Site icon Aaj Ki Baat

क्या ज्यादा गर्मी से रुक सकता है बच्चों का लंबाई बढ़ना? जानिए इसके 6 लक्षण, डिहाइड्रेशन से बिगड़ रही हालत

क्या ज्यादा गर्मी से रुक सकता है बच्चों का लंबाई बढ़ना? जानिए इसके 6 लक्षण, डिहाइड्रेशन से बिगड़ रही हालत


Last Updated:

Child care tips : भीषण गर्मी से लोगों का जीना दुश्वर हो रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों और बच्चों को है. जिन बच्चों को पहले से पेट संबंधी बीमारी है, उनमें गर्मी के मौसम में लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं. भीषण गर्मी के बीच बच्चों में तेजी से बढ़ रहे इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज ने चिंता बढ़ा दी है. लोकल 18 से अंबाला की होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता बताती हैं कि IBD एक दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें पाचन तंत्र के अंदर लगातार सूजन बनी रहती है. गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन की वजह से ऐसे बच्चों की स्थिति और खराब हो सकती है.

अंबाला. भीषण गर्मी के बीच बच्चों में तेजी से बढ़ रहे इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (IBD) ने डॉक्टरों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. तापमान लगातार बढ़ने और लू जैसे हालात बनने से बच्चों में डिहाइड्रेशन, पेट संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा काफी बढ़ गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बच्चों को पहले से पेट संबंधी बीमारी है, उनमें गर्मी के मौसम में लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं. इसी को देखते हुए डॉक्टरों ने अभिभावकों को बच्चों के खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है. अंबाला सहित आसपास के क्षेत्रों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. ऐसे मौसम में शरीर में पानी की कमी तेजी से होती है, जिसका सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ता है.

रुक जाएगी शारीरिक वृद्धि

लोकल 18 से अंबाला नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता बताती हैं कि IBD एक दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें पाचन तंत्र के अंदर लगातार सूजन बनी रहती है. इसके दो प्रमुख प्रकार हैं — जिसमें Crohn’s disease और Ulcerative colitis शामिल है. बच्चों में यह बीमारी अक्सर गंभीर रूप में सामने आती है. इसके मुख्य लक्षणों में लगातार पेट दर्द, बार-बार दस्त होना, मल में खून आना, अत्यधिक कमजोरी, भूख कम लगना और तेजी से वजन घटना शामिल हैं. कई मामलों में बच्चों की शारीरिक वृद्धि भी प्रभावित होती है और लंबाई बढ़ना रुक सकता है. कुछ बच्चों में यौवन विकास में देरी भी देखी जाती है.

डॉ. रजिता के अनुसार गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन की वजह से बच्चों की स्थिति और खराब हो सकती है, इसलिए बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, ओआरएस और ताजे तरल पदार्थ देना बेहद जरूरी है. बाहर का अस्वच्छ और मसालेदार खाना खाने से रोकें. IBD के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर इलाज शुरू होने से बच्चों में कुपोषण और विकास रुकने जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है.

सबसे पहले करें ये काम

डॉ. रजिता कहती हैं कि बचाव के तौर पर माता-पिता बच्चों को जंक फूड देना सबसे पहले बंद करें. इसके कारण ही यह बीमारी बच्चों में अपना संक्रमण फैलाती है. हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा करें. अगर किसी बच्चे को लूज मोशन या पेट में भारीपन लग रहा है तो वह खिचड़ी का सेवन कर सकते हैं, क्योंकि यह होम्योपैथिक विधि में काफी फायदेमंद माना गया है. रात के समय हल्का भोजना करें. सुबह पेट भरकर खाना खाकर बच्चों को स्कूल जाना चाहिए. दोपहर के समय दही और छाछ का प्रयोग भी खाने के साथ करें. रात को जब भी खाने खाएं, तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए. होम्योपैथिक पइसे नुकसानदायक माना गया है. खाना खाने के आधा घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए.

About the Author

Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



Source link

Exit mobile version