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गोमूत्र से ज्यादा पावरफुल है घोड़े का मूत्र, डीयू के पूर्व वीसी के बयान पर बवाल, लेकिन क्या है हकीकत

गोमूत्र से ज्यादा पावरफुल है घोड़े का मूत्र, डीयू के पूर्व वीसी के बयान पर बवाल, लेकिन क्या है हकीकत


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दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर दिनेश सिंह के एक बयान ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी. उन्होंने एक पॉडकास्ट में कहा कि लोग गोमूत्रकी बात करते हैं लेकिन घोड़े के मूत्र से भी कुछ मेडिकल उपयोग जुड़े हैं. वैज्ञानिक तौर पर एक हार्मोन दवा Premarin गर्भवती घोड़ी के मूत्र से प्राप्त तत्वों से बनाई जाती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि घोड़े का मूत्र सीधे दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी घरेलू इलाज को अपनाने से पहले वैज्ञानिक जानकारी और डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है.

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गौमूत्र से ज्यादा पावरफुल है घोड़े का मूत्र? डीयू के पूर्व वीसी दिनेश सिंह के बयान से छिड़ी बहस

हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, गणितज्ञ और नई शिक्षा नीति के समर्थक प्रोफेसर दिनेश सिंह के एक बयान ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में हलचल पैदा कर दी है. एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि लोग अक्सर गोमूत्रके औषधीय गुणों की बात करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि घोड़े का मूत्र भी कई तरह के मेडिकल उपयोग में काम आता है. उनके इस बयान के बाद इंटरनेट पर बहस शुरू हो गई कि क्या सच में घोड़े के मूत्र का इस्तेमाल दवा बनाने में किया जाता है या यह सिर्फ एक विचार है.

दरअसल भारत में सदियों से आयुर्वेद में गोमूत्रके बारे में कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं. कई लोग इसे शरीर की सफाई और कुछ बीमारियों के इलाज में उपयोगी मानते हैं. लेकिन जब प्रोफेसर दिनेश सिंह ने घोड़े के मूत्र के मेडिकल उपयोग की बात कही, तो लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि क्या इसका कोई वैज्ञानिक आधार भी है. इस पूरे मामले में यह समझना जरूरी है कि प्रोफेसर ने क्या कहा और वैज्ञानिक स्तर पर इस विषय में क्या जानकारी मौजूद है.

पॉडकास्ट में क्या बोले प्रोफेसर दिनेश सिंह
कनेक्टऑरिजनल के एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान प्रोफेसर दिनेश सिंह से जब गोमूत्रके फायदे को लेकर चर्चा हुई तो उन्होंने एक अलग दृष्टिकोण रखा. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर गाय को ही विशेष महत्व देते हैं, लेकिन भगवान पशुपतिनाथ का अर्थ ही यह है कि हर जीव महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि एक चर्चा के दौरान किसी ने गोमूत्रके गुणों की बात शुरू की तो उन्होंने वहां मौजूद लोगों को एक रिसर्च पेपर का जिक्र किया जिसमें घोड़े के मूत्र के कुछ मेडिकल उपयोग बताए गए थे.

उनका कहना था कि आयुर्वेद और विज्ञान दोनों में यह विचार मौजूद है कि हर प्राकृतिक पदार्थ में किसी न किसी तरह का उपयोग हो सकता है. उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि किसी एक चीज को ही चमत्कारी मानने की बजाय हमें व्यापक नजर से देखना चाहिए.

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क्या सच में दवा में इस्तेमाल होता है Horse Urine
अगर वैज्ञानिक नजर से देखा जाए तो दुनिया में एक ऐसी दवा जरूर है जो घोड़ों से जुड़ी प्रक्रिया से बनाई जाती है. इस दवा का नाम Premarin है. यह एक हार्मोन थेरेपी की दवा है जिसका उपयोग खासकर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्मोन संतुलन के लिए किया जाता है. इस दवा के नाम का अर्थ ही है Pregnant Mare Urine यानी गर्भवती घोड़ी के मूत्र से प्राप्त तत्व. इसमें मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन को प्रोसेस करके दवा तैयार की जाती है. कई सालों से यह दवा पश्चिमी देशों में इस्तेमाल होती रही है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि घोड़े का मूत्र सीधे दवा के रूप में पीया जाता है. वैज्ञानिक प्रक्रिया में उससे कुछ खास हार्मोन या केमिकल निकालकर दवा बनाई जाती है.

आयुर्वेद और पशु आधारित पदार्थ
आयुर्वेद में कई तरह के पशु और पौधों से जुड़ी चीजों का जिक्र मिलता है. आयुर्वेदिक ग्रंथों में यह विचार मिलता है कि प्रकृति में मौजूद हर चीज में कुछ न कुछ औषधीय गुण हो सकते हैं. गोमूत्रका उपयोग कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में बताया जाता है, लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस में इसके सभी दावों को पूरी तरह प्रमाणित नहीं माना जाता. इसी तरह घोड़े के मूत्र से जुड़ी बातें भी सीधे घरेलू इलाज के रूप में स्वीकार नहीं की जातीं.

सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ा विवाद
प्रोफेसर दिनेश सिंह के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ लोगों ने इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने की बात कही, जबकि कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर आलोचना भी की. असल में इस बयान का संदर्भ यह था कि विज्ञान में हर पदार्थ का अध्ययन किया जा सकता है और किसी भी चीज को बिना जांचे चमत्कारी कहना सही नहीं होता.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तरह के पशु मूत्र को सीधे दवा मान लेना सही नहीं है. मेडिकल साइंस में अगर किसी प्राकृतिक पदार्थ का उपयोग होता भी है तो उसे कई स्तर की जांच और प्रोसेसिंग के बाद ही दवा बनाया जाता है. इसलिए लोगों को सोशल मीडिया या अपूर्ण जानकारी के आधार पर किसी भी चीज का प्रयोग करने से बचना चाहिए और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह हमेशा डॉक्टर से लेनी चाहिए.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

About the Author

Mohit Mohit

मीडिया इंडस्ट्री में 8+ साल का अनुभव, ABP, NDTV, दैनिक जागरण और इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़कर काम किया। लाइफस्टाइल, धर्म और संस्कृति की कहानियों को रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करने का खास हुनर।…और पढ़ें



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