है लेकिन यह मानव स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता है. सूखे हुए क्षेत्र में हीरे से भी अनमोल औषधि का उगना किसी चमत्कार से कम नहीं है.

