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जब खीरे का ऊपरी सिरा काटकर उसी से खीरे पर घिसा जाता है तो सफेद झाग जैसा पदार्थ निकलने लगता है. लोगों का मानना है कि इससे खीरे की कड़वाहट दूर हो जाती है और उसका स्वाद बेहतर हो जाता है. वैज्ञानिक रूप से यह जरूरी नहीं माना जाता. लोकल 18 से बात करते हुए आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि खीरे में कई तरह के प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं. यही तत्व खीरे में हल्की कड़वाहट के लिए जिम्मेदार माना जाता है. यही तत्व हवा के संपर्क में आकर झाग जैसा दिखाई देने लगता है. जरूरी नहीं कि हर खीरे में झाग बने. यह खीरे की किस्म, उसकी ताजगी पर भी निर्भर करता है.
अक्सर आपने देखा होगा कि जब खीरे का ऊपरी सिरा काटकर उसी से खीरे पर घिसा जाता है तो सफेद झाग जैसा पदार्थ निकलने लगता है. कई लोग इसे देखकर हैरान हो जाते हैं और सोचते हैं कि आखिर यह झाग आता कहां से है. कुछ लोग इसे गंदगी समझ लेते हैं तो कुछ इसे किसी केमिकल का असर मानते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे एक साधारण वैज्ञानिक कारण छिपा हुआ है.
ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि खीरे में कई तरह के प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं. इनमें से एक प्रमुख तत्व कुकुर्बिटासिन नाम का यौगिक होता है. यही तत्व खीरे में हल्की कड़वाहट के लिए जिम्मेदार माना जाता है. जब खीरे का सिरा काटकर उसे उसी पर घिसा जाता है तो अंदर मौजूद रस बाहर आता है और यही तत्व हवा के संपर्क में आकर झाग जैसा दिखाई देने लगता है.
जब खीरे का सिरा घिसा जाता है तो उसकी सतह पर मौजूद रस और प्राकृतिक एंजाइम बाहर निकलते हैं. हवा के संपर्क में आने पर ये हल्की रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं. इसी वजह से झाग जैसा फोम बनने लगता है. यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया होती है और इसमें किसी बाहरी पदार्थ की जरूरत नहीं होती.
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कई लोग मानते हैं कि खीरे का सिरा घिसने से उसकी कड़वाहट कम हो जाती है. दरअसल खीरे के सिरे में कुकुर्बिटासिन की मात्रा थोड़ी ज्यादा हो सकती है. जब इसे घिसा जाता है तो उस हिस्से का थोड़ा रस बाहर निकल जाता है. इसी कारण लोगों को लगता है कि खीरा पहले से कम कड़वा हो गया है.
बहुत से लोग सोचते हैं कि यह झाग किसी कीटनाशक या केमिकल का संकेत है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह झाग खीरे के अंदर मौजूद प्राकृतिक रस और तत्वों के कारण बनता है. इसका सेहत पर कोई नकारात्मक असर नहीं होता और यह पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है.
यह जरूरी नहीं कि हर खीरे में झाग बने. यह खीरे की किस्म, उसकी ताजगी और उसमें मौजूद प्राकृतिक तत्वों की मात्रा पर निर्भर करता है. कुछ खीरों में झाग ज्यादा दिखाई देता है जबकि कुछ में बहुत कम या बिल्कुल नहीं बनता. इसलिए झाग का कम या ज्यादा होना सामान्य बात है.
भारत में बहुत से घरों में खीरा काटने से पहले उसका सिरा घिसने की परंपरा है. लोगों का मानना है कि इससे खीरे की कड़वाहट दूर हो जाती है और उसका स्वाद बेहतर हो जाता है. हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह जरूरी नहीं माना जाता, लेकिन फिर भी कई लोग आज भी इस आदत को अपनाते हैं.

