बिना ग्रैविटी के नॉर्मल तरीके से कोई भी इंसान नहीं रह सकता है. अगर आपके घर, कमरे, आसपास गुरुत्वाकर्षण नहीं है तो आप भारहीन होकर हवा में तैरते रहेंगे. जरा सोचिए कि आपको कुछ घंटे या दिन भर के लिए बिना ग्रैविटी के रहना पड़े तो आपके साथ क्या होगा? क्या आपके शरीर में कोई बदलाव होगा, क्या आपके अंग काम करना बंद कर देंगे? क्या आपको पर्मानेंट कोई नुकसान होगा? जानिए यहां जब आपको बिना ग्रैविटी के रहना पड़े तो क्या समस्याएं हो सकती हैं सेहत के साथ?
बिना ग्रैविटी के रहने से क्या हो सकता है सेहत पर असर?
बिना ग्रैविटी के जिंदगी की कल्पना करना मुश्किल है. आपने देखा होगा कि अंतरिक्ष में भी एस्ट्रोनॉट हवा में उड़ते रहते हैं. हालांकि, वहां गुरुत्वाकर्षण बल की मात्रा अलग और भिन्न होती है. लेकिन, धरती पर आपको दिन भर एक कमरे में रख दिया जाए, वह भी बिना ग्रैविटी के तो सेहत पर क्या होगा असर? इंडियनएक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार, जब कोई हेल्दी इंसान 24 घंटे के लिए जीरो ग्रैविटी में रहेगा तो ब्लड सर्कुलेशन और मस्तिष्क के कार्य क्षमता में बदलाव देखे जा सकते हैं. शरीर और अन्य लिक्विड पदार्थ छाती से होकर सिर की तरफ बढ़ सकते हैं. इससे नाक बंद हो सकता है. चेहरे पर सूजन आ सकता है. सिरदर्द महसूस हो सकता है.
ब्लड सर्कुलेशन में उतार-चढ़ाव
इंडियनएक्सप्रेस के अनुसार, यदि कोई हेल्दी व्यक्ति चौबीस घंटे के लिए जीरो-ग्रैविटी में रह जाए तो नीचे के शरीर में जमा रहने वाला खून ग्रैविटी न होने से छाती और सिर की तरफ चला जाता है. इस दौरान प्लाज्मा वॉल्यूम भी कम होने लगता है. शरीर इसे एक्स्ट्रा लिक्विड मानकर यूरिन की मात्रा बढ़ा देता है. भारहीनता के शुरुआती बदलावों में से एक होते हैं शरीर में होने वाले ऐसे बदलाव.जब आप धरती पर होते हैं तो गुरुत्वाकर्षण खून को पैरों की तरफ खींचता है, लेकिन भारहीनता के कारण ये खिंचाव समाप्त हो जाता है.
रक्तचाप में बदलाव
गुरुत्वाकर्षण न होने पर दिल को खून ऊपर की ओर पंप करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. भारहीनता की स्थिति में दिल को दिमाग और ऊपरी शरीर तक खून पहुंचाने में कम मेहनत करनी पड़ती है. हालांकि, शुरुआत में ब्लड प्रेशर में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है, लेकिन जब प्लाज्मा वॉल्यूम कम होता है तो ब्लड प्रेशर कम हो सकता है. 24 घंटे के भीतर ये हृदय संबंधी बदलाव मामूली रहते हैं. ऐसे में एक हेल्दी इंसान के लिए शरीर में होने वाले ऐसे बदलाव सहन करने लायक होते हैं.
वैसे 24 घंटे के अंदर ही आपकी मांसपेशियों और हड्डियों में कोई नुकसान देखने को नहीं मिलेगा. ये नुकसान तब हो सकता है, जब सप्ताह या इससे अधिक दिनों तक आप जीरो ग्रैविटी में रह जाएं. जब कई दिनों तक शरीर पर दबाव नहीं पड़ेगा तो मांसपेशियों और हड्डियों का कमजोर होना, नुकसान देखा जा सकता है.
दिमाग होता है प्रभावित
शून्य गुरुत्वाकर्षण न्यूरोलॉजिकल दृष्टिकोण से काफी भ्रमित करने वाला होता है. इंडियनएक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में न्यूरोलॉजी की सलाहकार डॉ. पूजा आनंद के अनुसार, दिमाग लगातार अपने शरीर की स्थिति और दिशा बनाए रखने के लिए कान के अंदर, आंखों, मांसपेशियों और जोड़ों से मिलने वाले संकेतों पर निर्भर रहता है. गुरुत्वाकर्षण के अभाव में यह समन्वित प्रणाली अचानक बाधित हो जाती है. दिमाग को विरोधाभासी जानकारी मिलती है, जिससे असंतुलन और स्थानिक भ्रम पैदा होता है.
कैसे हो सकता है शरीर नॉर्मल?
एक्सपर्ट के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण में लौटना, उसे छोड़ने से ज्यादा मुश्किल महसूस हो सकता है. जब शून्य गुरुत्वाकर्षण में शरीर के तरल स्तर बदल जाते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण में वापसी के बाद खून पैरों की ओर खिंचने लगता है. इससे दिमाग तक खून का प्रवाह अस्थायी रूप से कम हो सकता है. इस स्थिति में आपको चक्कर आ सकता है या फिर बेहोशी हो सकती है. इस कंडीशन को ऑर्थोस्टेटिक इनटॉलरेंस कहते हैं. 24 घंटे के लिए जीरो-ग्रैविटी में रहना थोड़ा बहुत असहज हो सकता है, लेकिन इसके कोई अधिक नुकसान नहीं होते हैं. कुछ हल्के लक्षण नजर आ सकते हैं जैसे जकड़न, उल्टी, जी मिचलाना, चेहरे पर सूजन होना, चक्कर महसूस होना साथ ही अस्थायी रूप से तालमेल में बदलाव आदि महसूस हो सकता है. एक हेल्दी शरीर इस स्थिति में जल्दी एडजस्ट कर लेता है, फिर चाहे गुरुत्वाकर्षण न के बराबर हो.

