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हरियाणा के अंबाला शहर स्थित नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने लोकल 18 को बताया है कि अचानक ठंडी चीजों के संपर्क में आने से दांतों की बाहरी परत (इनैमल) प्रभावित होती है, जिससे अंदर की नसें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं. यही कारण है कि ठंडा या गर्म कुछ भी खाते-पीते समय दांतों में झनझनाहट या तेज दर्द महसूस होता है.
अंबाला: देशभर में गर्मी का पारा बढ़ने के साथ ही लोगों की खान-पान की आदतों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए लोग आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और बर्फ जैसे ठंडे पेय पदार्थों का जमकर सेवन कर रहे हैं. हालांकि, यह तात्कालिक राहत अब दांतों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है, क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ठंडी और मीठी चीजों के सेवन से दांतों में संवेदनशीलता (सेंसिटिविटी) और दर्द के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. अक्सर लोग गर्मी से बचाव के लिए मीठी व ठंडी चीजों का सेवन तो करने लगते हैं, लेकिन अपने दांतों का ख्याल रखना भूल जाते हैं.
कैसे पहुंचता है दांतों को नुकसान
हरियाणा के अंबाला शहर स्थित नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि अचानक ठंडी चीजों के संपर्क में आने से दांतों की बाहरी परत (इनैमल) प्रभावित होती है, जिससे अंदर की नसें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं. यही कारण है कि ठंडा या गर्म कुछ भी खाते-पीते समय दांतों में झनझनाहट या तेज दर्द महसूस होता है. उन्होंने बताया कि इन दिनों ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, हालांकि कुछ सावधानियां अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है.
दांतों के लिए घरेलू रामबाण आयुर्वेदिक उपाय
उन्होंने बताया कि दांतों के लिए घरेलू रामबाण आयुर्वेदिक उपाय के रूप में त्रिफला चूर्ण उपयोगी है. यह सरल नुस्खा दांतों की सफाई, मसूड़ों की मजबूती और मुंह की दुर्गंध को दूर करने में सहायक माना जाता है. त्रिफला हरड़ (हरितकी), बहेड़ा (विभीतकी) और आंवला (आमलकी) से मिलकर बनता है. इसके चूर्ण का काढ़ा बनाकर भोजन के बाद कुल्ले के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे दांतों पर जमी गंदगी और प्लाक की सफाई में मदद मिलती है.
इसके अलावा, सरसों के तेल में दो चम्मच नमक मिलाकर रात में दांतों और मसूड़ों की हल्के हाथों से 1-2 मिनट मालिश करने से सूजन और खून आने की समस्या में राहत मिलती है. इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला कर लेना चाहिए. उन्होंने बताया कि फिटकरी को भूनकर उसका पाउडर बनाकर रात को सोने से पहले हल्की मालिश करने से कैविटी की समस्या में भी लाभ मिलता है.
उन्होंने यह भी बताया कि अमरूद, जामुन और आम के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर उससे कुल्ला करना आयुर्वेद में लाभकारी माना गया है.
आंवले का माउथ फ्रेशनर
यदि मुंह से दुर्गंध आती है, तो घर पर बना आंवले का माउथ फ्रेशनर उपयोगी हो सकता है. आंवले में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो मुंह की बदबू दूर करने के साथ शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करते हैं. इसे बनाने के लिए 500 ग्राम आंवले को धोकर पानी में उबाल लें. उबालने के बाद उसकी फांकों को अलग कर लें और पानी निकाल दें. फिर इसमें 500 ग्राम मिश्री पाउडर मिलाकर ढककर रख दें. कुछ समय बाद आंवला पानी छोड़ देगा, उस पानी को निकालकर 2 से 3 दिन तक यही प्रक्रिया दोहराएं. अंत में छानकर इसमें भुना जीरा पाउडर, अमचूर पाउडर, काली मिर्च पाउडर और काला नमक मिलाकर अच्छी तरह मिश्रित करें और एयरटाइट कंटेनर में रख लें. यह माउथ फ्रेशनर काफी लाभकारी माना जाता है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें