Donald Trump’s neck Red Mark: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब ईरान के युद्ध को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तभी एक फोटो जर्नलिस्ट का लैंस उनकी गर्दन पर टिक गया. ट्रंप की गर्दन की स्किन बुरी तरह लाल चकत्ते से भरी दिखाई दी. जब यह तस्वीर खबरों में आई तो पूरी दुनिया में यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप की गर्दन की स्किन में हुआ क्या है. सोशल मीडिया पर यह चर्चा अब भी जारी है. जब यह खबर दूर तक फैल गई तो डोनाल्ड ट्रंप के डॉक्टर, डॉ. सीन बारबाबेला ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप अपनी गर्दन के दाहिने हिस्से पर एक बहुत सामान्य क्रीम का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह एक एहतियाती इलाज है, जिसे व्हाइट हाउस के डॉक्टर ने ही लिखा है.
क्यों है लाल निशान
डेली मेल की खबर के मुताबिक डॉक्टर ने बताया कि राष्ट्रपति पिछले एक हफ्ते से यह इलाज करा रहे हैं और लालिमा कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती है. हालांकि अब तक किसी बीमारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग अंदाजे लगा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि यह सूट की ड्राई क्लीनिंग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स से हुई कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (त्वचा की एलर्जी) हो सकती है. वहीं कुछ ने रोसैशिया नाम की त्वचा की बीमारी की आशंका जताई, जिससे चेहरा या स्किन लाल हो जाती है. बताया गया है कि ट्रंप पहले से इस समस्या से पीड़ित रहे हैं. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पपड़ी जैसी दिखने वाली त्वचा शिंगल्स (चेचक के वायरस से होने वाला दर्दनाक रैश) का संकेत हो सकती है.
क्या यह कोई बीमारी है
डॉक्टरों का मानना है कि ट्रंप की गर्दन में जो लाल पपड़ी जैसे निशान दिख रहे हैं, इसका कारण एक्टिनिक केराटोसिस हो सकता है. यह धूप की वजह से होने वाली स्किन की आम समस्या है, जिसमें स्किन रेड दिखने लगती है. डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पॉल फरंट ने डेली मेल को बताया कि गर्दन के दाहिने हिस्से पर इस तरह के लाल रैशेज एक्टिनिक केराटोसिस के इलाज के कारण भी हो सकता है. यह धूप से त्वचा को हुए नुकसान की वजह से होने वाली एक प्रीकैंसरस (कैंसर से पहले की) स्थिति हो सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि जब इस तरह की क्रीम लगाई जाती है, तो लंबे समय तक लालिमा और जलन होना सामान्य बात है. ट्रंप की शर्ट के कॉलर के नीचे जो लालपन दिख रहा है, वह इसी वजह से हो सकता है.
क्या होता है एक्टिनिक केराटोसिस
एक्टिनिक केराटोसिस (जिसे सोलर केराटोसिस भी कहा जाता है) त्वचा पर बनने वाले सूखे और पपड़ी जैसे धब्बे होते हैं. यह कई सालों तक धूप में रहने की वजह से होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें को स्किन झेल नहीं पाती है. ये आमतौर पर उन जगहों पर दिखाई देते हैं जो ज्यादा धूप में रहती हैं, जैसे चेहरा, सिर की त्वचा, कान, गर्दन, हाथों का पीछे का हिस्सा और बाजू. यह समस्या काफी आम है. 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लगभग हर चार में से एक व्यक्ति को यह हो सकती है. ये धब्बे आमतौर पर आधा इंच से एक इंच तक के होते हैं. त्वचा के रंग के अनुसार ये हल्के, गुलाबी, लाल या भूरे रंग के हो सकते हैं. छूने पर ये खुरदरे या रेतीले जैसे महसूस होते हैं.
क्या यह गंभीर है?
यह बीमारी आमतौर पर गंभीर नहीं होती. लेकिन बहुत कम मामलों में यह आगे चलकर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा नाम के त्वचा कैंसर में बदल सकती है, जो त्वचा की ऊपरी परत से शुरू होता है.
इलाज कैसे होता है?
अगर किसी को केवल एक छोटा धब्बा है, तो डॉक्टर उसे कुछ समय तक देखने की सलाह दे सकते हैं कि वह खुद ठीक होता है या नहीं. लेकिन अगर धब्बे ज्यादा हों, या उनमें दर्द और खुजली हो, तो इलाज जरूरी हो जाता है. ऐसे में मरीज को डर्मेटोलॉजिस्ट के पास भेजा जा सकता है. इसमें क्रीम से ठीक किया जाता है. अगर क्रीम से ठीक नहीं हो रहा है तो आखिर में छोटी सी सर्जरी होती है. हालांकि इसके लिए समय पर जांच जरूरी है.
आम लोगों को क्या करना चाहिए.
आम लोगों को शरीर के किसी भी हिस्से में लाल चक्कते या रैशेज दिखें और दो-तीन में यह ठीक न हो, खुजली हो, दर्द है तो तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए. अगर ये रैशेज बढ़ता जाए तो देर न करें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

