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घर के पास का ये पेड़ है औषधि का खजाना, इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर घाव भरने तक, जानिए पीपल और गूलर के फायदे

घर के पास का ये पेड़ है औषधि का खजाना, इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर घाव भरने तक, जानिए पीपल और गूलर के फायदे


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भारत में पीपल और गूलर के पेड़ सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि औषधीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. आयुर्वेद में इनके फल, छाल, पत्ते और दूध का उपयोग कई बीमारियों के उपचार में किया जाता है. ये पाचन सुधारने, मधुमेह नियंत्रित करने, त्वचा रोगों में राहत देने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार होते हैं.

पीपल और गुड़हल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. गुड़हल के फूल और पत्ते एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो बालों को मजबूत बनाने, त्वचा को चमकदार रखने, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं. वहीं, पीपल के कोमल पत्ते पेट की समस्याओं जैसे गैस और मरोड़ में राहत देने के लिए फायदेमंद हैं.

एक्सपर्ट डॉ. विनीता शर्मा के अनुसार, पीपल के पेड़ पर अक्सर गूलर पाया जाता है, जो आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना जाता है. इसके फल, छाल और दूध में फाइबर, विटामिन A, C, एंटीऑक्सीडेंट और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह मधुमेह को नियंत्रित करने, पाचन सुधारने, कब्ज से राहत दिलाने, सूजन कम करने और घाव भरने में फायदेमंद माना जाता है.

पीपल का पेड़, विशेषकर इसकी कोपलें, छाल और फल, पाचन सुधारने और कब्ज से राहत पाने का पारंपरिक आयुर्वेदिक उपाय है. इसमें मौजूद फाइबर और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पेट की सूजन, एसिडिटी, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू रहती है.

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गूलर और पीपल के औषधीय गुण, विशेषकर गूलर के फल और छाल, मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं. इसमें मौजूद फाइबर और एंटी-डायबिटिक गुण ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं.

पीपल के गूलर, छाल, पत्ते और दूध सूजन और घाव के उपचार में प्रभावी माने जाते हैं. इसकी तासीर ठंडी होने के कारण यह घाव को जल्दी भरने, दर्द कम करने और संक्रमण को रोकने में मदद करता है.

पीपल के पेड़ पर पाए जाने वाले गूलर के फल, छाल और दूध आयुर्वेद में उच्च औषधीय गुणों और इम्यूनिटी बढ़ाने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C और सूजनरोधी गुण होते हैं, जो पाचन, बवासीर, त्वचा रोगों और मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हैं.

पीपल और गूलर दोनों ही त्वचा रोगों के लिए अत्यंत औषधीय माने जाते हैं. पीपल की कोपलें और छाल दाद, खुजली और एलर्जी में लाभकारी हैं, जबकि गूलर का दूध, छाल और फल फोड़े-फुंसी, नासूर, चर्म रोग और घाव भरने में प्रभावी माने जाते हैं.



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