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Vitamin D deficiency: आजकल लोगों में थकान, कमजोरी या हड्डियों में दर्द जैसी समस्याएं आम हो गई है. यदि किसी व्यक्ति को लगातार ऐसी कोई समस्याएं महसूस होती हैं, तो उसे विटामिन डी की जांच जरूर करानी चाहिए. समय पर जांच और उपचार से कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है. विटामिन डी की कमी से बचने के लिए आप इन उपायों को भी अपना सकते हैं.
कोरबा. बदलती जीवनशैली का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है. वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मुख्य कारण आधुनिक लाइफस्टाइल और खानपान में आया बदलाव है.
इस विषय पर डॉ. चंद्रकांत भास्कर, कोरबा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक बताते हैं कि आजकल लोगों का जीवन पूरी तरह से बदल चुका है. पहले जहां लोग खुले वातावरण में अधिक समय बिताते थे, वहीं अब ज्यादातर समय घर या दफ्तर के अंदर ही बीतता है. लंबे ऑफिस ऑवर्स, वर्क फ्रॉम होम और धूप में कम निकलना विटामिन डी की कमी के प्रमुख कारण बन गए हैं. इसके अलावा खानपान में भी बदलाव आया है, जिससे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहे हैं.
थकान, कमजोरी या हड्डियों में दर्द जैसे लक्षण
विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं. इसकी कमी होने पर हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा विटामिन डी मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है. यह डिप्रेशन से लड़ने में मदद करता है और थकान व चिड़चिड़ेपन को कम करता है. बालों की सेहत बनाए रखने में भी इसकी अहम भूमिका होती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी या हड्डियों में दर्द जैसी समस्याएं महसूस होती हैं, तो उसे विटामिन डी की जांच जरूर करानी चाहिए. समय पर जांच और उपचार से कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.
इस तरह बनाए रहें विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा
शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए नियमित रूप से धूप लेना सबसे सरल और प्रभावी तरीका है. डॉ. भास्कर के अनुसार, सुबह 9 से 12 बजे के बीच 10 से 15 मिनट तक धूप में रहना पर्याप्त होता है. इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे शरीर पर पढ़नी चाहिए, जिससे विटामिन डी का निर्माण हो सके. इसके अलावा आहार में भी सुधार जरूरी है. दूध, टोफू, मिलेट्स और नॉनवेज खाद्य पदार्थों में विटामिन डी की अच्छी मात्रा पाई जाती है. संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है.
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