घर की दीवारें जब गंदी हो जाती हैं या लगा हुआ पेंट पूरी तरह से झड़ जाता है, तो आप उसे वॉइट वॉश कराते हैं. अपनी पसंद के रंग वाले डिस्टेंपर से रंगवाते हैं. काफी लोग दीपावली के मौके पर घरों में पेंट करवाते हैं, ताकि घर साफ-सुथरा दिखे. आपने गौर किया होगा कि जब आपके घर में दीवारों पर पेंट लगाया जाता है तो उसमें से एक स्मेल निकलती है. काफी लोगों को पेंट से निकलने वाली फ्रेश स्मेल पसंद आती है. लेकिन, क्या ये गंध आपकी सेहत के लिए हेल्दी होती है? घर के वातावरण में फैले ये हार्श केमिकल युक्त स्मेल आपकी सेहत को किस तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं, जानिए यहां…
घर में पेंट कराने से क्या होता है सेहत पर नुकसान?
टीओआई में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इन पेंट्स में मौजूद कम्पाउंड से किसी-किसी व्यक्ति को गले में खराश, खांसी, इर्रिटेशन, सीने में जकड़न आदि जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. दरअसल, पेंट से वोलटाइल ऑर्गैनिक कम्पाउंड (Voc) निकलते हैं, जो घर के वातावरण में फैल जाते हैं.
दरअसल, ये वीओसी एक तरह के केमिकल्स होते हैं, जो कमरे के तापमान पर आसानी से हवा में वाष्पित हो जाते हैं. थिनर्स, वार्निश, पेंट्स, वार्निश या कई तरह के सफाई करने वाली लिक्विड चीजों में भी मौजूद होते हैं. ये कम्पाउंड जब पेंट करने पर रिलीज होते हैं तो रेस्पिरेटरी ट्रैक की सहत पर खुजली पैदा करती हैं. जब आप उसी स्थान पर रहते हैं तो सांस के जरिए ये अंदर जाते हैं और ब्रोनकियल ट्यूब्स में सूजन पैद कर देते हैं. बलगम का निर्माण भी बढ़ा सकते हैं. वायुमार्ग सूज कर संकरे हो जाते हैं.
रेस्पिरेटरी सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान?
टीओआई के अनुसार, वीओसी जैसे बेंजीन, फॉर्मल्डेहाइड आदि कुछ ऐसे केमिकल्स हैं, जो कई बार रेस्पिरेटरी सिस्टम को इर्रिटेट कर सकते हैं, जिससे ब्रोन्कियल लाइनिंग में इंफ्लेमेशन हो सकता है. बलगम अधिक बनने लगता है. हालांकि, ऐसा उस वातावरण में लगातार रहने से हो सकता है. उन लोगों को पेंट होते समय वहां से दूर रहना चाहिए, जो इस तरह के पेंट से निकलने वाली स्मेल के प्रति संवेदनशील होते हैं.
कुछ लोगों को इस तरह की स्मेल से बार-बार छींकें आनी शुरू हो जाती है. गले में खराश महसूस होता है. सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है. ये सब एक घंटे के अंदर ही शुरू हो सकता है. अगर आप हेल्दी हैं तो ये उतना नुकसान नहीं पहुंचाता है, लेकिन बार-बार VOC के कॉन्टैक्ट में आने से श्वसन मार्ग की संवेदनशीलता ट्रिगर हो सकती है.
जब भी आपके घर में पेंट हो, तो बुजुर्गों, बच्चों, धूम्रपाण करने वाले, सीओपीडी, अस्थमा या अन्य सांस संबंधित कोई समस्या से ग्रस्त लोगों को दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये हाई रिस्क में होते हैं.
इस तरह की समस्या काफी देर तक बनी रहे तो डॉक्टर से जरूर दिखाएं. कुछ टेस्ट जैसे पल्मनरी फंक्शन टेस्ट, लंग फंक्शन टेस्ट आदि एक्सपर्ट कराने की सलाह देते हैं.
किन बातों का रखें ख्याल
-जब आपके घर में पेंट हो रहा हो तो प्रॉपर वेंटिलेशन का ध्यान रखें. घर की खिड़कियां खोलकर रखें. एग्जॉस्ट फैन भी ऑन करके रख सकते हैं. इससे कमरे, हॉल में रिलीज हुए पेंट के कम्पाउंड्स बाहर निकल सकते हैं.
-ऐसा भी नहीं है कि आप अब अपने घर में वॉइट वॉश, पेंटिंग कराने का काम ना कराएं, बस कुछ सावधानियां बरत कर इसके साइड एफेक्ट्स से बचा जा सकता है. आप बिना वीओसी या कम वीओसी वाले पेंट का इस्तेमाल करें.
-जब भी पेंट करवाएं तो प्रॉपर वेंटिलेशन का ध्यान रखें. जिस कमरे या घर के जिस भी भाग में फ्रेश पेंट करवाया है, वहां बिल्कुल भी देर तक न रहें.
-पेंट जब हो तो आप एक्स्ट्रा सेफ्टी के लिए मास्क भी पहन सकते हैं. आप चाहें तो पानी में घुलने वाले पेंट का इस्तेमाल करें. इनमें ऑयल-बेस्ड पेंट की तुलना में कम वीओसी निकलते हैं. कमरे में पेंट कराने के बाद कम से कम दो से तीन दिनों तक हवा का आवागमन होने दें, उसके बाद ही कमरे का इस्तेमाल करें. आप चाहें तो एयर प्यूरिफायर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

