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क्या है टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज, ये कितनी खतरनाक, अधिकतर लोग इस बारे में जानते ही नहीं !

क्या है टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज, ये कितनी खतरनाक, अधिकतर लोग इस बारे में जानते ही नहीं !


All About Type 3 and 4 Diabetes: डायबिटीज एक क्रोनिक डिजीज है, जिससे दुनियाभर में करोड़ों लोग जूझ रहे हैं. अक्सर टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज की चर्चा होती है. टाइप 1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन नहीं बना पाता है और टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है. इन दोनों ही कंडीशन में ब्लड शुगर लेवल अनकंट्रोल होने लगता है. टाइप 2 डायबिटीज को लाइफस्टाइल डिजीज भी माना जाता है. अधिकतर लोग इन दोनों डायबिटीज के बारे में जानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज के बारे में सुना है? अगर आपने इन दोनों बीमारियों के बारे में नहीं सुना है, तो आज आपको इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं. इन दोनों परेशानियों के बारे में जानना भी बेहद जरूरी है.

क्या है टाइप 3 डायबिटीज?

सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक टाइप 3 डायबिटीज एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल अल्जाइमर डिजीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध बताने के लिए किया जाता है. जब हमारे ब्रेन की सेल्स इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो ब्रेन को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती है. इंसुलिन न केवल ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, बल्कि यह ब्रेन की कोशिकाओं के बीच कम्युनिकेशन और याददाश्त के लिए भी जरूरी है. जब ब्रेन में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है, तो वहां हानिकारक प्रोटीन जमा होने लगते हैं, जो याददाश्त खोने और भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं. इस कंडीशन को आधिकारिक तौर पर टाइप 3 डायबिटीज नहीं कहा जाता है, लेकिन यह एक प्रचलित शब्द बन चुका है.
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क्या है टाइप 4 डायबिटीज?

जब बुजुर्ग लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण डायबिटीज की कंडीशन पैदा हो जाती है, तब उसे टाइप 4 डायबिटीज कहा जाता है. कई बुजुर्गों का वजन भी कम होता है और उनकी लाइफस्टाइल भी ठीक होती है, लेकिन फिर भी वे इंसुलिन रेजिस्टेंस के शिकार हो जाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति उम्र बढ़ने के कारण पैदा होती है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में टी-रेगुलेटरी सेल्स की संख्या बढ़ने लगती है, जो शरीर के फैट टिश्यू में इंसुलिन के काम को बाधित करती हैं. यह टाइप 2 डायबिटीज से इसलिए अलग है, क्योंकि इसमें मोटापा कारण नहीं होता, बल्कि शरीर की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता में उम्र के साथ होने वाले बदलाव जिम्मेदार होते हैं.

ये डायबिटीज कितनी खतरनाक हैं?

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ये दोनों ही बीमारियां इसलिए खतरनाक हैं, क्योंकि इनके लक्षण सामान्य टाइप 1 और 2 डायबिटीज जैसे नहीं होते हैं. टाइप 3 डायबिटीज सीधे तौर पर डिमेंशिया और अल्जाइमर की ओर ले जाती है, जिसका वर्तमान में कोई सटीक इलाज नहीं है. वहीं टाइप 4 डायबिटीज को अक्सर लोग बुढ़ापे की सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे किडनी और हार्ट प्रभावित होने लगते हैं. इनके बारे में आम लोगों में जागरुकता कम है, इसलिए इनका डायग्नोसिस अक्सर बहुत देरी से होता है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है.

किस टेस्ट से लगाया जाता है पता?

टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज की पहचान करना सामान्य ब्लड शुगर टेस्ट या HbA1c से थोड़ा जटिल हो सकता है. टाइप 3 के मामले में व्यक्ति का शरीरिक शुगर लेवल सामान्य हो सकता है, लेकिन उसके ब्रेन में इंसुलिन का स्तर गड़बड़ हो सकता है, जिसके लिए कॉग्निटिव टेस्ट और स्पेशल इमेजिंग की जरूरत होती है. टाइप 4 के मरीजों में अक्सर लीन डायबिटीज देखी जाती है, जहां व्यक्ति दुबला-पतला होने के बावजूद हाई शुगर का शिकार होता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर उम्र के साथ याददाश्त कमजोर हो रही है या बिना किसी कारण के शुगर लेवल बढ़ रहा है, तो इस बारे में डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए.



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